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राम का तीर लगते ही हो गई रावण की मौत, लोग अभिनय समझ बजाते रहे तालियां

कहते हैं कि भगवान राम के तीर से मृत्यु को प्राप्त होना रावण के लिए सौभाग्य की बात थी। यूँ तो रावण का वध त्रेता युग में हुआ था, लेकिन हिन्दू धर्म के लोग आज भी हर साल उसका दहन करते हैं। इतना ही नहीं हमारे यहाँ बड़े स्तर पर कई जगह रामलीला का भी आयोजन किया जाता है। मध्य प्रदेश के एक गाँव में भी रामलीला चल रही थी। सबकुछ बहुत अच्छे से चल रहा था लेकिन रावणवध के दौरान एक हादसा हो गया और रावण बने शख्स की मंच पर ही मृत्यु हो गयी। आखिर क्या है पूरा मामला, आइए जानते हैं यहाँ। 

राम का तीर लगते ही हो गई रावण की मौत, लोग अभिनय समझ बजाते रहे तालियां

राम का तीर लगते ही हो गई रावण की मौत, लोग अभिनय समझ बजाते रहे तालियां

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शिवपुरी के पिछोर की है घटना 

शिवपुरी के पिछोर की है घटना 

यह दुःखद घटना शिवपुरी की पिछोर तहसील के गिजौरा गाँव की है। पिछोर से 5 किलोमीटर दूर बसे गिजौरा गाँव में नवम्बर महीने की शुरुआत से ही रामलीला का मंचन चल रहा था। रामलीला के आखिरी दिन यहाँ रावणवध का मंचन किया जा रहा था। 

'श्री राम' बोला और ज़मीन पर गिर गया रावण 

'श्री राम' बोला और ज़मीन पर गिर गया रावण 

राम ने जैसे ही रावण पर तीर से निशाना साधा, उनके मुख से 'श्री राम' निकला और सीने पर हाथ रखकर वो ज़मीन पर गिर गया। सभी दर्शकों ने इसे रावण की अदाकारी समझकर जोरदार तालियां बजाई और खड़े होकर उसका सत्कार भी किया।

दोबारा नहीं उठा रावण 

दोबारा नहीं उठा रावण 

रामलीला का अंत होने पर लोग 'जय श्री राम' का उद्धघोष करने लगे।  जब रावण बने हरिराम लोधी अपनी जगह से नहीं उठे तो लोग उन्हें कहने लगे कि 'रोल खत्म, उठ-उठ।' लेकिन वे तब भी नहीं उठे तो लोगों ने पास जाकर देखा तो उन्हें पता चला कि उनकी तो असल में मृत्यु हो चुकी है।

हरिराम जी को हो गया था हृदयाघात 

हरिराम जी को हो गया था हृदयाघात 

रामलीला में रावण का किरदार निभा रहे 55 वर्षीय हरिराम लोधी को जब राम ने तीर मारा था तभी उन्हें तेज दर्द उठा और हृदयघात की वजह से मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई।  

6 साल से निभा रहे थे रावण का किरदार 

6 साल से निभा रहे थे रावण का किरदार 

गजौरा के बजरंगबली मंडल ने इस रामलीला का आयोजन करवाया था। पिछले छह साल से गाँव और उसके आस-पास होने वाली रामलीलाओं में हरिराम लोधी और यशराज तिवारी ही रावण-राम का किरदार निभा रहे थे।

शोकाकुल हैं गाँववाले  

शोकाकुल हैं गाँववाले  

अचानक हुई इस दुर्घटना से पूरे गाँव में शोक का माहौल है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और पोस्टमार्टम के बाद मृतक का शव परिजनों को सौप दिया है।

अमर हो गया युद्ध 

अमर हो गया युद्ध 

इसकी वजह तो बहुत गलत है लेकिन यह रामलीला और इसका राम-रावण युद्ध कोई नहीं भुला पाएगा। हरिराम लोधी की यादें गाँववालों के दिल में हमेशा ताज़ा रहेगी।  

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