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अगर मोदी जी यह अपील मान लें, तो होगा सेना और देश को बड़ा फायदा! 

₹500 और ₹1000 के नोट बंद! सरकार के इस नए फैसले ने पूरे देश में खलबली मचा कर रख दी है। नेता, अभिनेता, बिल्डर, व्यापारी, सरकारी कर्मचारी, बाबू यहाँ तक कि सरकारी चपरासियों की भी इन दिनों नींद उड़ी हुई है। सबको बस एक ही दर्द सताए हुए है, कैसे और कहाँ अपनी ऊपरी कमाई को ठिकाने लगाया जाए?

जिन नोटों के लिए कई लोगों ने अपना इमान तक गिरवी रख दिया, देश के सम्मान को दाव पर लगा दिया, उन्हीं नोटों को आज उन्हें जलाना पड़ रहा है। जलाने से, दफ़नाने से या नोटों को गंगा में बहाने से देश को कैसे फायदा पहुँच सकता है? तो क्यों न सरकार एक अकाउंट खोले सेना के नाम से और...

अगर मोदी जी यह अपील मान लें, तो होगा सेना और देश को बड़ा फायदा! 

अगर मोदी जी यह अपील मान लें, तो होगा सेना और देश को बड़ा फायदा! 

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गंगा में तैरते दिखे ₹500 और ₹1000 के नोट 

गंगा में तैरते दिखे ₹500 और ₹1000 के नोट 

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में किसी ने ₹500 और ₹1000 के नोटों को गंगा में बहा दिया, शायद सोचा होगा पाप की इस कमाई के भी पाप धुल जाएंगे। पाप धुले या नहीं यह तो पता नहीं, हाँ मगर इन पैसों से कई गरीबों की ज़िन्दगी संवर सकती थी, देश की स्तिथि बदल सकती थी।

बोरों में भर कर जलाये ₹500 और ₹1000 के नोट 

बोरों में भर कर जलाये ₹500 और ₹1000 के नोट 

उत्तर प्रदेश के बरेली में किसी शख्स ने बोरे भर कर ₹500 और ₹1000 के नोटों को जलाया। इससे फायदा किसका हुआ? देश का? सरकार का? गरीबों का? या भ्रष्टाचारियों का? दरअसल फायदा किसी का नहीं हुआ मगर हाँ फायदा पहुँचाया जरुर जा सकता था।

चोर कभी कहता है उसने चोरी की?

चोर कभी कहता है उसने चोरी की?

हमें सरकार की नीति पर रत्तीभर भी संदेह नहीं है, हम तो बस एक सवाल पूछना चाहते हैं। क्या कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो यह कहेगा, सहाब! यह इतनी मेरी ऊपरी कमाई है लो इसे जब्त कर लो? क्या कोई इतना ईमानदार होगा कि 200% जुर्माने की बात सुनकर भी पैसे जमा करने आएगा? चलो इमानदारी की तो बात छोड़ ही देते हैं।

क्यों न कुछ ऐसा किया जाए 

क्यों न कुछ ऐसा किया जाए 

तो क्यों न सेना के नाम से एक अकाउंट खोल दिया जाए जिसे पूरी तरह गोपनीय रखकर उस अकाउंट में जमा करने वालों से कोई पूछताछ भी न की जाए। कम से कम जो लोग अपनी इस ऊपरी कमाई को ठिकाने लगाने की सोच रहे हैं, उन्हें एक रास्ता भी मिल जाएगा और देश का भी भला हो जाएगा।

ताकि भूखे नंगे भारत का तन ढँक सकें 

ताकि भूखे नंगे भारत का तन ढँक सकें 

या फिर प्रधानमंत्री राहत कोष की तरह एक अन्य कोष निर्मित किया जाए जिसमें व्यक्ति अपनी ऊपरी कमाई बिना किसी रिक-झिक के आसानी से जमा कर सके। हम काले धन की मोटी दमड़ी उधेड़ने से तो रहे, मगर हम नंगे भारत के बदन को तो ढँक सकते हैं। जितने पैसे जलाये जा रहे हैं उन पैसों से कई घरो के चूल्हे जल सकते हैं।

पहले देश की इस तस्वीर को तो सुधारें 

पहले देश की इस तस्वीर को तो सुधारें 

अगर कुछ सुधारना ही है तो देश की इस तस्वीर को सुधारने की कोशिश करें।  देखिये देश की हालत आज ऐसी है, कि अरबों लोगों से भरे देश में ईमानदार बस इतने ही होंगे जितनी आपकी उँगलियाँ गिन सके। दूध का धुला कोई नहीं है, मैं किसी भी चीज़ को नाजायज़ नहीं ठहरा रहा मगर कितना अच्छा हो अगर आपकी ज़मा पूंजी गंगा में बहने की बजाय किसी भूखे के पेट में राहत का अन्न ले कर आये।     

हम जानते हैं काम मुश्किल है मगर असंभव तो नहीं 

हम जानते हैं काम मुश्किल है मगर असंभव तो नहीं 

मैं अपील करता हूँ माननीय प्रधानमंत्री जी से कि इस मामले पर भी गौर किया जाए। मैं जानता हूँ यह काम इतना आसान नहीं है, मगर जब आप इतना बड़ा फैसला ले सकते हैं, फिर तो यह एक छोटा सा कदम ही है जो बड़ी प्रगति ला सकता है। माननीय प्रधानमंत्री जी जो सपना आप देख रहे हैं वह बरसों से भूखा नंगा हिंदुस्तान भी देख रहा है ,और अब उसकी तरसती नज़र आप की तरफ है।

इसे अधिक से अधिक शेयर करें ताकि यह प्रधानमंत्री जी तक पहुँच पाए।

क्या सरकार को ऐसी कोई योजना लानी चाहिए?

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