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#सातफेरे - हम दोनों की उम्र में 22 साल का फर्क था और सबकी नज़रें इस रिश्ते पर टिकी हुई थी...

'मेरा वज़ूद ये कबका बिखर गया होता...'

दिलीप साहब ने कुछ दिनों पहले सायरा बानो के साथ अपने सफर को अल्फ़ाज़ों में पिरोते हुए ये लाइन्स ट्वीट की थी। मोहब्बत की न जाने कितनी दास्तान है, लेकिन इनकी कहानी कुछ इसलिए भी नुमाया है क्योंकि हर उतार-चढ़ाव से गुज़रते हुए, इन्होंने अपने साथ के 50 साल पूरे कर लिए हैं।

दिलीप साहब और सायरा बानो की उम्र में 22 साल का फर्क है लेकिन फिर भी इन दोनों की मोहब्बत और शादीशुदा ज़िन्दगी हर जोड़े के लिए एक मिसाल है। परदे की दुनिया के कुछ ही रिश्ते ऐसे हैं जो इन चकाचौंध के बावजूद भी अपना दम नहीं तोड़ते, उन्ही में से एक रिश्ता इनका भी है जो सादगी और मोहब्बत से भरपूर रहा है। 

आइये देखते हैं मोहब्बत की मिसाल इस जोड़े की दास्तान। 

#सातफेरे - हम दोनों की उम्र में 22 साल का फर्क था और सबकी नज़रें इस रिश्ते पर टिकी हुई थी...

#सातफेरे - हम दोनों की उम्र में 22 साल का फर्क था और सबकी नज़रें इस रिश्ते पर टिकी हुई थी...

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  in Celebrities

बचपन के दिन 

बचपन के दिन 

सायरा बानो 1930 -1940 की मशहूर और मारूफ़ अदाकारा नसीम बानो की बेटी हैं। इनका बचपन बहुत ज़्यादा ख़ास नहीं था, ज़िन्दगी की तकलीफों ने बचपन में ही इन्हें अपना चेहरा दिखा दिया था। सायरा बहुत छोटी हुआ करती थीं और इनके माता-पिता एक दूसरे से अलग हो चुके थे। बचपन में ही नसीम बानो ने सायरा को पढ़ने के लिए लन्दन भेज दिया।

नन्हे-नन्हे ख़्वाब 

नन्हे-नन्हे ख़्वाब 

कमसिन उम्र की सायरा ने बचपन से अपनी आँखों में दो ख़्वाबों को जगह दी थी। उनका पहला ख़्वाब था अपनी माँ के नक्शो-कदम पर चलते हुए फ़िल्मी दुनिया में नाम कमाना और इनका दूसरा ख़्वाब था दिलीप कुमार उर्फ़ यूसुफ़ साहब की हमसफ़र बनना। सन 1960 में जब ये भारत लौटी, तो अपना पहला ख़्वाब पूरा करने में जुट गई।

सायरा हुई नाउम्मीद

सायरा हुई नाउम्मीद

सायरा उस वक़्त 16 बरस की थी जब दिलीप कुमार का जादू हर लड़की के सर चढ़कर बोल रहा था। अपने दिल में मोहब्बत के अरमान लिए सायरा भी दिलीप कुमार की एक झलक पाने को मराठा मंदिर मूवी हॉल पहुँच गईं। लेकिन इतने बड़े महानायक से मिल पाना कहाँ आसान था, उस समय सायरा को नाउम्मीद होकर ही लौटना पड़ा।

17 साल की उम्र में की पहली फ़िल्म 

17 साल की उम्र में की पहली फ़िल्म 

बहरहाल मोहब्बत जब दिल में घर कर लेती है तो कदम खुद-ब-खुद मंज़िल का पता दे देते हैं। अपनी माँ नसीम बानो की मदद से सायरा ने अपना पहला कदम परदे की दुनिया में रखा। महज़ 17 साल की उम्र में कामयाबी ने भी सायरा के कदम चूम लिए। शम्मी कपूर के साथ आई फिल्म "जंगली" पूरी तरह से बॉक्स ऑफिस पर छा चुकी थी। लेकिन फिर भी सायरा को दिलीप जी के साथ काम करने का मौका नही मिल पा रहा था।

दिलीप साहब के साथ काम करना चाहती थी 

दिलीप साहब के साथ काम करना चाहती थी 

सायरा एक के बाद एक सुपर हिट फिल्में करती जा रही थीं। अब तक उनका नाम रुपहले परदे की दुनिया पर पूरी तरह से फैल चुका था। लेकिन जब भी दिलीप कुमार को सायरा के साथ काम करने के लिए कहा जाता तो वे यह कहकर इंकार कर देते कि सायरा बहुत छोटी हैं। दिलीप कुमार और सायरा बानो में 22 साल का फर्क है। लेकिन साहब! मोहब्बत कहाँ उम्र देखती है।

दिल ठहर चुका था 

दिल ठहर चुका था 

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि दिल आवारा पंछी की तरह होता है। और जब कदम जवानी की ओर बढ़ते जाते हैं तो दिल में कहीं न कहीं टीस उठती ही है। इंसान दिल की ख्वाहिश को कहीं रख कर आगे बढ़ने की कोशिश में लग जाता है। जब सायरा अपने करियर में आगे बढ़ रही थी उस वक़्त उनका दिल राजेंद्र कुमार पर आकर ठहर गया था। 

नसीम बानो ने समझाया सायरा को 

नसीम बानो ने समझाया सायरा को 

जिस शख़्स के सहारे की ख़्वाहिश हो अगर वो न मिले तो ऐसा होना लाज़मी है। इंसान है, कहीं तो ठिकाना ढूंढेगा ही। बहरहाल नसीम बानो कभी नहीं चाहती थी कि उनकी एकलौती बेटी, एक शादी शुदा शख़्स के साथ किसी भी रिश्ते में आए। उन्होंने सायरा को समझाने की हर मुमकिन कोशिश की। 

दिलीप साहब ने बात की सायरा से 

दिलीप साहब ने बात की सायरा से 

नसीम बानो ने अपनी बेटी की सालगिरह पर सभी बड़ी-बड़ी हस्तियों को दावत दी, उनमें दिलीप साहब भी शामिल थे। नसीम बानो ने दिलीप साहब से अनुरोध किया की वे सायरा को समझाने की कोशिश करें। और दिलीप साहब नसीम बानो की इच्छा का आदर करते हुए सायरा को समझाने पहुंचे।  

सायरा ने कह दी दिल की बात 

सायरा ने कह दी दिल की बात 

पहली मोहब्बत का सामना कितना दिल पसंद हो सकता है इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है। दिलीप साहब, सायरा को समझाने लगे और सायरा के सारे जज़्बात आवाज़ की शक्ल में ढलते गए। भला जिसका ख़्वाब देखकर ये आँखें बड़ी हुई है वही शख्सियत सामने हो तो कैसे कोई दिल की बात कहने से खुद को रोक सकता है।

सायरा ने रखा शादी का प्रस्ताव 

सायरा ने रखा शादी का प्रस्ताव 

सायरा ने दिलीप साहब की बातों को समझते हुए उनसे इज़हार-ए-वफ़ा कर दी। दिलीप साहब की नज़रों में सायरा बहुत छोटी थीं। उस वक़्त वह कोई जवाब देने के हालात में नहीं थे। बात को वहीं रफा-दफा कर दिलीप साहब चल दिए।

सायरा का ख्वाब हुआ सच 

सायरा का ख्वाब हुआ सच 

ये बात काफी हद तक सच है कि हम अगर किसी चीज़ की सच्चे दिल से चाहत करते हैं तो पूरी कायनात हमें उसके करीब लाने में लग जाती है। वैसा ही कुछ सायरा के साथ भी हुआ। इस तमाम किस्से में सायरा की माँ 'नसीम बानो' ने एक बहुत ही ख़ास किरदार निभाया। हर माँ, बेटी के दिल का हाल जानती है और नसीम जी अपनी बेटी की पसंद से अच्छी तरह वाकिफ़ थीं। 

11 अक्टूबर 1966 में हुई शादी

11 अक्टूबर 1966 में हुई शादी

बहरहाल 11 अक्टूबर 1966 को सायरा और दिलीप साहब ने निकाह क़बूल किया और तब से अब तक एक्ट्रेस सायरा बानो की ज़िन्दगी का मकसद सिर्फ दिलीप साहब की ज़िन्दगी को खुशियों से रोशन करना है। मिसेज़ सायरा यूसुफ़ खान अक्सर कहती हुई नज़र आती हैं कि दिलीप साहब उनके कोहिनूर हैं।

सदियों का साथ है यह 

सदियों का साथ है यह 

इनकी शादी को 50 साल पूरे हो चुके हैं। और इनके साथ को कुछ शब्दों में बयां कर पाना सूरज को दिया दिखाने के समान है। लेकिन जो सबक हासिल हुआ है वो शायद हम सबकी ज़िन्दगी को सैराब कर सकता है। शादी महज़ साथ रहने का नहीं, समझदारी से साथ चलने का भी सफर है।
और फिर दिलीप साहब कहते हैं-

"तस्कीन-ए-दिले महज़ू ना हुई"
"The heart did not find solace until I met you"

क्या आप मोहब्बत के ऐसे ही कुछ और किस्से सुनना चाहेंगे?

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