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भारत का यह गाँव सहेज रहा है दुनिया की सबसे पुरानी भाषा, सिर्फ संस्कृत में की जाती है यहाँ बात 

संस्कृत विश्व की सबसे पुरानी भाषा है। हिन्दू धर्म के जितने भी ग्रन्थ हैं संस्कृत भाषा में ही लिखे गए हैं, बौद्ध धर्म और जैन धर्म के कई महत्वपूर्ण ग्रंथों में संस्कृत भाषा का उपयोग हुआ है। लेकिन आज के समय में भाषा का महत्व सिर्फ स्कूल के एक विषय के रूप में रह गया है। वो भी ऐसा विषय जिसमे बहुत कम लोग ही अपनी रूचि दिखाते हैं। 

हिस्ट्री टीवी का शो OMG! Yeh Mera India 2 ने अपने नए एपिसोड में एक ऐसे गाँव का जिक्र किया है जो देश के बाकि सभी गाँवो और शहरों से अलग है। देखते हैं क्या है इस गाँव की ख़ासियत।

भारत का यह गाँव सहेज रहा है दुनिया की सबसे पुरानी भाषा, सिर्फ संस्कृत में की जाती है यहाँ बात 

भारत का यह गाँव सहेज रहा है दुनिया की सबसे पुरानी भाषा, सिर्फ संस्कृत में की जाती है यहाँ बात 

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एक गाँव जहाँ शहरी माहौल का कोई असर नहीं है 

एक गाँव जहाँ शहरी माहौल का कोई असर नहीं है 

भारत का एक गाँव जो शहरी वातावरण से बहुत दूर है। यहाँ कोई भी रेस्टोरेंट्स, होटल और गेस्ट हाउस नहीं है।

इस गाँव की अलग ही विशेषता है 

इस गाँव की अलग ही विशेषता है 

सरलता और सादगी वाले इस गाँव के लोगों में एक अलग तरह की विशेषता है जो इन्हें बाकि गाँवो के लोगों से अलग बनाती है।

गाँव का नाम है मत्तूर (माथुर)

गाँव का नाम है मत्तूर (माथुर)

कर्नाटक राज्य का यह गाँव अपनी भाषा की वजह से मशहूर है, माथुर गाँव का हर व्यक्ति दैनिक जीवन में संस्कृत भाषा का प्रयोग करता है, जबकि इस गाँव की सामान्य भाषा कन्नड़ है।

संस्कृत भाषा को जिन्दा रखने के लिए गाँव की कोशिश भी अनोखी है

संस्कृत भाषा को जिन्दा रखने के लिए गाँव की कोशिश भी अनोखी है

संस्कृत के प्रति समर्पित इस गाँव की एक अनोखी पहल है, जिन व्यक्तियों को संस्कृत नहीं आती वो यहाँ जाकर 20 दिनों में मुफ्त संस्कृत सीख सकता हैं।

दुनिया की सबसे पुरानी भाषा को अमर रखने में गाँव के हर व्यक्ति का सम्पूर्ण योगदान 

दुनिया की सबसे पुरानी भाषा को अमर रखने में गाँव के हर व्यक्ति का सम्पूर्ण योगदान 

गाँव का हर व्यक्ति दुनिया की सबसे पुरानी भाषा का महत्व समझता है। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि इस गाँव का हर व्यक्ति संस्कृत बोलता, पढ़ता और समझता है। लेकिन उसी समय हमारे लिए यह निंदा की भी बात है कि यह एकमात्र ऐसा गाँव है जहाँ के ज्यादातर लोग संस्कृत बोलते हैं।

सरलता और सादगी से भरे हैं यहाँ के लोग 

सरलता और सादगी से भरे हैं यहाँ के लोग 

संस्कृत भाषा को अपने जीवन में अपनाने का असर इन लोगों में साफ़ देखा जा सकता है, यहाँ ज्यादातर लोग सरलता और सादगी वाले हैं। 

ऐसा नहीं है की गाँव पिछड़ा हुआ है 

ऐसा नहीं है की गाँव पिछड़ा हुआ है 

इस गांव के सभी लोग वर्तमान से वाकिफ हैं और हर प्रकार की जानकारी रखते हैं। या यूँ कह लें की इस गांव के सभी लोग 21वीं शताब्दी में जीते हैं।

एकलौता संस्कृत भाषी गाँव 

क्या इस तरह की मुहिम भारत के अन्य गाँवों में भी चलनी चाहिए?

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