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1500 साल से हवा में खड़ा है यह मंदिर, इस अद्भुत मंदिर को बनाने के हैं दो कारण

मंदिर और मठ या तो ज़मीन पर बने होते हैं या फिर पहाड़ियों पर। लेकिन दुनिया में एक ऐसा मंदिर भी है जो लगभग हवा में लटका हुआ है। इसीलिए इस मंदिर को 'हैंगिंग टेम्पल' भी कहा जाता है।

मंदिर का निर्माण तकरीबन 1500 वर्ष पूर्व का बताया जाता है। तब से लेकर आज तक इस मंदिर का आधे से ज़्यादा हिस्सा हवा में ही लटका हुआ है। इस मंदिर का नाम 'शुआन खोंग' है, जिसका अंग्रेजी में मतलब होता है हेंगिंग टेम्पल। 

इस ऐतिहासिक मंदिर को विश्व भर के पर्यटक देखने आते हैं, इस वजह से साल भर यहां पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है। चीन में बौद्ध, ताओ और कन्फ्युशियस धर्मों की मिश्रित शैली से बना यह एकलौता अद्भुत मंदिर सुरक्षित बचा है। आइये जानते हैं इस आश्चर्यजनक मंदिर के बारे में कुछ और बातें। 

1500 साल से हवा में खड़ा है यह मंदिर, इस अद्भुत मंदिर को बनाने के हैं दो कारण

1500 साल से हवा में खड़ा है यह मंदिर, इस अद्भुत मंदिर को बनाने के हैं दो कारण

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कहाँ स्थित है यह मंदिर?

कहाँ स्थित है यह मंदिर?

ये अद्भुत मंदिर चीन के शहर ताथोंग से 65 किलोमीटर दूर है। शानसी प्रान्त के हुन्यान कस्बे में स्थित हंग पहाड़ी के बेहद संकरे स्थान पर बनाया गया यह मंदिर बेहद ही लम्बा है।

घनी पहाड़ियोंके  के बीच बना है मंदिर 

घनी पहाड़ियोंके  के बीच बना है मंदिर 

घनी पहाड़ियों के बीच घाटी में फैले एक छोटे से बेसिन पर यह मंदिर बना हुआ है। घाटी के दोनों ओर लगभग 100 मीटर ऊँची सीधी खड़ी चट्टानें हैं। यह मंदिर ऐसी ही सीधी खड़ी चट्टान पर लगभग 50 मीटर की ऊंचाई पर बना हुआ है जो दूर से देखने पर हवा में स्थित नज़र आता है।

लकड़ियों के सहारे टिका है मंदिर 

लकड़ियों के सहारे टिका है मंदिर 

यह बहुमंजिला मंदिर दस से अधिक पतली-पतली लकड़ियों पर खड़ा है। मंदिर पर पहाड़ी की चट्टान का एक बाहरी हिस्सा आगे की ओर लटका हुआ है जिससे एेसा लगता है कि चट्टान का ये सिरा अभी मंदिर पर गिर जायेगा। लेकिन आज तक कभी ऐसा हुआ नहीं है।

नीचे देखना है मना

नीचे देखना है मना

लकड़ियों से बनी पगडंडियों से होकर जाते समय पर्यटकों को हिदायत दी जाती है कि वे नीचे नही देखें क्योंकि ज़रा सी लापरवाही से सीधे खाई में गिरने का खतरा रहता है। 

लकड़ी की पगडंडियों से होकर जाना पड़ता है मंदिर में। 

लकड़ी की पगडंडियों से होकर जाना पड़ता है मंदिर में। 

इस मंदिर में छोटे-बड़े लगभग 40 से ज़्यादा भवन हैं।  जिसमें जाने के लिए लकड़ियों की बनी हुई पगडंडियों से रास्ता बनाया गया है।

दूर से देखने पर होता है आश्चर्य 

दूर से देखने पर होता है आश्चर्य 

इस मंदिर को दूर से देखने पर आश्चर्य होता है। मंदिर में इतनी भीड़ होने के बाद भी ये मंदिर बिलकुल भी नहीं हिलता और ऐसा लगता है जैसे किसी ने बना-बनाया मंदिर चट्टान से लटका दिया हो। 

आखिर क्यों बनाया गया ये मंदिर

आखिर क्यों बनाया गया ये मंदिर

सवाल ये उठता है कि आखिर इस मंदिर को क्यों बनाया गया है? चीन की सरकारी वेबसाइट के अनुसार इस मंदिर को बनाने के दो करण थे। पहला यह की उस समय ये पहाड़ी और घाटी आवाजाही का एक प्रमुख मार्ग थी और वहां से धार्मिक अनुयायी और भिक्षुक गुजरते थे जिससे वे वहां पर आराधना कर सकते थे। दूसरा करण ड्रेगन का बताते हैं जिसके अनुसार यहाँ पर ड्रेगन के प्रकोप को कम करने के लिए इस मंदिर का निर्माण किया गया था। 

अद्भुत कला और संस्कृति का संगम है ये मंदिर।

अद्भुत कला और संस्कृति का संगम है ये मंदिर।

ये मंदिर उस दौर की अद्भुत कला और संस्कृति को अपने मे समेटे हुए है। क्योंकि इस मंदिर के निर्माण में बौद्ध, ताओ और कन्फ्युशियस धर्मों की मिश्रित शैली का संगम है। 

क्या आप ऐसी अन्य अद्भुत जगहों के बारे में जानना चाहेंगे?

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