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इन बॉलीवुड सितारों के परिवार की कहानी भी है कुछ-कुछ आपके परिवार जैसी

माता-पिता हमेशा माता-पिता ही होते हैं। फिर वो किसी महान इंसान के माता-पिता हों या किसी आम आदमी के। वो अपनी जिंदगी अपने हिसाब से ही जीते हैं और किसी आम पैरेंट की तरह ही अपने बच्चों से प्यार करते हैं और उनकी फ़िक्र भी करते हैं।

क्या आपने कभी सोचा है बॉलीवुड स्टार्स के पेरेंट्स किस तरह से रहते हैं और उनके साथ कैसा बर्ताव करते हैं? तो चलिए आज हम ही आपको बता देते हैं ऐसे कुछ स्टार्स और उनके पेरेंट्स के बारे में।

इन बॉलीवुड सितारों के परिवार की कहानी भी है कुछ-कुछ आपके परिवार जैसी

इन बॉलीवुड सितारों के परिवार की कहानी भी है कुछ-कुछ आपके परिवार जैसी

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इनके माता-पिता अब भी करते हैं बस में सफर

इनके माता-पिता अब भी करते हैं बस में सफर

हम अक्सर यही सोचते हैं कि बड़े सितारे और उनके परिवार बिलकुल राजशाही ठाठ-बाट के साथ रहते होंगे, लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि बॉलीवुड के स्टाइलिश अभिनेताओं में से एक जॉन अब्राहम के माता-पिता अब भी बस और ऑटो में ही सफर करना पसंद करते हैं। तो हुई न ये आम लोगों वाली बात।

जॉन खुद पसंद करते हैं सिंपल लुक

जॉन खुद पसंद करते हैं सिंपल लुक

अपनी फिल्मों से बिलकुल उलट जॉन असल जिंदगी में टीशर्ट और चप्पल पहनकर ही कहीं भी निकल जाते हैं। साथ ही वे अवॉर्ड फंक्शन में भी जाना पसंद नहीं करते हैं।

इन्हें पड़ती है घर पहुँचने पर डाँट 

इन्हें पड़ती है घर पहुँचने पर डाँट 

अगर आपको लगता है कि सिर्फ आपके घर पर रात में घर से बाहर जाने की इजाज़त नहीं दी जाती है और सुपरस्टार्स फिल्मों की तरह रात-रात भर सड़कों पर घूमा करते हैं तो आप बिलकुल गलत सोच रहे हैं। बॉलीवुड में लंबे समय तक काम करने के बाद भी शक्ति कपूर और उनकी पत्नी शिवांगी कोल्हापुरे अपनी बेटी श्रद्धा कपूर को घर देर से पहुँचने पर डाँट लगाते हैं।

खाने को लेकर भी खींचते हैं कान

खाने को लेकर भी खींचते हैं कान

श्रद्धा खुद कहती हैं कि उनके घर पर अब भी उनके लिए कर्फ्यू लगा होता है। इतना ही नहीं श्रद्धा अपने खाने पर भी कंट्रोल नहीं करती, इसलिए उन्हें ये मत खाओ, वो मत खाओ की हिदायत दी जाती है।

ये हैं माँ की वजह से यहाँ

ये हैं माँ की वजह से यहाँ

वैसे तो बोमन ईरानी खुद भी एक अच्छे पिता हैं, लेकिन वे अब भी अपनी माँ के साथ रहते हैं। साथ ही किसी आम पुरुष की तरह ही वो भी अपनी माँ के बहुत करीब हैं और उनको लेकर इमोशनल भी हैं। उनकी माँ 87 साल की हो गई है। बोमन की माँ ने एक आदर्श माँ की तरह हर संघर्ष में उनकी मदद की हैं और उन्हें जिंदगी के असल मायने सिखाये हैं।

सिंगल पैरेंट हैं बोमन की माँ

सिंगल पैरेंट हैं बोमन की माँ

बोमन की माँ ने एक आम सिंगल पैरेंट की तरह संघर्ष कर उन्हें यहाँ तक पहुँचाया है। बोमन ने तो कभी अपने पिता की तस्वीर तक नहीं देखी। बोमन और उनकी माँ का रिश्ता बिलकुल एक आम माँ-बेटे की तरह है।

इनकी माँ भी करती हैं दुआ

इनकी माँ भी करती हैं दुआ

जब भी आप घर से बाहर जाते हो तो आपकी माँ मन ही मन आपकी सलामती की दुआ करती है। ऐसा ही कुछ बॉलीवुड सितारों की माएं भी करती हैं। जी हाँ, दीपिका पादुकोण की माँ ने खुद कहा था कि उन्हें सबसे ज्यादा अपनी बच्चियों की सुरक्षा की चिंता रहती है। जब भी दीपिका देर रात तक बाहर रहती है तो वो हर माँ की तरह भगवान का नाम लेकर खुद को हिम्मत देती हैं। 

पापा की परी भी है वो

पापा की परी भी है वो

ये तो सभी जानते हैं कि पिता और बेटी का रिश्ता बहुत ही ख़ास रहता है। बॉलीवुड दीवा दीपिका का भी किसी आम लड़की की तरह ही अपने पिता पूर्व बैडमिंटन प्लेयर प्रकाश पदुकोण से ऐसा ही रिश्ता है। प्रकाश पदुकोण आज भी एक पिता की तरह अपनी बेटी के साथ दोनों का पसंदीदा खेल बैडमिंटन खेलते हैं। 

उन्हें अब भी प्यारा है अपना गाँव

उन्हें अब भी प्यारा है अपना गाँव

बॉलीवुड में ऐसे कई सितारे हैं जो शून्य से शिखर तक पहुँचे हैं। उनमें से एक नाम नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का भी है। वे उत्तर प्रदेश के मुज्जफरनगर जिले के बुढ़ाना गाँव से हैं। सिद्दीकी आज बॉलीवुड का जाना पहचाना नाम हैं और बहुत अच्छी स्थिति में हैं। लेकिन उनका परिवार अब भी गाँव में रहता है, और वही सादी जिंदगी जीता है।

ये हैं थोड़े ओवरप्रोटेक्टिव

ये हैं थोड़े ओवरप्रोटेक्टिव

शाहिद कपूर के पिता को तो सभी जानते हैं। पंकज कपूर बॉलीवुड के बहुत ही मंझे हुए कलाकार हैं। उनका दिल एक आम पिता की तरह ही है। शाहिद खुद कहते हैं कि पंकज कपूर बहुत ही अच्छे पिता हैं लेकिन वो थोड़े ज्यादा हाइपर और शाहिद को लेकर बहुत प्रोटेक्टिव हैं।

उन्हें रहती है यह भी शिकायत

उन्हें रहती है यह भी शिकायत

आप जब घर से दूर जाते हैं तो आपके माता-पिता हर दिन आपके फ़ोन का इंतज़ार करते हैं। अभिनेता पंकज कपूर के साथ भी यही होता है। वे अपने बेटे से शिकायत करते रहते हैं कि वो उनसे बात नहीं करते और उन्हें वक़्त भी नहीं देते। आखिर पिता का दिल तो पिता का दिल ही रहेगा।

क्या आपके घर से बाहर होने पर आपके परिवार वालों का भी कुछ ऐसा ही मिज़ाज़ होता है?

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