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राष्ट्रपति जी खाते है इस शख़्स के हाथ का खाना, जानिए कौन है यह शख़्स?

32 साल के मोंटू सैनी राष्ट्रपति भवन के एग्ज़ीक्यूटिव शेफ हैं।शेफ के रूप में मोंटू का चयन16 जून 2015 को  किया गया था और तब से अब तक मोंटू, यह ज़िम्मेदारी बख़ूबी निभा रहे हैं। 
मोंटू ने ही भारत में अन्य राष्ट्राध्यक्षों के शेफ के कॉन्फ्रेंस का आयोजन करवाया । यह आयोजन को  "क्लब द शेफ द शेफ" का नाम दिया गया। मोंटू अपनी ओर से पूरी कोशिश करते हैं कि भारतीय खाने की अलग पहचान बना पाए। इस आयोजन में शामिल होने वाले मेहमानों को मोंटू ने स्वयं इंडियन मसालों की पहचान करवाई और दिल्ली के "खारी बावली" मसाला बाज़ार की भी सैर करवाई। 
आइये जानते है मोंटू की ज़ुबानी, राष्ट्रपति भवन के शेफ के रूप में। 

राष्ट्रपति जी खाते है इस शख़्स के हाथ का खाना, जानिए कौन है यह शख़्स?

राष्ट्रपति जी खाते है इस शख़्स के हाथ का खाना, जानिए कौन है यह शख़्स?

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समय का रखना होता है ख़ास ध्यान 

समय का रखना होता है ख़ास ध्यान 

मोंटू और उनकी टीम को लगभग 15-16 घंटे काम करना होता है। राष्ट्रपति भवन में समय का ख़ास ख्याल रखा जाता है, ऐसे में मोंटू अपनी तरफ से पूरी कोशिश करते हैं कि किसी भी प्रकार की देरी ना हो। 

राष्ट्रपति भवन में अवध भोजन है ख़ास 

राष्ट्रपति भवन में अवध भोजन है ख़ास 

मोंटू ने अपनी खुद की 2 डिशेस बनाई है जिन्हें उन्होंने "सब्ज़ बाओली हांड़ी" और "लम्ब दरबारी" का नाम दिया है। राष्ट्रपति भवन में आमतौर पर अवध खाने को प्राथमिकता दी जाती है। विभिन्न समारोह को नज़र में रखते हुए, अलग अलग व्यंजन बनाए जाते हैं। 

मेहमानों को करवाते है इण्डिया का ज़ायका 

मेहमानों को करवाते है इण्डिया का ज़ायका 

मोंटू इस बात का ख़ास ख्याल रखते हैं कि भारत के राष्ट्रपति का शेफ होने के नाते, दूसरे देशों से आने वाले मेहमानों को भारतीय कुजिन के ज़ायके से रूबरू करा पाएं । मोंटू की कोशिश होती है कि राष्ट्रपति भवन के मेहमानों को इंडियन फूड ही खिलाए। 

स्वास्थ्य का रखा जाता है ध्यान  

स्वास्थ्य का रखा जाता है ध्यान  

राष्ट्रपति, देश के कार्यकाल में अहम् भूमिका निभाते हैं। शेफ को राष्ट्रपति की सेहत का ख्याल रखते हुए भोजन तैयार करना होता है। मोंटू बताते हैं कि खाना बनाने से पहले, डॉक्टर्स से सलाह ली जाती है। 

राष्ट्रपति की पसंद का खाना 

राष्ट्रपति की पसंद का खाना 

राष्टपति, भोजन को लेकर अलग-अलग व्यंजन पसंद करते हैं। यही कारण है कि राष्ट्रपति भवन में "राजभोग" की शुरुआत की गई है। मोंटू बताते हैं कि राष्ट्रपति को बंगाली भोज बहुत पसंद है और इसी को ध्यान में रखते हुए, मेनू में बंगाली व्यंजन ज़रूर शामिल किये जाते हैं। 

"दाल-खाना" कि करते है स्वयं देखभाल 

"दाल-खाना" राष्ट्रपति भवन का वह हिस्सा है जहाँ सब्ज़ियां या अन्य मसाले तैयार किये जाते हैं। राष्ट्रपति भवन में यह हिस्सा कृषि उत्पाद के लिए आवंटित किया गया है । मोंटू खुद "दाल-खाना" की देखभाल करते हैं। 

"मेक इन इण्डिया" से हैं प्रभावित 

राष्ट्रपति भवन में रोज़ाना 20 से भी ज़्यादा कुज़ीन बनाए जाते हैं। मोंटू अपनी 45 मेम्बर्स की टीम के साथ सारे व्यंजन बनाते हैं। यह राष्ट्रपति की "मेक इन इण्डिया" पहल से काफी प्रभावित हैं।

यह एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है 

यह एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है 

मोंटू कहते है कि राष्ट्रपति का शेफ होना एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी का काम है। ज़रा सी भूल चूक देश की प्रतिभा पर सवाल खड़े कर सकती है। इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी को सँभालने वाले मोंटू, कभी पिज़्जा हट में भी काम कर चुके हैं। 

क्या आपका मन होता है कभी राजभोज का ज़ायक़ा लेने का?

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