Share this post

user icon

Live

People Reading

This story now

सूरज की किरणें पड़ते ही जन्नत बन जाती हैं यह 'गुलाबी मस्जिद'

"नज़रों को भा जाए ऐसे नज़ारे बहुत हैं, कोई गर दिल को भी छू जाए तो बात और है"

बड़ी देर से सोच रही हूँ कि इस स्टोरी की शुरुआत कैसे करू पर मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है। मुझे पता है कि मुझे किस बारे में बात करनी है पर मुझे शब्द नहीं मिल पा रहे हैं।क्योकि मैंने अभी जिस मस्जिद की तस्वीरें देखी हैं वो इतनी खूबसूरत हैं, इतनी खूबसूरत है, इतनी खूबसूरत हैं कि उसके लिए यह 'खूबसूरत' शब्द भी मामूली सा हैं। मेरे दिमाग में अभी बस एक ही बात घूम रही हैं कि मुझे जल्द से जल्द वहाँ जाना हैं।अगर आपको मेरी बातों का विश्वास नहीं है तो आप खुद ये तस्वीरें देख लें, अगर आप भी कला की क़द्र करते हैं तो यक़ीन मानिए एक पल के लिए तो आपको अपनी आँखों पर ही विश्वास ही नहीं होगा। 

सूरज की किरणें पड़ते ही जन्नत बन जाती हैं यह 'गुलाबी मस्जिद'

सूरज की किरणें पड़ते ही जन्नत बन जाती हैं यह 'गुलाबी मस्जिद'

754 396
  in OMG!

ईरान की हैं मस्जिद

ईरान की हैं मस्जिद

मुस्लिम देश ईरान में यूँ तो कई मस्जिद देखने को मिलेगी। लेकिन यहाँ कि 'नासिर-अल-मुल्क' मस्जिद सबसे अनोखी हैं।यह ईरान के महशूर शहर शीराज़ में स्तिथ हैं। कहने को यह मस्जिद 1888 में बनी थी पर आज भी इसका एक एक पत्थर नगीने सा चमकता हैं। 

क्या खासियत हैं मस्जिद की

क्या खासियत हैं मस्जिद की

बाहर से देखने पर तो यह मस्जिद एक आम मस्जिद की तरह ही नज़र आती हैं। लेकिन इसके अंदर जाते ही आपको बिलकुल जन्नत सा अहसास होगा।इस मस्जिद में कई रंगीन काँच लगाए गए हैं। सुबह-सुबह जब सूरज की किरणे इन काँचों से छनकर आती हैं तो इनका अद्भुत प्रतिबिम्ब ज़मीन पर बिछे पर्शियन कारपेट पर पड़ता हैं और फिर जो नज़ारा देखने को मिलता है वो देखने वाले पर जादू सा कर देता। 

काँच का हैं कमाल

काँच का हैं कमाल

आपने ऐसी कई इमारतें देखी होंगी जहाँ काँच का काम हो। लेकिन इस मस्जिद में कांच पर जो कारीगरी की गयी हैं वो अद्भुत हैं। ईरान में ही आपको अन्य कई मस्ज़िद में भी कांच पर कारीगरी देखने को मिल जाएगी, लेकिन इस मस्ज़िद की कारीगरी का तो कोई जवाब ही नहीं हैं

गुलाबी मस्ज़िद

गुलाबी मस्ज़िद

यह मस्ज़िद गुलाबी मस्ज़िद के नाम से भी मशहूर हैं। यह इसलिए कि इसकी दीवारों, गुम्बदों और छतो पर जो चित्रकारी की गयी हैं, उसमें गुलाबी रंग का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया गया हैं। यह चित्रकारी भी इसे जन्नत बनाती हैं।

12 साल में बनी मस्ज़िद

12 साल में बनी मस्ज़िद

यह मस्ज़िद 1876-1888 के दौरान ईरान के शासक 'मिर्जा हसन अली नासिर अल हसन' ने बनवाई थी। मिर्ज़ा ईरान के कंजर वंश के राजा थे। इस मस्ज़िद की लाज़वाब डिजाईन का श्रेय 'मोहम्मद-हसन-ए-मिमार 'और 'मोहम्मद रज़ा' को जाता हैं।

कर ले इबादत

कर ले इबादत

अब आप ही बताइये ऐसी जगह आकर कौनइबादत नही करना चाहेगा। मुझे नहीं लगता इस जगह से ज्यादा सुकून कहीं और मिल पाएगा।

ख़ुदा से एक मुलाकात

ख़ुदा से एक मुलाकात

सुबह-सुबह सूरज चढ़ने के साथ जब हलकी हलकी किरणे रंग बिरंगे कांच से अंदर आती हैं तो लगता हैं मानो ख़ुदा खुद अपने बन्दे से मुलाकात करने जमीं पर उतर आए हैं।

ये मेहराब भी हैं बेमिसाल

ये मेहराब भी हैं बेमिसाल

मस्जिद की छत पर बना यह मेहराब बेमिसाल कारीगरी का नमूना हैं।

रंगों का हैं जादू

रंगों का हैं जादू


इतने सारे रंग एक साथ देखकर तो किसी का भी दिल खुश हो जाए। इन रंगों की शालीनता भी क्या गज़ब ढा रही हैं।

Loved this? Spread it out then

comments Comment ()

Post as @guest useror
clear

clear
arrow_back

redo Pooja query_builder {{childComment.timeAgo}}

clear

clear
arrow_back

Be the first to comment on this story.

Report

close

Select you are Reporting

expand_more
  • +2351 Active user
Post as @guest useror

NSFW Content Ahead

To access this content, confirm your age by signing up.