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यहाँ भाईदूज पर लगाते हैं सात रंगों का टीका, जानिए भाईदूज से जुड़ी और भी अनोखी बातें 

दिवाली, दिवाली, दिवाली बहुत दिनों से कानों में बस यही गूंज रहा था। अब क्या! कल हो गयी दिवाली, आज तो बस आराम किया। नहीं नहीं रुको रुको। अभी कहाँ ख़त्म हुई दिवाली। अभी तो बहुत ही ख़ास दिन बाक़ी है। वह ख़ास दिन जिसमें ढेर सारी नोंक-झोंक और झोली भर-भरकर मौज मस्ती होती है।

हाँ भाई, मुझे पता है ये भाई-भाई करते-करते आख़िरकार भाईदूज का दिन आ ही गया। अब आप लोग भाई दूज की ढेर सारी मौज तो कर ही लोगे, पर अगर मौज-मस्ती के साथ इस दिन को थोड़ा और करीब से जान लें तो कितना अच्छा होगा न? तो आइए जानते हैं भाईदूज से जुड़ी कुछ अनोखी बातें। 

यहाँ भाईदूज पर लगाते हैं सात रंगों का टीका, जानिए भाईदूज से जुड़ी और भी अनोखी बातें 

यहाँ भाईदूज पर लगाते हैं सात रंगों का टीका, जानिए भाईदूज से जुड़ी और भी अनोखी बातें 

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सिर्फ भारत नहीं, अन्य जगहों में भी मनाया जाता है 

सिर्फ भारत नहीं, अन्य जगहों में भी मनाया जाता है 

हिन्दू पंचांग के अनुसार भाईदूज का त्यौहार विक्रम संवत के कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता हैं। भाई दूज का त्यौहार सिर्फ भारतीय हिन्दू ही नहीं बल्कि हमारे पड़ोसी देश नेपाल में भी जोरो शोरो से मनाया जाता है। यहाँ इसे भाई टीका के नाम से जाना जाता हैं और यह दशहरे के बाद यहाँ का सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार है। भाई टीका मुख्य रूप से नेवारी, मैथली, थारू, बहुन और छेत्री लोग मानते है।

एक ही नाम नहीं है

एक ही नाम नहीं है

सबसे पहली बात तो मैं कबसे भाईदूज-भाईदूज कर रही हूँ और आप में से कई लोग सोच रहे होंगे हम तो इस दिन को भाईदूज कहते ही नहीं हैं। जी आप लोग भी बिलकुल सही सोच रहे हैं। इस दिन के नाम ही इतने सारे हैं। उत्तर भारतीय राज्यों में इसे भाई दूज बोलते हैं तो गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा,कर्नाटक राज्यों में भाऊ बीज, भाई बीज या भाव बीज के नाम से जाना जाता हैं। इसके अलावा बंगाल में इसे भाई फोंटा और मणिपुर में निगोल चाकूबा कहते हैं। इसे भातृ द्वितीया और भाऊ दीज के नाम से भी जाना जाता हैं।

जब रक्षाबंधन मनाते हैं तो भाईदूज क्यों

जब रक्षाबंधन मनाते हैं तो भाईदूज क्यों

बेशक रक्षाबंधन और भाईदूज दोनों ही भाई- बहन को समर्पित त्यौहार हैं। लेकिन इन दोनों त्योहारों में बहुत अंतर भी हैं। रक्षाबंधन में जहाँ राखी का सबसे ज्यादा महत्त्व होता हैं, वहीं भाईदूज में टीके का सबसे ज्यादा महत्त्व होता हैं। रक्षाबंधन में बहन अपने भाई की कलाई में रक्षासूत्र बांधकर उससे अपनी रक्षा का वचन लेती हैं। वही भाईदूज पर बहन अपने भाई की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं। इसके अलावा रक्षाबन्धन पर बहन भाई के घर जाती हैं और भाईदूज पर भाई बहन के घर आता हैं।

कृष्ण और सुभद्रा का प्रेम

कृष्ण और सुभद्रा का प्रेम

किसी भी त्यौहार को मनाने के पीछे कोई न कोई वजह या कहानी तो होती ही हैं। भाई दूज को मनाने के पीछे तो एक से ज्यादा कहानियां हैं। इससे सम्बंधित पहली कहानी यह है कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी यानि नरक चतुर्दशी को नरकरासुर का वध करने के बाद भगवन कृष्ण अपनी बहन सुभद्रा से मिलने जाते हैं। अपने भाई को देखकर सुभद्रा खुश हो जाती हैं और वो मिठाई और फूलों से अपने भाई का स्वागत करती हैं। साथ ही वो उनके मस्तक पर तिलक भी लगाती है। कुछ लोग मानते हैं कि यह घटना ही भाईदूज का मूल हैं।

यम और यमुना

यम और यमुना

हिन्दू धर्म में इस त्यौहार को यमद्वितीया भी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार कार्तिक मास की अमावस्या के दो दिन बाद मृत्यु के देवता यमराज अपनी चहेती बहन यमी यानि यमुना से मिलने जाते हैं। यमुना आरती उतारकर और तिलक लगाकर अपने भाई का स्वागत करती हैं। साथ ही इसके बाद वह अपने भाई को अपने हाथों से बना स्वादिष्ट भोजन भी खिलाती हैं। अपनी बहन के इस प्रेम और लगाव से अभिभूत होकर यम अपनी बहन को ख़ास उपहार भी देते है। इसके साथ ही इस सत्कार से प्रसन्न होकर वे घोषणा भी करते हैं कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को जो कोई भी भाई अपनी बहन के घर जाकर उससे तिलक लगवाएगा उसे मृत्यु से भयभीत होने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।

महावीर स्वामी से भी है नाता

महावीर स्वामी से भी है नाता

दीपावली के दौरान जैन तीर्थंकर महावीर स्वामी को निर्वाण प्राप्त हुआ था। उनके भाई राजा नन्दिवर्धन उन्हें खोने के दुःख से उबर नहीं पा रहे थे। तब उनकी बहन सुदर्शना ने उन्हें सहारा दिया था। बस तभी से महिलाएं भाईदूज के दिन श्रद्धेय मानी जाती हैं। 

कैसे मनाते हैं भाई दूज

कैसे मनाते हैं भाई दूज

भाई दूज का त्यौहार मुख्य रूप से शादी-शुदा बहनों का त्यौहार हैं। पर आजकल इसे सभी बहने मानती हैं। शादीशुदा बहने इस दिन अपने भाई को अपने घर बुलाती हैं। उसे तिलक लगाकर उसकी आरती करती हैं और खुद अपने हाथों से अपने भाई के पसंद का खाना बनाती हैं। इन सबके बदले में भाई भी अपनी बहन को कई तरह के तोहफे देता हैं। कही- कही बहने इस दिन अपने भाई के लिए उपवास भी करती हैं। यह भी कहा जाता हैं कि इस बहाने कई महीनों के बाद भाई-बहनों की मुलाकात भी हो जाती हैं और भाई यह भी देख लेता हैं कि बहन अपने ससुराल में खुश हैं या नहीं।

चन्द्र देवता की करते हैं पूजा

चन्द्र देवता की करते हैं पूजा

हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भाईदूज मनाना अनिवार्य होता है। इसलिए इन राज्यों में जिन लड़कियों या महिलाओं का भाई नहीं होता है वो चंद्र देवता यानि चंद्रमा की आरती उतारती हैं। इसके अलावा जो बहने किसी कारणवश इस दिन अपने भाई से नहीं मिल पाती हैं वह भी चंद्रमा की आरती करती हैं।

लगाते हैं सात रंगों का टीका

लगाते हैं सात रंगों का टीका

जैसा कि हम पहले ही बता चुके हैं कि भाईदूज पर तिलक यानि टीके का महत्त्व होता हैं। आमतौर पर बहने अपने भाइयों को लाल रंग के कुमकुम का टीका लगाती हैं। पर नेपाल में बहनें इस दिन अपने भाई के मस्तक पर सात रंगों का लंबा टीका लगाती हैं। वहीं बंगाल में चन्दन और काजल का इस्तेमाल टीके के रूप में किया जाता है।

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