Share this post

हत्यारे ने जेल में रह कर बनाया एक ऐसा सॉफ्टवेयर जो करेगा अब पुलिस...

व्यक्ति में जो गुण होते हैं वे कभी उसका साथ नहीं छोड़ते, चाहे वह व्यक्ति कहीं भी रहे, वह जहाँ भी जाता है अपनी आदतों की पोटली संग ले कर ही जाता है। ऐसा ही कुछ रोहित ने भी किया।

जिला कारागार भोंडसी, गुड़गांव में अपनी पत्नी की हत्या के आरोप में आजीवन करावास की सजा काट रहे 40 वर्षीय रोहित पगारे नें जेल के काम-काज को सहज बनाने के लिए साफ्टवेयर विकसित किया है। जिसे जल्द ही सभी जेलों में इंस्टाल किया जाएगा। आइये देखते हैं क्या है इस सॉफ्टवेयर में  .

हत्यारे ने जेल में रह कर बनाया एक ऐसा सॉफ्टवेयर जो करेगा अब पुलिस...

हत्यारे ने जेल में रह कर बनाया एक ऐसा सॉफ्टवेयर जो करेगा अब पुलिस...

754 396
logo
  in Science & Technology

तीन महीने से चल रहा है ट्रायल 

तीन महीने से चल रहा है ट्रायल 

'स्टाफ ट्रेकिंग एण्ड एकाउंटेबिलिटी मैनेजमेंट प्रोग्राम(एसटीएएमपी)' नाम से निर्मित किए गए इस साफ्टवेयर का पिछले तीन माह से ट्रायल चल रहा है। जेल प्रबंधन को उम्मीद है कि जल्द ही इसे हरियाणा की सभी जेलों में इंस्टाल किया जाएगा।

जेल कर्मचारियों पर निगरानी रखेगा यह सॉफ्टवेयर 

जेल कर्मचारियों पर निगरानी रखेगा यह सॉफ्टवेयर 

जिला कारागार भोंडसी में हरियाणा-दिल्ली-एनसीआर के 50 से अधिक कुख्यात अपराधी निरुद्ध हैं। इन पर निगरानी रखने के लिए भोंडसी जिला कारागार में तकरीबन 250 जेल कर्मचारी नियुक्त हैं। इन कर्मचारियों पर निगरानी में यह साफ्टवेयर काफी सहूलियत प्रदान कर रहा है। एक क्लिक में किसी भी कर्मचारी की सर्विस बुक अधिकारियों के समक्ष आ जाती है। इसमें उसका पूरा परिचय, कहाँ-कहाँ ड्यूटी दी, कब दंडित हुआ तो कब तारीफ मिली, प्रतिदिन ड्यूटी आने और खत्म करने का समय, वेतन बढ़ोत्तरी, प्रमोशन संबंधी सभी जानकारियां मिल जाती हैं। यह भी ट्रेक किया जा सकता है कि वह जेल में कहाँ ड्यूटी दे रहा है।

 4 माह में बन गया डिज़ाइन और सॉफ्टवेयर 

 4 माह में बन गया डिज़ाइन और सॉफ्टवेयर 

रोहित का कहना है 'चार माह में डिजाइन और साफ्टवेयर बन गया। प्रतिदिन 8 से 9 घंटे काम किया। फरवरी से इसका परीक्षण चल रहा है। एक चार्टर्ड एकाउंटेंट होने के लिहाज से यह मेरे लिए आसान नहीं था। अमित मिश्रा के साथ काम करने के दौरान कुछ सीखा था कुछ पढ़ कर सीखा। एक चुनौती के रूप में लिया जिसके लिए हरविंदर सिंह साहब ने काफी मदद की।'

जारी है सॉफ्टवेयर का प्रयोग

जारी है सॉफ्टवेयर का प्रयोग

जिला कारागार भोंडसी के जेल सुपरिटेंड हरिंदर कहते हैं कि, 'अभी साफ्टवेयर पर प्रयोग जारी है। कुछ सुधार की जरुरत थी जिसे कर दिया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही इस पर उच्चाधिकारियों की स्वीकृति मिल जाएगी तो दूसरी जेलों में भी इसे इंस्टाल कर दिया जाएगा। इसमें यह भी पता चल जाता है कि वास्तवित समय में कौन कर्मचारी कहाँ उपस्थित है।"

यहाँ से मिली प्रेरणा 

यहाँ से मिली प्रेरणा 

रोहित पेशेवर 'सीए' हैं। उन्हें साफ्टवेयर की कोई जानकारी नहीं थी लेकिन साफ्टेवर में उनकी रुचि थी। जिला जेल में ही गोरखपुर निवासी साफ्टेवर इंजीनियर अमित मिश्रा अपनी पत्नी की आत्महत्या के केस में विचाराधीन कैदी के रूप में कुछ माह बंद थे। हालांकि बाद में अदालत ने उन्हें निर्दोष पाया और रिहा कर दिया। अमित के संपर्क में आने के बाद ही रोहित को सॉफ्टवेयर बनाने की प्रेरणा मिली। 

विभाग को होगी आमदनी भी 

विभाग को होगी आमदनी भी 

जेल अधिकारियों का मानना है कि हरियाणा की जेलों में नियुक्त कर्मचारियों का वेतन बजट प्रति वर्ष 120 से 150 करोड़ होता है। इस नए साफ्टवेयर से जेल कर्मचारियों की दक्षता बढ़ा एक मानव प्रबंधन कर 16 से 25 करोड़ रुपये का राजस्व बचाया जा सकेगा। यह साफ्टवेयर जेल के अलावा हरियाणा सरकार के अन्य विभागों में भी सेवाएं देने के योग्य है।

पत्नी की हत्या के मामले में काट रहे हैं सज़ा 

पत्नी की हत्या के मामले में काट रहे हैं सज़ा 

46 वर्षीय रोहित सुशांत लोक फेज वन में रहते थे। दिसंबर 2007 में उनकी पत्नी से किसी बात पर उनकी कहासुनी हो गई। इस हाथापाई में उनकी पत्नी की मौत हो गई।

फेंक दिया था शव को झाड़ियों में 

फेंक दिया था शव को झाड़ियों में 

उन्होंने कई घंटे तक शव को घर में रखा फिर एक सुटकेस में डाल कर कार की डिक्की में लेकर घूमते रहे। श्रीराम कालेज ऑफ कामर्स के निकट झाड़ियों में पुलिस ने शव बरामद किया, पूछताछ में पुलिस ने रोहित के शरीर पर खरोंच के निशान देख गिरफ्तार कर लिया था।

रोहित ने जेल में रह कर एक उपन्यास भी लिखा है 

रोहित ने जेल में रह कर एक उपन्यास भी लिखा है 

उन्हें वारदात के दो दिन बाद गिरफ्तार किया गया था। तभी से रोहित जेल में हैं। रोहित ने जेल में रहते हुए 386 पेज का अंग्रेजी में उपन्यास भी लिखा है जिनका शीर्षक है 'चार दोस्त'।

जेल में ऐसे लोग भी आने चाहिए सदियों से आलोचना सह रही हमारी भारतीय पुलिस और भारतीय जेल में कोई तो सुधार आएगा। 

Loved this? Spread it out then

Report

close

Select you are Reporting

expand_more
  • GreenPear
  • GreenPear
  • GreenStrawberry
  • GreenStrawberry
  • RedApple
  • RedApple
  • +2351 Active user
Post as @guest useror