Share this post

user icon

Live

People Reading

This story now

पहली बार रिजेक्ट हो गए थे फिरोज़, दूसरी बार में पा सके इंदिरा को, जानिए इंदिरा गांधी के प्यार की पूरी कहानी 

वो कहते हैं ना कि मोहब्बत के सात मुकाम होते हैं दिलकशी, उन्स, मोहब्बत, अकीदत, इबादत, जुनून और मौत। ऐसी ही कुछ कहानी है फिरोज़ गांधी और भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के रिश्ते की। आईए खोलते हैं फिरोज के दिलकशी से मौत तक की कहानी, परत दर परत। 

पहली बार रिजेक्ट हो गए थे
फिरोज़, दूसरी बार में पा सके इंदिरा को, जानिए इंदिरा गांधी के प्यार की पूरी कहानी 

पहली बार रिजेक्ट हो गए थे फिरोज़, दूसरी बार में पा सके इंदिरा को, जानिए इंदिरा गांधी के प्यार की पूरी कहानी 

754 396
  in History

1. इंदिरा-फिरोज की पहली मुलाकात

1. इंदिरा-फिरोज की पहली मुलाकात

इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी की मुलाकात 1930 में हुई। दरअसल इंदिरा की माँ कमला नेहरु एक कॉलेज के सामने धरना दे रही थी। इस दौरान कमला बेहोश हो गईं। फिरोज ने कमला की शिद्दत के साथ देखभाल की।

2. फिरोज, इंदिरा को दिल दे बैठे थे

2. फिरोज, इंदिरा को दिल दे बैठे थे

साल 1933 में जब इंदिरा महज 16 साल की थी, तब फिरोज़ ने शादी का प्रस्ताव रखा। लेकिन उम्र कम होने के कारण इंदिरा की माँ कमला नेहरु ने इस शादी के लिए इंकार कर दिया था।

3. कमला नेहरु की पूरी देखभाल की

3. कमला नेहरु की पूरी देखभाल की

कमला नेहरु को बाद में टीबी की बीमारी हो गई। इस दौरान अस्पताल तक में फिरोज गांधी हमेशा उनके साथ रहे। कमला जब इलाज के लिए विदेश पहुँची तो फिरोज भी उन्हें देखने गए। यहां तक 1936 में कमला की मौत के समय भी फिरोज़ वहाँ मौजूद थे। ऐसे में माँ की देखभाल कर रहे नौजवान से इंदिरा का प्यार हो जाना लाज़मी ही था। 

4. पारसी थे फिरोज़ गांधी

4. पारसी थे फिरोज़ गांधी

फिरोज़ का असली नाम फिरोज़ जहांगीर घांडी है। फिरोज का जन्म मुंबई के एक पारसी परिवार में हुआ। महज 18 साल की उम्र में ही फिरोज ने आज़ादी की लड़ाई में शामिल होने का निर्णय ले लिया था।

5. 1942 में शादी के बंधन में बंधे फिरोज-इंदिरा

5. 1942 में शादी के बंधन में बंधे फिरोज-इंदिरा

इंदिरा ने जब फिरोज से शादी का फैसला लिया तो उनके पिता नेहरु बिल्कुल खुश नहीं थे। नेहरु की मर्जी के खिलाफ 1942 में जब देश में भारत छोड़ो आंदोलन चल रहा था, इंदिरा-फिरोज ने शादी कर ली। महात्मा गांधी ने शादी से पहले फिरोज़ को अपना सरनेम 'गांधी' दिया था। जो आज भी गांधी परिवार का सरनेम है।

6. अलगाव का दौर और वजह

6. अलगाव का दौर और वजह

1944 में राजीव गांधी का जन्म हुआ। पहले बच्चे के पैदा होने के बाद से ही इंदिरा ने राजनीति में रुचि दिखाना शुरू कर दिया था। ऐसे में पिता से काम सीख रही इंदिरा और फिरोज़ में दूरियां नज़र आने लगी थी। 

7. फिरोज़ भी अपनी दुनिया में मशगूल थे

7. फिरोज़ भी अपनी दुनिया में मशगूल थे

फिरोज़ गांधी अब नेशनल हेराल्ड अखबार के संपादन का काम देखने लगे थे। इंदिरा से बढ़ती दूरियों के बीच फिरोज़ का नाम लखनऊ की एक मुस्लिम महिला से भी जोड़ा गया था।

8. फिरोज़ गांधी को दिल का दौरा पड़ा!

8. फिरोज़ गांधी को दिल का दौरा पड़ा!

1958 में जब इंदिरा पिता नेहरु के साथ विदेश दौरे पर थे। इस दौरान ही फिरोज़ को दिल का दौरा पड़ा। इंदिरा जब वापस आईं तो फिरोज के साथ उनका रिश्ता कुछ दिनों के लिए संभल गया।

9. दिलकश, उन्स..........मौत!

9. दिलकश, उन्स..........मौत!

साल 1959 में इंदिरा गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बनीं। चीजें फिर बदलीं। फिरोज एक बार फिर शायद अकेले पड़ गए थे। और फिर 48 साल की उम्र में फिरोज़ गांधी इस दुनिया को अलविदा कह गए।

Loved this? Spread it out then

comments Comment ()

Post as @guest useror
clear

clear
arrow_back

redo Pooja query_builder {{childComment.timeAgo}}

clear

clear
arrow_back

Be the first to comment on this story.

Report

close

Select you are Reporting

expand_more
  • +2351 Active user
Post as @guest useror

NSFW Content Ahead

To access this content, confirm your age by signing up.