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'आयरन लेडी' के नाम से मशहूर, देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के जीवन का सफ़र

वैसे तो भारत का इतिहास महापुरूषों व योद्धाओं से भरा पड़ा हैं। देश में "आयरन लेडी" के नाम से जानी जाने वाली महिला इंदिरा गाँधी ही थी | इंदिरा गाँधी, भारत देश की पहेली महिला प्रंधानमंत्री थी। उन्होंने अपने कार्यकाल में बहुत से बहादुर फ़ैसले लिए और उन पर अमल भी करवाया | इंदिरा गाँधी का जन्म एक राजनीतिक परिवार में हुआ था इसलिए उनके खून में राजनीती थी। वो देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की बेटी थी। खून में राजनीती होने के कारण उन्होंने बचपन में अपने खिलौने कभी भी किसी को देने में संकोच नहीं किया। इंदिरा गाँधी बचपन से ही दूसरों के लिए जीती आई हैं। यही कारण रहा की वो देश के लोगों के दिल में आज 99वें साल के बाद भी ज़िंदा हैं।
आइये देखें कैसा था इंदिरा गाँधी का जीवन। 

'आयरन लेडी' के नाम से मशहूर, देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के जीवन का सफ़र

'आयरन लेडी' के नाम से मशहूर, देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के जीवन का सफ़र

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1. कब हुआ इंदिरा गाँधी का जन्म

1. कब हुआ इंदिरा गाँधी का जन्म

19 नवम्बर 1917 को इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) के स्वराज भवन में इंदिरा गाँधी का जन्म हुआ और यहीं पर वो पली बड़ी। इंदिरा गाँधी के पिता देश के जाने-माने व्यक्ति "पंडित जवाहरलाल नेहरू" थे और उनकी माता कमला नेहरू थी। 

2. इंदिरा गाँधी ने यहाँ ली शिक्षा 

2. इंदिरा गाँधी ने यहाँ ली शिक्षा 

सन 1934-35 में माता-पिता स्वत्रंता आंदोलन में सक्रिय होने के कारण और राजनीतिक परिवार होने से उन्हें एक जगह शिक्षा नहीं मिली। पंडित नेहरू उन्हें बहुत पढ़ाना चाहते थे |इंदिरा गाँधी ने इलाहबाद, दिल्ली और पुणे में शिक्षा प्राप्त की। इंदिरा गाँधी की हाई स्कूल की पढ़ाई पुणे में हुई और वे शांति निकेतन चली गई। उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड की ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रवेश किया और सन 1941 में कुछ कारणवश उनको पढ़ाई छोड़कर वापस भारत आना पड़ा। 

3. किसने दिया प्रियदर्शनी का नाम 

3. किसने दिया प्रियदर्शनी का नाम 

पुणे और दिल्ली से पढ़ाई करने के पश्चात् जब वे पढ़ने के लिए शान्तिनिकेतन के ' विश्वा भारती महाविद्यालय ' गयी थी तब उन्हें रबिन्द्रनाथ टैगोर ने "प्रियदर्शिनी" का नाम दिया। तभी से वह "इंदिरा प्रियदर्शिनी गाँधी" के नाम से पहचानी जाने लगी |

4. इंदिरा और फिरोज़ गाँधी का प्यार

4. इंदिरा और फिरोज़ गाँधी का प्यार

1930 में एक कॉलेज के बाहर धरना देते समय कमला नेहरू बेहोश हो गई थी और फिरोज़ गाँधी ने उनकी कई समय तक देखभाल की थी। फिरोज़, कमला नेहरू की तबियत देखने रोज़ आते थे, जहाँ उनकी मुलाकात इंदिरा से हुई। इंदिरा ने फिरोज़ गाँधी के भीतर संवेदना का आतमित्य देखा और उनकी ओर आकर्षित हो गई, तब ही दोनों में प्यार हो गया |

5. इंदिरा फिरोज़ गाँधी की शादी

5. इंदिरा फिरोज़ गाँधी की शादी

26 मार्च 1942 में दोनों ने शादी करने का फैसला लिया लेकिन पिता जवाहरलाल नेहरू नहीं माने क्योंकि फिरोज गाँधी पारसी थे। इंदिरा गाँधी और फिरोज़ गाँधी ने पंडित नेहरू की मर्जी के खिलाफ़ जाकर प्रेम विवाह किया।महात्मा गाँधी के हस्तक्षेप के बाद पंडित नेहरू भी इस शादी के लिए तैयार हो गए | महात्मा गाँधी ने अपना उपनाम फिरोज़ को दिया। 

6. जेल भी गई हैं इंदिरा गाँधी

6. जेल भी गई हैं इंदिरा गाँधी

शादी के बाद भी उन्होंने अपने पिता का साथ नहीं छोड़ा और राजनीती में भाग लेती रहीं। शादी के कुछ सालों बाद "भारत छोड़ो आंदोलन" में जेल जाना पड़ा |

7. पहेली सफलता 

7. पहेली सफलता 

सन 1955 में राष्ट्रिय कांग्रेस कार्यकारी सदस्या और 1959 में राष्ट्रिय कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए उनका चुनाव हुआ। 

8. फिरोज़ गाँधी और इंदिरा गाँधी हुए अलग 

8. फिरोज़ गाँधी और इंदिरा गाँधी हुए अलग 

शादी के कुछ समय बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया और राष्ट्रवादी गतिविधियों के लिए जेल में बंद किया गया।फिरोज़ गाँधी और इंदिरा गाँधी अपने काम के कारण अपनी निजी ज़िन्दगी पर ध्यान नहीं दे पाए और दो दशक से परवान चढ़ा प्यार 1949 में अलग हो गया। इंदिरा गाँधी अपने बच्चों को लेकर पिता के घर आ गई। पर कुछ सालों बाद जब फिरोज़ की तबियत ख़राब हुई तब इंदिरा गाँधी फिरोज़ गाँधी की देखभाल के लिए मौजूद रही, 1960 में फिरोज़ गाँधी की मौत हो गई। 

9. 1964 में इंदिरा गाँधी  

9. 1964 में इंदिरा गाँधी  

पंडित नेहरू की मौत भी 1964 में हो गई थी। अपने पिता की मौत के बाद इंदिरा गाँधी, लाल बहादुर शास्त्री की कैबिनेट का हिस्सा बनने बनी और 27 मार्च 1964 में सुचना एवं प्रसारण मंत्री बनी। सन 1966 में लाल बहादुर शास्त्री की मौत के बाद, यह पहेली महिला प्रधानमंत्री बनी जो भारत की हर महिला के लिए गौरव की बात हैं।

10. पहली महिला प्रधानमंत्री 

10. पहली महिला प्रधानमंत्री 

24 जनवरी 1966 में पहली बार प्रधानमंत्री बनी और फिर सन 1977 तक लगातार तीन बार भारत देश की प्रधानमंत्री बनी रहीं। 1967 के चुनाव में वह बहुत ही कम बहुमत से जीत सकी थीं लेकिन 1971 में फिर से वह भारी बहुमत से प्रधामंत्री बनीं और 1977 तक रहीं। 1977 के बाद वह 1980 में एक बार फिर प्रधानमंत्री बनीं और कई ऐतिहासिक फैसले लिए। 

11. 1971 का कार्य 

11. 1971 का कार्य 

1971 में इंदिरा गाँधी ने लोकसभा की सहायता से चुनाव की घोषणा की। इस चुनाव में उन्होंने ' गरीबी हटाव ' की घोषणा की | इस लोकसभा चुनाव में उनके पक्ष को बहुमत से विजय प्राप्त हुई | कांग्रेस पक्ष के सभी सूत्र उनके साथ केन्द्रित हुए और वो कांग्रेस की सर्वोच्च नेता बनी |

12. नवाज़ा गया भारत रत्न से 

12. नवाज़ा गया भारत रत्न से 

इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान और अमेरिका के बीच, अच्छे संबधो को ध्यान में रखकर बड़ी चतुराई से 1971 में "सोविएत यूनियन" से बीस साल की ऐतिहासिक दोस्ती और परस्परिक सहयोग करार करवाया। उनकी यह असामान्य कामगिरी को ध्यान में रखकर उन्हें 1971 में ' भारतरत्न ' सम्मान प्रदान किया |

13. आपातकालीन स्थिति 1975

13. आपातकालीन स्थिति 1975

26 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक की अवधि में भारत में आपातकाल घोषित था। तत्कालीन राष्ट्रपति ' फ़ख़रुद्दीन अली अहमद ' ने तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर भारतीय संविधान की धारा 352 के अधीन, आपातकाल की घोषणा कर दी।आपातकाल में चुनाव स्थगित हो गए तथा नागरिक अधिकारों को समाप्त करके मनमानी की गई। इंदिरा गांधी के राजनीतिक विरोधियों को कैद कर लिया गया और प्रेस को प्रतिबंधित कर दिया गया। 

14. 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार

14. 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार

"ऑपरेशन ब्लू स्टार" भारतीय सेना द्वारा 3 से 6 जून 1984 को अमृतसर ( पंजाब, भारत ) स्थित हरिमंदिर साहिब परिसर में रखा गया। यह जनरल सिंह भिंडरावाले और उनके समर्थकों से मुक्त कराने के लिए चलाया गया अभियान था। पंजाब में भिंडरावाले के नेतृत्व में अलगाववादी ताकतें सशक्त हो रही थीं जिन्हें पाकिस्तान से समर्थन मिल रहा था। इस समय सरकार ने पंजाब से आने-जाने वाली रेलगाड़ियों और बस सेवाओं पर रोक लगा दी, फ़ोन कनेक्शन काट दिए गए और विदेशी मीडिया को राज्य से बाहर कर दिया गया।

15. इंदिरा गाँधी की मौत 

15. इंदिरा गाँधी की मौत 

31 अक्टूबर 1984 में बेहद निराशा और अशांति साथ लेकर आई | देश की "आयरन लेडी" कही जाने वाली इंदिरा गाँधी को उनके ही सिख अंगरक्षकों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। माना जाता हैं की उनका "ऑपरेशन ब्लू स्टार आउट खालिस्तान" उनकी मौत का एक मात्र कारण है। इंदिरा गाँधी ने अपनी जान की परवाह किये बिना ऑपरेशन ब्लू स्टार को ग्रीन सिगनल दिया। सबके कहने के पर भी सिख अंगरक्षको को उन्होंने नहीं हटाया, जिसका परिणाम ऑपरेशन के कुछ ही महीनों बाद, 31 अक्टूबर 1984 की सुबह 9 बजे उनके ही अंगरक्षक, बेअंत सिंह और सतवंत सिंह ने इंदिरा जी पर गोलियां तान दी और उनकी मौत हो गई। 

16. दिल्ली में आज भी हैं इंदिरा गाँधी की साड़ी 

16. दिल्ली में आज भी हैं इंदिरा गाँधी की साड़ी 

दिल्ली में इंदिरा गाँधी मेमोरियल म्यूज़ियम में इंदिरा गांधी के चित्रों का एक संग्रह हैं। यह वही जगह हैं जहा इंदिरा गाँधी को गोली मारी गई थी। यहाँ आज भी इंदिरा जी कि हत्या के समय पहनी हुई साड़ी, उनकी चप्पलें और उनका झोला, वर्तमान में भी संग्रहालय में संरक्षित रखा गया है। आज इंदिरा गाँधी कि 100वि वर्षगांठ है और हम उनकी आत्म शांति की प्रार्थना करते हैं। 

क्या आपके अनुमान में इंदिरा गाँधी, देश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में सर्वोत्तम थीं?

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