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स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के लोगो के पीछे है यह रोचक कहानी

किसी भी ब्रांड को लोग उसके 'नाम', 'लोगो' या फिर 'टैग लाइन' से जानते हैं। ब्रान्ड्स के 'लोगो' उनकी पहचान बन जाते हैं। किसी भी ब्रांड के लिए उसका 'लोगो' बहुत मायने रखता है। कोई भी कंपनी अपना  'लोगो' बहुत सोच समझ कर रखती है और उसका कोई न कोई मतलब जरूर होता है।

ऐसे ही कुछ ब्रान्ड्स के 'लोगो' के बारे में विचार करते हुए मेरी नज़र एस.बी.आई. यानि स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के 'लोगो' पर गई और मैं सोचने लगी आखिर इस 'लोगो' का मतलब क्या हुआ? आपने भी कई बार एस.बी.आई. का 'लोगो' देखा होगा। तो क्या आपने कभी इस बारे में नहीं सोचा? तो आइए आज मैं आपको बताती हूँ क्या है स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के 'लोगो' के पीछे की कहानी। 

स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के लोगो के पीछे है यह रोचक कहानी

स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के लोगो के पीछे है यह रोचक कहानी

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सरकारी बैंक है एस.बी.आई.

सरकारी बैंक है एस.बी.आई.

स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया भारत की अंतरराष्ट्रीय पब्लिक सेक्टर की बैंकिंग और फाइनेंशल सर्विसेज कंपनी है। यह एक सरकारी बैंक है और इसका मुख्यालय मुम्बई, महाराष्ट्र में है

14,000 ब्रान्चेस हैं इसकी 

14,000 ब्रान्चेस हैं इसकी 

स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की भारत सहित लगभग 36 देशों में कुल मिलाकर 14,000 ब्रान्चेस हैं। इसके साथ ही World's biggest corporations की 'फार्च्यून ग्लोबल 500' लिस्ट में इसे 232वां स्थान प्राप्त हैं।

अरुंधति भट्टाचार्य है चेयरमैन

अरुंधति भट्टाचार्य है चेयरमैन

वर्तमान में अरुंधति भट्टाचार्य स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन के पद पर आसीन हैं। उन्हें एस.बी.आई. की पहली महिला चेयरमैन होने का गौरव प्राप्त है। उन्हें फोर्ब्स के द्वारा दुनिया की सबसे ताकतवर महिलाओं की सूची में 25वा स्थान प्राप्त हुआ है। 

एस.बी.आई. का पहला 'लोगो'

एस.बी.आई. का पहला ‘लोगो’

एस.बी.आई. की स्थापना 1 जुलाई 1955 को हुई थी। यह उस दौरान बैंक का 'लोगो' था। इस 'लोगो' में एक बरगद का पेड़ बना हुआ है। जो यह दर्शाता था कि स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया एक बरगद के पेड़ की तरह है जो हर दिशा में बढ़ सकती है। लेकिन इस 'लोगो' की यह कहकर आलोचना की जाने लगी कि बरगद का पेड़ अपने सानिध्य में किसी और पेड़ को नहीं बढ़ने देता है। 

1971 में बदल दिया 'लोगो'

1971 में बदल दिया ‘लोगो’

इन आलोचनाओं का यह असर हुआ कि 1971 में एस.बी.आई. नें अपना 'लोगो' बदल दिया। इस 'लोगो' को एन.आई.डी. अहमदाबाद के शेखर कामत ने डिजाईन किया था। यह 'लोगो' अक्टूबर 1971 की पहली तारीख को बॉम्बे में एस.बी.आई. की सेंट्रल ऑफिस बिल्डिंग के उद्घाटन के दौरान रिलीज़ किया गया था।

एकता को दर्शाता है

एकता को दर्शाता है

इस 'लोगो' में एक नीले रंग का सर्किल है जिसके तल में एक कट है। इस 'लोगो' के लोग अलग-अलग अर्थ निकालते हैं। इनमे से एक अर्थ यह है कि बड़ा सर्किल एकता और पूर्णता को दर्शाता है और बीच का छोटा सर्किल दर्शाता है कि इतना बड़ा बैंक होने के बावजूद आम आदमी की बैंक के केंद्र में पकड़ है। 

की-होल

की-होल

एक अर्थ यह भी निकाला जाता है कि सफ़ेद छोटा सर्किल और वो खड़ी डंडी की-होल है। इसका नाता सुरक्षा और शक्ति से हैं।

तालाब में पत्थर

तालाब में पत्थर

इस बारे में यह भी कहा जाता है कि सफ़ेद सर्किल तालाब में फेके गए पत्थर की तरह है, लहरें पैदा करता है । इसका यह मतलब हुआ कि अगर बैंक मैं एक बार पैसे जमा कर देने पर वे बढ़ते जाते हैं और समृद्धि लाते हैं।

With you-all the way

With you-all the way

कुछ लोगों का मानना है कि मध्य में जो सर्किल है वो बैंक की ब्रांच को दर्शाता है, और वो खड़ी लकीर शहरों की संकरी गलियों को दर्शाता है। सरल शब्दों में इसका अर्थ यह हुआ कि आप जहाँ भी जाएंगे बैंक आपकी सेवा में उपलब्ध रहेगी

गुजरात की झील से है नाता

गुजरात की झील से है नाता

इस लोगो के बारे में एक बहुत मज़ेदार बात यह है कि यह 'लोगो' अहमदाबाद, गुजरात की कांकरिया झील से प्रेरित भी माना जाता है।

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