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प्रीमैच्योर बेबी की कैसे करें देखभाल, जानिए महत्वपूर्ण बातें 

कुछ बच्चों का जन्म गर्भावस्था के 9 महीने या 36 हफ़्ते पुरे होने के पहले ही हो जाता है। गर्भावस्था के पहले जन्में बच्चों को "प्रीमैच्योर बेबी" कहते हैं। समय से पहले जन्में इन बच्चों के शारीरिक अंग पूरी तरह विकसित नहीं होते हैं। इन बच्चों के शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र भी इतना मज़बूत नहीं होता कि वें समय से जन्में बच्चों की तरह सामान्य वातावरण में रह पाए। अतः इन्हें कुछ ज़्यादा ही देखभाल की आवश्यकता होती हैं।

हॉस्पिटल में डॉक्टर्स और एक्सपर्ट्स के बीच इनकी देखभाल आसानी से हो जाती हैं। लेकिन घर पर प्रीमैच्योर बेबी की देखभाल करना एक बहूत ही मुश्किल चुनौती भरा कार्य है।
इस काम को आसान बनाने के लिए आपको कुछ महत्वपूर्ण बाते जानना बेहद ज़रुरी हैं।      

प्रीमैच्योर बेबी की कैसे करें देखभाल, जानिए महत्वपूर्ण बातें 

प्रीमैच्योर बेबी की कैसे करें देखभाल, जानिए महत्वपूर्ण बातें 

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प्रीमैच्योर बेबी के लक्षण 

प्रीमैच्योर बेबी के लक्षण 

प्रीमैच्योर बेबी के लक्षण सामान्य बेबीज़ से अलग होते हैं। सामान्यतः समय पर जन्में बच्चो का वज़न 7 पाउंड (3.17kg ) होता हैं। वहीं समय से पूर्व जन्में बच्चों का वज़न 5 पाउंड (2.26kg) ही होता हैं। समय से जन्में बच्चों की तरह इनके अंग भी पूर्ण विकसित नही होते हैं।   

कैसे दिखतें हैं प्रीमैच्योर बेबी 

कैसे दिखतें हैं प्रीमैच्योर बेबी 

समय से पूर्व जन्में बच्चों का सिर उनके बाकी शरीर से बड़ा होता हैं। उनकी त्वचा या तो बहूत मोटी होती हैं या बहूत पारदर्शी होती हैं जिसमें से उनकी रक्त धमनियां साफ़ नज़र आती हैं। उन बच्चों के कंधो और पिछले हिस्से में बालों की अधिकता होती हैं।    

क्यों है देखभाल की ज़रूरत 

क्यों है देखभाल की ज़रूरत 

समय से पहले जन्में बच्चों का शरीर पूर्ण विकसित नही होता हैं। अतः इन्हें सामान्य वातावरण में रहने के लिए कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता हैं। क्योंकि इनका शरीर पूर्ण विकसित नही होता तो इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बहूत कम होती है। अतः उन्हें सर्दी, सांस लेने में दिक्कत जैसे रोग घेर लेते हैं।  

कैसे करें देखभाल 

कैसे करें देखभाल 

माता-पिता डॉक्टर द्वारा दिए गए सभी निर्देशों का पालन करें। बच्चे के लिए अपनी मर्ज़ी से कुछ न करें। ये न भूलें डॉक्टर आपके बच्चे के स्वास्थ्य के बारे में आपसे ज़्यादा जानते हैं। अपनी मर्ज़ी से कुछ भी करना आपके बच्चे के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता हैं।  

ध्यान रखें बच्चे को पर्याप्त पोषण मिल रहा हो 

ध्यान रखें बच्चे को पर्याप्त पोषण मिल रहा हो 

माँ का दूध नवजात के लिए उत्तम आहार माना जाता हैं। चूँकि आपका बच्चा प्रीमैच्योर हैं, अतः इस बात का ख्याल रखना बेहद ज़रूरी हैं कि बच्चे को पर्याप्त मात्रा में पोषण भरा आहार यानी माँ का दूध मिलता रहे। नवजात को गाय या भैंस का दूध न पिलाए ये नवजात की सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता हैं।    

इंफेक्शन से बचाए 

इंफेक्शन से बचाए 

नवजात को ऐसी जगह से दूर रखें जहाँ इन्फेक्शन होने का खतरा हो। क्योंकि समय से पूर्व जन्में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहूत कम होती हैं। अतः नवजात के पूरी तरह स्वस्थ होने तक अधिक लोगों को उसके पास न आने दे और ना ही अपने साथ उसे ऐसी जगह ले जाए ।  

रेगुलर चेक-अप करवाना न भूलें 

रेगुलर चेक-अप करवाना न भूलें 

प्रीमैच्योर बेबीज़ को अक्सर आँखों में दिक्कत, साँस लेने में दिक्कत जैसी परेशानियां होती रहती हैं। इन्हें मैच्योर बेबीज़ की तरह सामान्य अवस्था तक लाने के लिए कुछ हफ़्तों का वक़्त लगता हैं, ताकि पूर्ण विकास हो पाए। अतः चेकअप से यह पता चलता हैं कि नवजात का विकास हो भी रहा हैं या नहीं।    

कंगारू केयर होगी कारगर 

कंगारू केयर होगी कारगर 

माँ द्वारा अपने नवजात की कंगारू की तरह देखभाल करना बहूत कारगर साबित होगा। जब नवजात माँ की छाती की गर्मी और माँ का स्पर्श महसूस होगा तो वह ज़्यादा सुरक्षित महसूस करेगा। यह चीज़ उसके विकास में मददगार साबित हो सकती हैं।   

क्या आपको नहीं लगता भारत में आए दिन एबॉर्शन के मामले बढ़ते जा रहे हैं?

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