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एसिड अटैक पीड़िताओं के संघर्ष की कहानी का यह वीडियो देखकर भर आएगा आपका दिल 

देश में शायद ही ऐसा कोई हो जिसे एसिड अटैक के बारे में न पता हो। भारत में एसिड अटैक्स बहुत आम है, लेकिन इस बारे में जागरूकता अब भी कम ही है। हम एसिड अटैक झेल चुकी महिलाओं से सहानुभूति तो जता सकते हैं लेकिन उनके दर्द को महसूस कर पाना बहुत मुश्किल है।

बगैर गलती किए जीवनभर की सजा भुगतना बहुत बड़ी बात होती है। वो असहनीय पीड़ा जो सिर्फ शरीर को ही नहीं दिल को भी होती है, लोगों के तानों के साथ जीना और वह झूठी सांत्वनाओं का बोझ उठाना इतना भी आसान नहीं होता है।

अगर आप कभी इन बहादुर एसिड अटैक सर्वाइवर से मिलें तो इनकी कहानी सुनकर ही आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। तो फिर सोचिये वो तो इस कहानी को हर रोज़ जीते है। हम उनसे हमदर्दी जताने की कोशिश करते हैं, लेकिन हमें उनसे जिंदगी के असल मायने सीखने की जरुरत है।

एसिड अटैक पीड़िताओं के संघर्ष की कहानी का यह वीडियो देखकर भर आएगा आपका दिल 

एसिड अटैक पीड़िताओं के संघर्ष की कहानी का यह वीडियो देखकर भर आएगा आपका दिल 

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85% अटैक्स होते हैं महिलाओं पर

85% अटैक्स होते हैं महिलाओं पर

ये बहुत ही दुःख की बात है कि देश में हर साल एसिड अटैक का प्रतिशत बढ़ता जा रहा है। देश में होने वाले कुल अटैक्स में से 85% महिलाओं पर होते हैं। इन हमलों के पीछे बहुत ही घटिया सी वजहें होती हैं। कभी बदले की भावना से तो कभी एक तरफ़ा प्यार में पागल होकर कुछ पुरुष ऐसे कदम उठाते हैं।

उन्हें कमजोर न समझे

उन्हें कमजोर न समझे

ये बात हर किसी के लिए समझनी जरूरी है कि हम उन्हें कमजोर न समझें। आज देश में ही कई एन.जी.ओ. इनके सहयोग और उद्धार के लिए काम कर रहे हैं और तो और ये एन.जी.ओ चलाने वाले और कोई नहीं बल्कि खुद एसिड अटैक सर्वाइवर हैं।

'छाँव' है एक ऐसा ही एन.जी.ओ.

'छाँव' है एक ऐसा ही एन.जी.ओ.

'छाव' एक ऐसा ही एन.जी.ओ. है जिसकी नींव 2013 में एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी ने रखी थी। यह संस्थान एसिड अटैक पीड़िताओं की इस स्थिति से लड़ने में मदद करता है।

'नई सुबह' है उनका एक और कदम 

छाँव फाउंडेशन एक नया वीडियो 'नई सुबह' ला रहा है। जो सिर्फ एक वीडियो नहीं है। यह इन सर्वाइवर्स की जिंदगी में आने वाले उतार-चढ़ाव, उनके संघर्ष और जिंदगी से जूझने की जीती जागती कहानी है। जिसे आप सिर्फ देखेंगे नहीं बल्कि महसूस भी कर पाएंगे।

वो नहीं है पीड़िता 

वो नहीं है पीड़िता 

दौर बदल रहा है, और हम उम्मीद कर सकते हैं कि आगे और सुनहरा दौर आने वाला है। आज ये बहादुर एसिड अटैक सर्वाइवर्स तो सर उठा कर जी रहे हैं। लेकिन उन गुनाहगारों के लिए सिर झुकाने की नौबत आ गई है। लेकिन अभी हमें और आगे जाना है। इनके असली हीरोज़ के लिए दुनिया और ख़ूबसूरत बनानी है। तो आइये साथ मिलकर एक कोशिश करते हैं। 

क्या मौका मिलने पर आप भी एसिड अटैक पीड़ितों की मदद में कदम आगे बढ़ाएंगे?

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