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#सातफेरे: बीच ट्रैफिक में गाड़ी रोक कर मुकेश अम्बानी ने नीता से किया इज़हार और नीता बोल उठी...

शादियों के इस दौर में अगर कुछ शानदार वैवाहिक रिश्तों पर नज़र डाली जाए तो कुछ ऐसे खूबसूरत जोड़े आँखों के सामने तैरने लगते हैं जिनकी बारे में दिल खुद बा खुद जानना चाहता है। ऐसा ही एक जोड़ा है नीता और मुकेश अम्बानी का। 
एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मी नीता का मुकेश अम्बानी से जीवन भर का रिश्ता, किसी फ़िल्मी कहानी से कम नहीं है। शायद हर लड़की की लगभग यही कहानी है। बचपन की दहलीज़ लाँघ कर, जवानी से दोस्ती करने के दिन होते हैं तो दिल न जाने क्या-क्या अठखेलियां करने लगता है। जहाँ एक ओर अरेंज्ड मैरिज की परंपरा अपना अस्तित्व खोते जा रही है वहीं इस चर्चित अम्बानी कपल ने अरेंज्ड मैरिज में भी फ़िल्मों जैसी प्रेम कथा रच दी है। 

मैंने इनकी कहानी के कुछ पहलुओं को जोड़ कर, इस रिश्ते को शब्दों में समेटने की कोशिश की है, आप भी नज़र डालिये।  

#सातफेरे: बीच ट्रैफिक में गाड़ी रोक कर मुकेश अम्बानी ने नीता से किया इज़हार और नीता बोल उठी...

#सातफेरे: बीच ट्रैफिक में गाड़ी रोक कर मुकेश अम्बानी ने नीता से किया इज़हार और नीता बोल उठी...

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बचपन से ही थी नृत्य की शौक़ीन 

बचपन से ही थी नृत्य की शौक़ीन 

गुड्डे-गुड़िया से खेलने वाली नीता को बचपन से ही नृत्य में रुचि थी। पांच साल की उम्र से नीता, भरतनाट्यम सीखने लगीं। और जैसे-जैसे यह गुड्डे-गुड़िया खेलने की उम्र ने साथ छोड़ा नीता भी एक खूबसूरत लड़की के साँचे में ढलने लगीं।

धीरूभाई अम्बानी हुए कला प्रभावित 

धीरूभाई अम्बानी हुए कला प्रभावित 

नीता युवा अवस्था में पहुँचते-पहुँचते, नृत्य में पारंगत हो गईं। एक दफा नवरात्रि के कार्यक्रम में नीता परफॉर्म करने गई थी और वहां धीरूभाई अम्बानी भी आमंत्रित थे। धीरूभाई, नीता के नृत्य से इतने प्रभावित हुए कि उन्हें देखते ही अपने परिवार की बहू बनाने का फैसला कर बैठे।

धीरूभाई अम्बानी ने की पहल 

धीरूभाई अम्बानी ने की पहल 

कार्यक्रम के समाप्त होते ही, धीरूभाई ने आयोजक से नीता का नंबर ले लिया। जैसे ही धीरूभाई ने नीता को फ़ोन किया, नीता ने यह सोचकर फ़ोन काट दिया कि कोई ग़लत नंबर होगा। धीरूभाई भी कहां हार मानने वाले थे! उन्होंने दोबारा नीता का नंबर मिलाया और अपना परिचय देते हुए बोले "मैं धीरूभाई अम्बानी बात कर रहा हूँ।" दूसरी ओर से तुरंत ही आवाज़ आई कि "आप अगर धीरूभाई अम्बानी हैं, तो मैं एलिज़ाबेथ टेलर बात कर रही हूँ!" 

धीरूभाई ने दिया निमंत्रण...

धीरूभाई ने दिया निमंत्रण...

नीता ने यह बात अपने पिता को बताई। उनके पिता ने सलाह दी कि आइंदा फ़ोन आए तो अच्छे से बात करें। धीरूभाई ने फिर से नीता को फ़ोन किया। इस बार नीता ने धीरूभाई के साथ बहुत अच्छे से बात की। इस बातचीत के दौरान धीरूभाई ने नीता को ऑफिस में आने का निमंत्रण दिया। 

नीता ने स्वीकारा निमंत्रण!

नीता ने स्वीकारा निमंत्रण!

पहले तो नीता को यह सोचकर आश्चर्य हुआ कि इतने बड़े उद्योगपति उनसे क्यों मिलना चाहते हैं। लेकिन वह धीरूभाई के आमंत्रण का अपमान भी नहीं करना चाहती थीं। नीता ने साहस जुटाते हुए, धीरूभाई के आमंत्रण को स्वीकार कर लिया और उनसे मिलने के लिए उनके ऑफिस पहुँच गईं।  

नीता फंस चुकी थीं असमंजस में 

नीता फंस चुकी थीं असमंजस में 

धीरूभाई ने खुले दिल से नीता का स्वागत किया और दो-चार औपचारिक सवाल-जवाब के बाद, नीता पर अपनी असली मंशा ज़ाहिर कर दी। धीरूभाई ने नीता से पूछ लिया "क्या आप मेरे बेटे मुकेश से मिलना चाहेंगी।" नई उम्र की नीता जाने किस असमंजस में फंस चुकी थीं। उन्होंने बहुत सोच-विचार के बाद, मुकेश से उनके घर "उषाकिरण" में मिलने का फैसला लिया। 

मुकेश और नीता, मिले कुछ इस तरह...

मुकेश और नीता, मिले कुछ इस तरह...

फिर एक दिन हिचकिचाते हुए नीता ने "उषाकिरण" के दरवाज़े पर दस्तक दे ही दी। उस समय उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि आगे चलकर यही उनका स्थाई घर बनने वाला है। दरवाज़े पर जो शख़्स मौजूद था वो और कोई नहीं, मुकेश अम्बानी ही थे। और फिर मुलाकातों का सिलसिला चल निकला। दोनों ही एक दूसरे को समझने की कोशिश कर रहे थे। इन्हीं मुलाकातों के दौरान, मुकेश अपना दिल नीता पर हार बैठे। लेकिन नीता तो अब भी असमंजस में थीं। उनके लिए कोई फैसला कर पाना मुश्किल साबित हो रहा था। 

मुकेश और नीता उस वक़्त साथ थे 

मुकेश और नीता उस वक़्त साथ थे 

यह नीता और मुकेश की छठवीं या सातवीं मुलाक़ात थी लेकिन नीता फैसला नहीं ले पाई थी। मुकेश और नीता, साउथ मुम्बई के पेडर-रोड पर ड्राइव कर रहे थे। शाम का वक़्त था और घड़ी के कांटे रात होने की तरफ इशारा कर रहे थे। इस समय मुम्बई जैसे शहर में ट्रैफिक भी अपनी चरम सीमा पर रहता है। 

बीच ट्रैफिक में रुकी गाड़ी...

बीच ट्रैफिक में रुकी गाड़ी...

मन ही मन नीता को अपनी अर्धांगिनी मान चुके मुकेश ने ट्रैफिक सिग्नल के बीच गाड़ी रोक दी। नीता के लिए स्थिति को समझ पाना मुश्किल था और मुकेश ने इज़हार-ए-वफ़ा कर दी। मुकेश एक टुक नीता से पूछ बैठे "क्या तुम मुझसे शादी करोगी?" सिग्नल में फंसे रहने पर यूं ही नीता की धड़कनें तेज़ थी और उस पर यह सवाल तो क़यामत था।

नीता का जवाब 

नीता का जवाब 

मन ही मन नीता भी अब तक मुकेश को पसंद करने लगी थीं और इस ट्रैफिक की घबराहट के बीच फ़ौरन ही इस रिश्ते को कुबूल करते हुए हामी भर दी "हाँ! मैं शादी करूंगी।" उसके बाद जो कुछ हुआ उससे हम और आप अच्छी तरह से वाकिफ हैं। सात फेरों के बाद नीता मुकेश की परछाई बन चुकी हैं।

मुकेश की पत्नी बनना सौभाग्य है!

मुकेश की पत्नी बनना सौभाग्य है!

एक इंटरव्यू के दौरान जब नीता से पूछा गया कि उनके जीवन का सबसे अच्छा पल कौनसा है? तो नीता का यही जवाब था कि मुकेश की अर्धांगिनी बनना उनके सौभाग्य की बात है।

नीता हमेशा यही कहती हैं "Apart from being anything else, I enjoy being Mukesh's wife." 

क्या प्यार करने वालों के लिए शादी ज़रूरी है?

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