Share this post

user icon

Live

People Reading

This story now

समाज को हर रोज़ आइना दिखाते हैं 'पिंक' के ये दमदार संवाद

शुजीत सरकार की 'पिंक' को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सराहनीय प्रयास माना जा रहा है। यह फिल्म कई सवाल उठाती है तो कई सवालों के जवाब भी देती है। फिल्म में अमिताभ बच्चन, तापसी पन्नू, कीर्ति कुल्हाड़ी, एंड्रिया तेरियांग इन सब ने अपनी गज़ब अदाकारी के दम पर इसे और प्रभावशाली बनाया है।

इस फिल्म को रिलीज़ हुए काफी वक़्त हो चुका है। पर इसमें जिन संवादों के माध्यम से महिलाओं के लिए समाज के नज़रिये को दर्शाया गया है। वो हर किसी के लिए हमेशा ही प्रासंगिक है। आइए आज आपको बताते हैं ऐसे ही कुछ संवादों के बारे में। 

समाज को हर रोज़ आइना दिखाते हैं 'पिंक' के ये दमदार संवाद

समाज को हर रोज़ आइना दिखाते हैं 'पिंक' के ये दमदार संवाद

754 396
  in Desi

टच करने का दिया है लाइसेंस

टच करने का दिया है लाइसेंस

ऐसी स्थिति का सामना हर लड़की या महिला को अक्सर ही करना होता है। पहली बात तो आप अकेली किसी लड़के के साथ या लड़कों के साथ दिख जाएं तो सारी नज़रे आपकी तरफ ही होती हैं। इसके साथ यह भी सोच लिया जाता है कि इस लड़की के साथ कुछ हुआ तो यही जिम्मेदार होगी।

घड़ी की सुई और चरित्र

घड़ी की सुई और चरित्र

पहली बात तो लड़कियों को सुरक्षा का हवाला देकर देर रात घर से बाहर निकलने ही नहीं दिया जाता है। फिर अगर कोई लड़की बाहर दिख गई तो वजह जाने बिना ही उस पर सवाल उठाये जाते हैं।

शराब पी ली तो लड़की सेट है

शराब पी ली तो लड़की सेट है

हमारे देश के महानगरों में कल्चर बदला तो है पर वहां के लोगो की सोच अब भी छोटी है। इन शहरों के लड़के कहते तो हैं कि लड़कियों के शराब पीने में हर्ज़ क्या है, पर ऐसी लड़कियों को लेकर सोच छोटी ही रखते हैं।

जगह भी मायने रखती है

जगह भी मायने रखती है

आप मंदिर या घर के किसी आयोजन में लड़कों से बात करें तो दिक्कत नहीं है। पर पब में कर ली तो भाई उनके लिए तो चांस ही है।

 लडकियां नहीं कर सकती लड़कों के साथ पार्टी

 लडकियां नहीं कर सकती लड़कों के साथ पार्टी

लडकियां अगर लड़कों के साथ पार्टी कर रही हैं तो इसका मतलब हुआ वो कुछ भी कर सकती हैं।

ना मतलब ना 

ना मतलब ना 

लड़कियों पर लड़कों का हक़ समझा जाता है और वैसे भी उनकी ना में तो हाँ होती है।

अलग-अलग मापदंड

अलग-अलग मापदंड

सिर्फ इसी मामले में नहीं ऐसा कई मामलों में होता है।

हक़ है आपका

हक़ है आपका

उन्हें होश ही नहीं तो आप कुछ भी कर लें। कोई जिम्मेदारी तो है ही नहीं। यही मानसिकता आज के समाज को कर रही है खराब। 

शब्द से कुछ ज्याद है ना 

शब्द से कुछ ज्याद है ना 

ना को कोई महत्व नहीं दिया जाता है। ना के पीछे कई सवाल होते हैं। क्यों 'ना'? कैसे 'ना'? क्या सोच कर बोला 'ना'? आदि।

यह सबसे तगड़ा है

यह सबसे तगड़ा है

लड़का आवारा है तो उसे कुछ नहीं कह सकते हैं। लड़कियों को उससे बचकर रहना है बस।

Loved this? Spread it out then

comments Comment ()

Post as @guest useror
clear

clear
arrow_back

redo Pooja query_builder {{childComment.timeAgo}}

clear

clear
arrow_back

Be the first to comment on this story.

Report

close

Select you are Reporting

expand_more
  • +2351 Active user
Post as @guest useror

NSFW Content Ahead

To access this content, confirm your age by signing up.