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एक माँ जिसको उसके बच्चों ने ही कर दिया बेघर... क्या इस दिवाली इंसाफ का दिया जल पायेगा?

वो खुद भूखी रहती थी पर उसने मुझे कभी भूखा ना सुलाया। मेरी बचकानी हरकतों के बावजूद उसने हर वक़्त मुझे प्यार से गले लगाया। मेरी गलती पर भी हस देती थी वो, कोई कुछ बोले तो लड़ लेती थी वो, आज ऐसी ही एक 'माँ' को मैंने सड़क के कोने पर रोता हुआ पाया।

बच्चों के लिए आज भी उतना ही प्यार और जुबान पर बस एक ही बात 'मुझे मेरे बच्चों से मिलवा दो आप, बेटा मुझे इसके अलावा कुछ नहीं चाहिए'। एक माँ का दर्द समझ सकता हूँ और अब जब बेटा कह ही दिया है तो एक 'बेटा' होने का फ़र्ज़ भी निभाउंगा । इस माँ को उसके बच्चों तक तो अब में ज़रूर पहुँचाऊँगा । 

किसी ने सही कहा है कि बचपन और बुढ़ापा दोनों जीवन की एक सी कड़ियों है। बचपन में बच्चों को सहारे की ज़रूरत पड़ती है और बुढ़ापे में माँ-बाप को। अंतर बस यह होता है कि एक माता-पिता अपने बच्चों का साथ कभी नहीं छोड़ते। जबकि, आज के कलयुगी युवा पीड़ी अपने माता-पिता को घर से धक्का मारके निकल देते है।

आज मैं आपको ऐसे ही एक दिलदहलाने वाली घटना के बारे में बताने जा रहा हूँ। आज मुझे आपके साथ की ज़रूरत है। इस दिवाली मेरी लड़ाई ऐसे हर एक इंसान से है जिसने अपने ही माता-पिता को बेघर कर दिया है। एक माँ को उसका हक़ दिलाना है। कोड़ी शान में सो रहे ऐसे बच्चों को जगाना है। इस माँ को इसके घर तक पहुँचाना है। 

क्या आप इस लड़ाई में मेरा साथ देंगे?

विटीफीड की एक ऐसी पहल जिसका आप भी अब हिस्सा बन सकते है। तो आईए चलते है एक ऐसे रस्ते पर जिस में उतार-चढ़ाव भी है। ख़ुशी भी है। गम भी है। बस, मंजिल का पता नहीं है। लेकिन मंज़िल है, यह ज़रूर मालूम है। 

एक माँ जिसको उसके बच्चों ने ही कर दिया बेघर... क्या इस दिवाली इंसाफ का दिया जल पायेगा?

एक माँ जिसको उसके बच्चों ने ही कर दिया बेघर... क्या इस दिवाली इंसाफ का दिया जल पायेगा?

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इंदौर की है यह कहानी। 

इंदौर की है यह कहानी। 

मेरा मित्र दुष्यंत जैन जब भी घर से ऑफिस की और निकलता, उसका सामना प्रतिदिन एक 'बुजुर्ग महिला' से होता था । एक ऐसी महिला जिसका दुःख उसकी आँखों से साफ़ झलकता । एक बार उस बुजुर्ग़ महिला ने मेरे दोस्त से पानी माँगा और इस तरह इस कहानी की शुरआत हुई। 

जब मेरे दोस्त ने थोड़ा विस्तार रूप से उस महिला से बात की तो वो भी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पाया और उसकी आँखों से भी आँशु गिर पड़े। आखिर क्यों मेरा दोस्त इतना भावुक हो गया की वो अपने आप को ही ना संभाल पाया ? बात ही कुछ ऐसी थी कि उसकी जगह अगर कोई ओर भी होता तो वो भी येहि करता।

जब यह बात उसने मुझे बताई तो मेरी जिज्ञासा भी नियंत्रण रेखा से बहार होने लगी और मैंने भी उस बुजुर्ग़ महिला से मिलने की इच्छा जताई। और जब मैं उस बुजुर्ग महिला से मिला और मैंने उनकी आप-बीती सुनी तो मेरा भी वही हाल हुआ जो मेरे दोस्त का हुआ था। 

इनका नाम है 'कुलदीप नैय्यर'!

इनका नाम है 'कुलदीप नैय्यर'!

उम्र लगभग 75 साल के करीब लेकिन तेवर बिलकुल 20 साल की युवती की तरह। किसी बात पर अगर कुलदीप नैय्यर अड़ गई तो मजाल है कोई उनसे जीत पाए। सड़क किनारे रहती है लेकिन उसूलों के साथ।

साफ़ सफाई से रहना पसंद है। एक बाल्टी और मग्गा अपने साथ लेके चलती है। जब भी मौका मिलता है नहाने में देरी बिल्कुल नहीं करती। 

हाँ! शरीर अब कमजोर हो गया है। उठने-बैठने में काफी दिक्कत आती है लेकिन ज़िन्दगी जीने का जज़्बा बिलकुल कायम है। बस एक बात बार-बार बोलती रहती है - मुझे मेरे बच्चों से मिला दो बेटा, मुझे उनसे मिला दो!

उनके पति सेना में बड़े पद पर थे। (यह तस्वीर उनके पति की नहीं है)

उनके पति सेना में बड़े पद पर थे। (यह तस्वीर उनके पति की नहीं है)

नैय्यर बताती है उनके पति सुरजीत सिंह नैय्यर भारतीय सेना में ऊँचे दर्ज़े के अफसर थे। उनके अनुसार उनका बेटा आज भी भारतीय नौसेना में पदस्थ है। उनकी एक बेटी भी है जिसके बारे में उन्होंने ज्यादा जिक्र नहीं किया।

अपने ही बच्चों ने आखिर क्यों कर दिया बेघर?

अपने ही बच्चों ने आखिर क्यों कर दिया बेघर?

पिछले 3 साल से नैय्यर अंतिम चौराहा, इंदौर में सड़क के किनारे रह कर अपना जीवन व्यतीत कर रही है आस-पास के लोगों के अनुसार इनका बेटा कुछ मामूली नोक-झोक के कारण इनको यहाँ छोड़ गया था। 

हमने इनके बेटे के बारे में और जानने की कोशिश कि लेकिन बस इतना पता लगा पाए की इनका एक घर राजेंद्र नगर, इंदौर में है। और राउ जो की इंदौर से सता हुआ एक क़स्बा है वहाँ पर भी इनकी कुछ संपत्ति मौजूद है। 

पहले रहती थी आलीशान बंगले में और अब...

पहले रहती थी आलीशान बंगले में और अब...

सड़क किनारे उनका कुछ समान पड़ा है। अब यही उनका घर है और यही उनका पता। 

नैय्यर बताती है की उनका घर काफी बड़ा हुआ करता था। जिस में गार्डन से लेके तमाम ऐसो-आराम की व्यवस्था थी। आज घर के नाम पर उनके पास बस कुछ यादे बची है । वाक़ेई ! किस्मत भी अपना पाला कब बदल दे यह कोई नही कह सकता। 

बेटा ! भूख लगी है खाना खिला दो। 

बेटा ! भूख लगी है खाना खिला दो। 

जैसे ही मैंने नैय्यर से बात करना शुरू की वो भावुक हो गई। और उन्होंने मुझे बहुत ही सरल एवं सहज अंदाज़ में कुछ कहने की कोशिश की जिसको पहली दफ़ा में तो मैं समझ नहीं पाया। लेकिन उनकी आँखे मुझसे बहुत कुछ कह गयी। वो भूखी थी। उन्होंने कई दिनों से खाना नहीं खाया था। 

एक माँ जो अपना पेट काटकर अपने बच्चो का पेट भर्ती थी। आज उसके बच्चे उसे भूखा सोने पर मजबूर कर रहे है। 

कई बार हो चुकी है सड़क हादसे का शिकार। 

कई बार हो चुकी है सड़क हादसे का शिकार। 

रोते हुए मुझसे बोलती है - बेटा ! बहुत दर्द होता है। सड़क के उस तरफ़ जाते वक़्त बहुत बार तेज़ गति से आ रहे गाड़ीवाले मुझे टक्कर मारके चले जाते है। मैं गिर जाती हूँ तब भी कोई उठाने नहीं आता। यह दुनिया बहुत स्वार्थी है बेटा, यहाँ हम जैसे सड़क पर रहने वालों लोगों की ना कोई इज़्ज़त करता है और ना ही कोई पूछता है। उनके पैरों की ओर जब मेरा ध्यान गया तब मुझे उनकी पीड़ा का अहसास हुआ। वो ना सही से चल पा रही थी और नहीं उठ पा रही थी। 

इस दिवाली बने सहारा किसी की बूढ़ी लाठी का। 

इस दिवाली बने सहारा किसी की बूढ़ी लाठी का। 

मैं हर बार फटाखे, मिठाईया, कपड़े और भी बहुत सारी चीज़े दिवाली के वक़्त लाता था। आखिर सबसे बड़ा त्यौहार है, क्यों ना लाऊ ? बहुत ख़ुशी होती थी लेकिन समय के साथ वो खुशिया कम होती गई। बहुत दिनों से सोच रहा था की इस दिवाली ऐसा क्या करू की वो खोयी हुयी खुशिया वापस ला सकू। क्योंकि कपड़े, फाटकों से तो मन को वो शांति-रूपी ख़ुशी का अहसास नहीं हो रहा था। फिर मैं ऐसा क्या करू ? दुविदा में फस गया था कि मेरे दोस्त ने मुझे इस बुजुर्ग़ माँ से मिलवा दिया। 

मैं कोई दान-वीर कर्ण नहीं हूँ। लेकिन जब मैंने मिस.नैय्यर से बात की मुझे एक बात का अहसास ज़रूर हो गया। असली ख़ुशी कपड़ो या फटाखों में नहीं है। किसी के चेहरे पर अगर आपके कारण मुश्कान आ रही है तो वो है ख़ुशी। किसी बेसहारे का सहारा बनके देखो कभी आप, सुकून मिलेगा, चेहरे ख़ुशी के मारे खिल उठेगा। 

दान और मदद वैसे तो कभी भी करोगे आप नुकसान में नहीं रहोगे । लेकिन दिवाली पर किसी गरीब के यहाँ दिया जलाके देखो आप, आपके जीवन से अंधकार अपने आप मिट जायेगा। 

आज विटीफीड के सहयोग से हमने एक बेसहारा के चेहरे पर मुस्कान लाने का एक छोटा सा प्रयास किया है । आप भी करके देखो अच्छा लगता है। 

आप भी विटीफीड की इस मुहीम से जुड़ सकते है।

आप भी विटीफीड की इस मुहीम से जुड़ सकते है।

नैय्यर को उनके बच्चो तक पहुँचाना अब आपकी और मेरी जिम्मेदारी है...

...उनके बच्चे तो कभी उन्हें लेने आएंगे नहीं। अगर आप में से कोई भी इस बुजुर्ग़ महिला को जनता है या ऐसे ही ओर लोगों को जनता है जिनके बच्चो ने उन्हें घर से बेघर कर दिया है। तो आप हमसे संपर्क कर सकते है। आप मुझे ईमेल भी कर सकते है। मेरा ईमेल एड्रेस है [email protected]

अगर स्टोरी अच्छी लगी हो तो आप मुझे subscribe भी कर सकते है। 

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