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राज्यसभा में मनमोहन सिंह ने साधा प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना, गिनाई नोटबंदी की दस खामियां 

नोटबंदी के मुद्दे पर आम जनता से ज्यादा विरोध तो राजनीतिक पार्टियां और उनके नेता दर्ज करवा रहे है। संसद के दोनों सदनों में शीतकालीन सत्र की शुरुआत से ही नोटबंदी के विरोध में स्वर उठ रहे हैं। कई पार्टियों के वरिष्ठ नेता नोटबंदी के मुद्दे पर अपना विरोध जता चुके हैं। इन राजनेताओं में अब देश के वरिष्ठ अर्थशास्त्री और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का भी नाम शामिल हो गया है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राज्य सभा में नोटबंदी का विरोध करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा और इस कदम की दस खामियां भी गिनाई।

 तो आइये विस्तार से जानते है मनमोहन सिंह द्वारा गिनाई गई उन खामियों के बारे में।  

राज्यसभा में मनमोहन सिंह ने साधा प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना, गिनाई नोटबंदी की दस खामियां 

राज्यसभा में मनमोहन सिंह ने साधा प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना, गिनाई नोटबंदी की दस खामियां 

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कुप्रबंधन का बहुत बड़ा उदाहरण है ये  

कुप्रबंधन का बहुत बड़ा उदाहरण है ये  

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नोटबंदी के फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे इस फैसले के उद्देश्यों से असहमत नहीं है लेकिन यह कुप्रबंधन का बहुत बड़ा नमूना है इसे लेकर पूरे देश में कोई दो राय नहीं है।  

अंतिम परिणाम का नहीं लगाया जा सकता अनुमान 

अंतिम परिणाम का नहीं लगाया जा सकता अनुमान 

उन्होंने यह भी कहा कि नोटबंदी के इस फैसले से कृषि और आर्थिक विकास के क्षेत्र में क्या अंतिम परिणाम होंगे इसका अनुमान तो मैं नहीं लगा सकता, लेकिन इस कदम के परिणामस्वरूप देश की जीडीपी में 2% की कमी जरूर आएगी।  

50 दिन नहीं होते कम 

50 दिन नहीं होते कम 

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री जी ने अपने भावुक कर देने वाले भाषण में कहा था कि सिर्फ 50 दिन की ही बात है। लेकिन असल में गरीब और वंचित लोगों के लिए 50 दिन भी विनाशकारी होते हैं। 

निंदा के लिए एक पंक्ति ही है काफी 

निंदा के लिए एक पंक्ति ही है काफी 

देश की जनता ने बैंकों में पैसा जमा कराए, लेकिन उन्हें निकाल नहीं सकते, यह एक पंक्ति ही इस फैसले के बारे में बहुत कुछ कह देती है। इससे ज्यादा इसकी क्या निंदा होगी।  

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया की गिर रही है साख 

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया की गिर रही है साख 

इस फैसले के लागू होने के बाद से ही पी.एम.ओ. और आर.बी.आई हर रोज नए-नए नियम ला रही है। जिससे देश की जनता के सामने इनकी छवि बिगड़ रही है। मुझे इस बात का खेद है लेकिन यह जायज़ भी है। 

प्रधानमंत्री को लाना होगा रचनात्मक प्रस्ताव 

प्रधानमंत्री को लाना होगा रचनात्मक प्रस्ताव 

उन्होंने प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी को सुझाव देते हुए कहा कि उन्हें लोगों की परेशानियों को दूर करने के उद्देश्य से इस योजना के क्रियान्वयन के लिए रचनात्मक प्रस्ताव पेश करने की जरुरत है। 

संगठित लूट है यह 

संगठित लूट है यह 

मनमोहन सिंह ने अपने भाषण में नोटबंदी को संगठित और वैध लूट करार दिया।  

अब भी उम्मीद है उन्हें मोदी से 

अब भी उम्मीद है उन्हें मोदी से 

मनमोहन सिंह ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री जनता की परेशानियों को दूर करने के लिए व्यवहारिक कदम ढूंढ कर लाएंगे।  

बैंकिंग सिस्टम से उठ सकता है जनता का भरोसा 

बैंकिंग सिस्टम से उठ सकता है जनता का भरोसा 

उनका यह भी मानना है कि जनता की शिकायतों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। पिछले कुछ दिनों में इस बेन की वजह से कई लोगों की जाने जा चुकी हैं। यह जो कुछ भी हो रहा है इसके फलस्वरूप करेंसी और बैंकिंग सिस्टम से जनता का भरोसा उठ सकता हैं।   

समर्थकों को याद दिलाया 'In the long run, we are all dead'

समर्थकों को याद दिलाया 'In the long run, we are all dead'

उन्होंने नोटबंदी के समर्थकों पर निशाना साधते हुए कहा कि समर्थक मान रहे है कि यह फैसला आगे जाकर फायदे का सौदा साबित होगा। लेकिन जो लोग ऐसा मान रहे है वो याद कर ले कि 'In the long run, we are all dead' . 

क्या पूर्व प्रधानमन्त्री श्री मनमोहन सिंह जी की इन बातों से आप सहमत हैं?

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