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अस्पताल ने लेने से मना किया ₹500 का नोट, इलाज में देरी की वजह से हो गई नवजात की मौत

हाँ माना यह नये नोट बहुत जरुरी थे, क्योंकि हमे काला धन रोकना था, क्योंकि हमें भ्रष्टाचार रोकना था। भारत सरकार के इस नए फैसले ने हर भारतीय के दिल में एक नई उम्मीद को जिंदा किया है मगर क्या इस सिक्के का यह एक ही पहलू है। आलोचक आलोचना कर रहे हैं और प्रशंसक प्रशंसा। अगर किसी को इस फैसले से सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है तो वे वह लोग हैं जिनका संबंध न भ्रष्टाचार से है और न ही काले धन से।

ऐसा ही कुछ हुआ मुंबई के उस मासूम बच्चे के साथ भी, जो इस दुनिया में आया ही था कि इस फैसले ने उसकी जान ले ली।

अस्पताल ने लेने से मना किया ₹500 का नोट, इलाज में देरी की वजह से हो गई नवजात की मौत

अस्पताल ने लेने से मना किया ₹500 का नोट, इलाज में देरी की वजह से हो गई नवजात की मौत

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यह था पूरा मामला 

यह था पूरा मामला 

मुंबई के गोवेंदी में एक नवजात की मौत हो जाती है। क्योंकि उसके माँ-बाप उसके इलाज के लिए अस्पताल में पुराने नोट जमा करते हैं और अस्पताल वाले वह नोट लेने से मना कर देते हैं।   

7 दिसंबर को होने वाली थी डिलेवरी 

7 दिसंबर को होने वाली थी डिलेवरी 

मुंबई मिरर रिपोर्ट के अनुसार किरण शर्मा जो कारपेंटर जगदीश शर्मा की वाइफ हैं, गर्भ से थी और उनका प्रसव 7 दिसंबर को होने वाला था। वे जीवन ज्योति हॉस्पिटल की डॉक्टर शीतल कामठ की देख रेख में थी।

9 नवम्बर को हुआ अचानक लेबर पेन 

9 नवम्बर को हुआ अचानक लेबर पेन 

9 नवम्बर की सुबह अचानक किरण को लेबर पेन शुरू हो गया और उसकी डिलेवरी घर पर ही पड़ोसियों और रिश्तेदारों की देख रेख में करनी पड़ी। बच्चे का वजन 1.6kg था, चूँकि बच्चा प्रीमेच्योर था और इस डिलेवरी में किरण का भी काफी खून बह चुका था।  इसलिए घर वालों ने डॉक्टर शीतल कामत के पास ही जाना सही समझा।

छोटे नोटों के रूप में 6000 रुपये की मांग रखी 

छोटे नोटों के रूप में 6000 रुपये की मांग रखी 

बजाये प्राथमिक उपचार देने के अस्पताल ने उसके पिता से ₹100-₹100 के नोट में या उससे कम के नोट में 6000 रुपये की मांग की। नवजात का पिता अस्पताल की इस मांग को पूरा नहीं कर सका। क्योंकि सरकार के निर्णय के बाद सभी एटीएम और बैंक उस दिन बंद थे। परिवार ने अस्पताल प्रशासन से पैसे देने के लिए कुछ समय की मोहलत मांगी, मगर अस्पताल प्रशासन ने बिलकुल नरमी नहीं बरती। बच्चे और उसकी माँ को अस्पताल प्रशासन ने वापस भेज दिया।  

कल बच्चे की तबियत और बिगड़ गई  

कल बच्चे की तबियत और बिगड़ गई  

शुक्रवार को बच्ची की तबियत और बिगड़ गई। इसलिए घर वालों ने चेम्बूर स्थित डॉक्टर अमित शाह जी के यहाँ जाने का निर्णय लिया। मगर डॉक्टर बच्चे को देखते उससे पहले ही बच्चा दम तोड़ चुका था।   

लोगों ने भी रखी अपनी राय 

ट्वीट पर चले सवाल जवाब 

 

मगर सवाल वही का वही है 

मगर सवाल वही का वही है 

मगर सवाल यही है कि जब सरकार ने 14 तारीख तक अस्पतालों में पुराने नोट लेने की बात कही है तो अस्पताल प्रशासन ने मना क्यों किया? क्या हमारे जीवन में मानवता से ज्यादा पैसे अहमियत रखते है। खासकर डॉक्टर क्या पैसे कमाने के लिए ही बैठे हैं? यह ऐसे सवाल हैं जिसे हर डॉक्टर को खुद से पूछना चाहिए। सिर्फ पैसे ही सब कुछ नहीं होते, कई बार दुआएँ भी बेशकीमती मिल जाती हैं।

क्या सरकार को अस्पतालों में पुराने नोट के उपयोग संबंधी नियम सख्ती से लागू करवाने की आवश्यकता थी?

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