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एक भारतीय होने के नाते राष्ट्रगान से जुड़ी यह नौ बातें आपको ज़रुर जानना चाहिए 

"जन गण मन" भारतवासियों के लिए सिर्फ एक गीत नहीं है बल्कि इसके हर एक शब्द में करोड़ो भारतवासियों की आत्मा बस्ती है। जनगण मन का संबंध सिंध से है, जनगण मन का संबंध हिन्द से है। हम विश्व के किसी भी कोने में रहे जब भी कभी जनगण मन कानों में पड़ता है तो पैर उसके सम्मान में अपने आप खड़े हो जाते हैं। सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है, आँखों में तिरंगा नज़र आ जाता है और रोम-रोम वन्दे-मातरम कहने लग जाता है।

हम यह तो जानते हैं कि जन गण मन गुरुदेव रविन्द्र नाथ टैगोर की रचना है मगर जनगण मन से जुड़े और भी कई रोचक तथ्य हैं जिनसे हम अब तक अनजान थे।     

एक भारतीय होने के नाते राष्ट्रगान से जुड़ी यह नौ बातें आपको ज़रुर जानना चाहिए 

एक भारतीय होने के नाते राष्ट्रगान से जुड़ी यह नौ बातें आपको ज़रुर जानना चाहिए 

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पहली बार राष्ट्रगान 1911 में गाया गया था  

पहली बार राष्ट्रगान 1911 में गाया गया था  

16 दिसंबर 1911 को कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में पहली बार जन गण मन गाया गया था। मगर उस वक्त तक इसे संगीत बद्ध नहीं किया गया था।  

कहा जाता था कि यह जॉर्ज पंचम के लिए बनाया गया था 

कहा जाता था कि यह जॉर्ज पंचम के लिए बनाया गया था 

कोलकाता के कुछ अख़बारों में लिखा गया कि संभवतः यह गीत ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम के लिए लिखा गया होगा क्योंकि 30 दिसंबर 1911 को उनका भारत आगमन हुआ था। मगर 1939 में गुरुदेव ने इस बात का खंडन किया।  

इसे संगीत मिला विदेश में  

इसे संगीत मिला विदेश में  

जन गण मन को देश से बहार संगीत मिला। पहली बार जन गण मन की संगीतबद्ध परफॉर्ममेंस विदेश में किया गया था।   

24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने मान्यता दी गई  

24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने मान्यता दी गई  

संविधान सभा ने  24 जनवरी 1950 को जन गण मन को राष्ट्रगान के तौर पर मान्यता दी।  

इसके अंग्रेजी अनुवाद को संगीतबद्ध किया मशहूर कवि जेम्स कज़िन की पत्नी मारग्रेट ने 

इसके अंग्रेजी अनुवाद को संगीतबद्ध किया मशहूर कवि जेम्स कज़िन की पत्नी मारग्रेट ने 

जन गण मन के अंग्रेजी अनुवाद को संगीत में बांधा है मशहूर कवि जेम्स कज़िन की पत्नी मारग्रेट ने। यह बेसेंट थियोसोफिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य थीं।

नेता जी सुभाषचंद्र बोस ने कराया था इसका हिंदी में अनुवाद 

नेता जी सुभाषचंद्र बोस ने कराया था इसका हिंदी में अनुवाद 

जन गण मन पहले संस्कृत निष्ठ बांग्ला में लिखा गया था मगर सुभाषचन्द्र बोस ने इसका हिंदी में अनुवाद किया। इसका अनुवाद कैप्टन आबिद अली ने किया था और इसे संगीतबद्ध किया था कैप्टन राम सिंह ने।  

'सुबह सुख चैन' रखा गया था नाम 

'सुबह सुख चैन' रखा गया था नाम 

जन गण मन का शुरूआती दौर में 'सुबह सुख चैन' नाम रखा गया था तथा बाद में इसे जनगण मन कहा जाने लगा। इस गीत के लिए आधिकारिक रूप से ज़रूरी है कि इसे 52 सेकंड में पूरा किया जाए। इससे ज्यादा समय लेने पर ये राष्ट्रगान का अपमान माना जाता है।   

बिना बहस के बनाया गया इसे राष्ट्रगान 

बिना बहस के बनाया गया इसे राष्ट्रगान 

राष्ट्रगान के मुद्दे पर संविधान सभा में कोई बहस नहीं हुई थी। संविधान सभा में राष्ट्रपति के एक बयान पर इसे राष्ट्रगान घोषित कर दिया गया था। हालांकि अनौपचारिक तौर पर मुस्लिम समुदाय को इस गीत पर कुछ आपत्ति थी।

वन्देमातरम को भी दिया गया बराबर हक़ 

वन्देमातरम को भी दिया गया बराबर हक़ 

राष्ट्रपति ने बयान जारी कर कहा था कि स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाले 'वंदे मातरम गीत' को भी बराबर का सम्मान दिया जाएगा। इसके बाद वन्दे मातरम को राष्ट्र गीत घोषित किया गया। 

सुनिए सम्पूर्ण जनगण मन 

क्या जन गण मन सुनते समय आपका का रोम-रोम देशप्रेम से भर उठता है?

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