Share this post

user icon

Live

People Reading

This story now

छठ पूजा में रखते हैं 36 घंटों का कड़ा व्रत, आइये जानते हैं इस पर्व के बारे में कुछ और बातें 

"माँ कह रही थी इस बार यह परम्परा ख़त्म हो जाएगी क्योंकि छठ करने वाला कोई नहीं है।"

छठ पूजा का पर्व और उस पर वीडियो कि यह लाइन मेरे दिल को छू गई। मैं यह नहीं जानती कि इस बात में कितना सच है, लेकिन इसे सुनने के बाद आप भी ज़रूर भावुक हो जाएंगे। 'भारत त्यौहारों का देश है' बचपन में त्यौहारों पर निबंध लिखते समय मैंने अक्सर ही इस पंक्ति का उपयोग किया है। मुझे पूरा यक़ीन है आपने भी इसका इस्तेमाल किया ही होगा। हमारी भारतीय संस्कृति में हमेशा कोई न कोई ख़ास त्यौहार होता ही है।

छठ पूजा एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण हिन्दू त्यौहार है। हमारी संस्कृति में इस त्यौहार का ख़ासा महत्व भी है। लेकिन आमतौर पर लोगों को इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं होती है। चाहे आप किसी भी धर्म, जात या प्रान्त के हों लेकिन हमारी संस्कृति को थामे रखना तो हम सबका कर्तव्य है।

इसलिए आज हम बात करेंगे हिंदुओं के एक प्रमुख त्यौहार छठ पूजा के बारे में। आइये जानते हैं इस पर्व से जुड़ी कुछ बातें। 

छठ पूजा में रखते हैं 36 घंटों का कड़ा व्रत, आइये जानते हैं इस पर्व के बारे में कुछ और बातें 

छठ पूजा में रखते हैं 36 घंटों का कड़ा व्रत, आइये जानते हैं इस पर्व के बारे में कुछ और बातें 

754 396
  in Desi

सूर्य देवता की होती है पूजा

सूर्य देवता की होती है पूजा

छठ वैदिक काल से मनाया जाने वाला त्यौहार है। इसे छठ के अलावा छठी, छठ पूजा, छठ पर्व, डाला छठ, डाला पूजा, सूर्य षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है। छठ के दिन मुख्य रूप से सूरज यानि सूर्य देवता की पूजा की जाती है। हिन्दू धर्म में माना जाता है कि सूर्य देव की वजह से ही धरती पर जीवन है और वो ऊर्जा और शक्ति के देवता भी माने जाते हैं। इसलिए उन्हें धन्यवाद देने के लिए यह पूजा की जाती है। इस दिन सूर्य देव के साथ ही छठी मैया की भी पूजा की जाती है। छठी मैया सूर्य देवता की धर्मपत्नी हैं और उन्हें उषा के नाम से भी जाना जाता है।

चार दिन का है त्यौहार

चार दिन का है त्यौहार

छठ की पूजा में मुख्य दिन तो कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि यानि छठवां दिन होता है। लेकिन इस त्यौहार की शुरुआत कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चौथी तिथि को ही हो जाती है। इस दिन से लेकर यह त्यौहार सप्तमी यानि लगातार चार दिन तक चलता है। यह मुख्य रूप से महिलाओं का त्यौहार है और इसमें पवित्र स्नान और व्रत का सबसे अधिक महत्व होता है।

नहाय-खाय 

नहाय-खाय 

छठ पूजा के पहले दिन को नहाय-खाय कहा जाता है। इस दिन उपासक सुबह जल्दी उठकर किसी नदी या तालाब में डुबकी लगाते हैं और उस नदी या तालाब से पानी लाकर उसी पानी से सूर्य देव के लिए प्रसाद बनाते हैं। अपने पूरे घर को अच्छी तरह साफ़ करते हैं। इस दिन उपासक एक वक्त ही खाना खाते हैं। इस दिन मुख्य रूप से कद्दू-भात खाया जाता है और इसे मिट्टी या पीतल के बर्तन पर लकड़ी के चूल्हे पर बनाने की परम्परा भी है।

इन राज्यों का है प्रमुख त्यौहार

इन राज्यों का है प्रमुख त्यौहार

छठ की पूजा भारत के साथ ही नेपाल में भी की जाती है। भारत में यह मुख्य रूप से बिहार, झारखण्ड, और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। इसके साथ ही यह छोटे स्तर पर अन्य कई राज्यों और कुछ देशों में भी मनाया जाता है।

लोहंडा/खरना

लोहंडा/खरना

छठ पूजा के दूसरे दिन यानि पंचमी को उपासक पूरे दिन का उपवास करते हैं। शाम को सूर्यास्त के बाद सूरज और चाँद की पूजा करने के बाद खीर-पूरी, फलों का भोग लगाकर एवं परिवार व दोस्तों को खिलाकर उपवास तोड़ते हैं। शाम के खाने के बाद अगले 36 घण्टों के लिए कड़क उपवास किया जाता है। उपासक इस दौरान पानी भी नही पीते हैं।

संध्या अर्घ्य/पहला अर्घ्य

संध्या अर्घ्य/पहला अर्घ्य

यह छठ पूजा का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। इस दिन शाम में नदी या तालाब पर जाकर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। शाम को नदी या तालाब में डुबकी लगाकर सूर्य देव और छठी मैया की पूजा की जाती है। इस दिन उपासक के साथ पूरा परिवार और दोस्त भी नदी पर जाते हैं और इसे उत्सव की तरह मनाते हैं। इस दौरान लोक गीत भी गाए जाते हैं।

उषा अर्घ्य/दूसरा अर्घ्य

उषा अर्घ्य/दूसरा अर्घ्य

यह छठ पूजा का अंतिम दिन होता है। इस दिन अलसुबह उठकर फिर से उसी नदी या तालाब पर जाकर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। उपासक सूर्य देव की पूजा के बाद प्रसाद लेकर ही अपना व्रत खोलते हैं। फिर यह प्रसाद सभी परिवारजनों और दोस्तों में बाँट दिया जाता है।

पांडवों से है नाता

पांडवों से है नाता

छठ पूजा का जिक्र ऋग्वेद में भी मिलता है। इसके अलावा माना जाता है कि पांडवों और द्रोपदी ने भी अपने काल में छठ पूजा की थी। इस व्रत के जरिए उन्होंने अपनी कई समस्याएं सुलझाने के साथ ही अपना राज्य भी वापस पा लिया था।

भगवान राम ने भी की सूर्य देवता की पूजा

भगवान राम ने भी की सूर्य देवता की पूजा

कार्तिक मास की अमावस्या को अयोध्या लौट आने के बाद अपने राजतिलक के दौरान भगवान राम और सीता ने भी कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को सूर्य देव की पूजा की थी। बस तभी से सीता माँ की जन्मभूमि जनकपुर और आसपास के अन्य राज्यों में यह पूजा की जाने लगी।

बहुत महत्व है इस त्यौहार का

बहुत महत्व है इस त्यौहार का

छठ बहुत ही मुश्किल व्रत होता है। इसमें लगातार 36 घंटों तक बिना कुछ खाए पिए रहा जाता है। लेकिन माना जाता है इस दौरान उपासक को सूर्य देव से ऊर्जा मिलती है। इस पूजा को मुख्य रूप से ऊर्जा प्राप्ति और मन की शांति के लिए ही किया जाता है। इस त्यौहार को अपने परिवार, दोस्तों और बड़ों की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य के लिए मनाया जाता है। कहा जाता है कि सूर्य देव की पूजा करने से कई बीमारियां जैसे कि कुष्ठरोग आदि भी जड़ से मिट जाते हैं।

इस वीडियो में दर्शाया गया है कि कैसे आप घर से दूर होकर भी मना सकते हैं त्यौहार 

"पाहिले-पाहिले हम कैली छटी मैया बरते त्यौहार" इस वीडियो के यह बोल आपको भी भावुक तो ज़रूर करेंगे।   

क्या आप या आपके कोई परिचित छठ पूजा का व्रत रखते हैं?

others like

Loved this? Spread it out then

comments Comment ()

Post as @guest useror
clear

clear
arrow_back

redo Pooja query_builder {{childComment.timeAgo}}

clear

clear
arrow_back

Be the first to comment on this story.

Report

close

Select you are Reporting

expand_more
  • +2351 Active user
Post as @guest useror

NSFW Content Ahead

To access this content, confirm your age by signing up.