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इन 10 अज़ीब रस्मों को देख कर आप भी कहेंगे '100 में से 99 बेईमान फिर भी मेरा भारत महान' 

जिस को नहीं निज देश गौरव का कोई सम्मान है

वह नर नहीं, है पशु निरा, और मृतक के समान है।

जानते हो दुनिया के सभी देशों में सिर्फ भारत को ही माँ क्यों कहा जाता है? क्योंकि भारत ही वह देश है जहाँ संस्कार जन्मे हैं, जहाँ धर्म जन्मे हैं, जहाँ रीति-रिवाज़ जन्मे हैं। और फिर वह सभी धर्म, रीति-रिवाज़, आस्था, संस्कार दुनिया भर में निर्यात किये गए।

इन्हीं धर्मों व रीति-रिवाज़ से दुनिया अपने अस्तित्व को पहचान पाई। हमारे रीति-रिवाज़ दुनिया को अज़ीब लग सकते हैं, वह उस पर हँस भी सकते हैं, मगर यह रीति-रिवाज़ हमारे जीवन का आधार हैं। जब हम हिंदुस्तानी एक रास्ते के पत्थर को उठा कर उसे तराश कर अपनी आस्था से मंदिर में पूजने योग्य बना सकते हैं तो हम हिंदुस्तानी कुछ भी कर सकते हैं।

इन 10 अज़ीब रस्मों को देख कर आप भी कहेंगे '100 में से 99 बेईमान फिर भी मेरा भारत महान' 

इन 10 अज़ीब रस्मों को देख कर आप भी कहेंगे '100 में से 99 बेईमान फिर भी मेरा भारत महान' 

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1. बारिश के लिए कराई जाती है मेंढक की शादी 

1. बारिश के लिए कराई जाती है मेंढक की शादी 

महाराष्ट्र में एक अनोखी परम्परा निभाई जाती है। अच्छी बारिश के लिए यहाँ मेंढकों की शादी कराई जाती है। शादी के लिए मेंढकों को फूल-माला पहनाकर सजाया जाता है। इसके बाद धूमधाम से इनकी शादी रचाई जाती है। लोगों का मानना है कि इससे बारिश के देवता खुश होते हैं और बारिश कर देते हैं। मेंढकों की शादी में इंसानों की तरह पूरे विधि-विधान का पालन किया जाता है। उन्हें वरमाला पहनाई जाती है और सामान्य शादी की सारी रस्में निभाई जाती हैं। खुशियाँ बाँटने से बढ़ती है और हम खुशियाँ बिना वजह बाँटा करते हैं। 

2. मनोकामना पूरी होने पर की जाती है यह अनोखी परम्परा 

2. मनोकामना पूरी होने पर की जाती है यह अनोखी परम्परा 

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के कुछ गांवों में एक अजीब सी परम्परा का पालन सदियों से किया जा रहा है। इसमें लोग जमीन पर लेट जाते हैं और उनके ऊपर से दौड़ती हुई गायें गुजारी जाती हैं। इस परंपरा का पालन दीवाली के अगले दिन किया जाता है जो की गोवर्धन पूजा का पर्व कहलाता है। इस दिन उज्जैन जिले के आस-पास के गाँव में लोग पहले अपनी गायों को रंगों और मेहंदी से अलग-अलग पैटर्न से सजाते हैं। उसके बाद लोग अपने गले में माला डालकर रास्ते में लेट जाते है और अंत में दौड़ती हुए गायें उन पर से गुजर जाती हैं।

3. लाठियाँ खाने से होती है शादी 

3. लाठियाँ खाने से होती है शादी 

राजस्थान के जोधपुर में कुंवारे लड़कों को लाठियों से पीटने का रिवाज है। इन्हें पीटने का काम सुहागन महिलाएं करती हैं। लड़के भी चुपचाप मार खाते हैं। अब इस परंपरा में विदेशी महिलाएं भी शामिल होती हैं। महिलाएं सज-संवर कर घरों से लाठियां लेकर निकलती हैं। ऐसा माना जाता है कि जिन लड़कों की पिटाई होती है, अगले एक साल में उनकी शादी हो जाती है।

4. पति की लंबी उम्र के लिए पति के जिन्दा होते हुए भी जीती हैं विधवा का जीवन 

4. पति की लंबी उम्र के लिए पति के जिन्दा होते हुए भी जीती हैं विधवा का जीवन 

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, देवरिया और इससे सटे बिहार के कुछ इलाकों में गछवाह समुदाय की महिलाएं पति के होने के बावजूद भी विधवा की तरह जीवन जीती हैं। ऐसा वे 4 माह तक करती हैं। दरअसल इस समुदाय के लोग ताड़ी के पेशे से जुड़े होते हैं, जो अपनी जान जोखिम में डालकर 50 फीट ऊंचे पेड़ों से ताड़ी निकालने का काम करते हैं। इस कारण से महिलाएं विधवा जैसी रहती हैं और पति की सलामती की दुआ मांगती हैं।

5. गले तक दबा दिया जाता है बच्चे को मिट्टी में 

5. गले तक दबा दिया जाता है बच्चे को मिट्टी में 

इसके पीछे मान्यता है कि मिट्टी काफी पवित्र होती है, ऐसे में उसके अंदर जाने के बाद बच्चे की सभी मानसिक और शारीरिक तकलीफें दूर हो जाती हैं। इस रिवाज के तहत बच्चे को 6 घंटों तक मिट्टी के अंदर गले तक दबा दिया जाता है।

6. बच्चों की लंबी उम्र के लिए चढ़ाई जाती है लौकी 

6. बच्चों की लंबी उम्र के लिए चढ़ाई जाती है लौकी 

आपने भगवान को फूल या नारियल चढ़ाते देखा होगा, लेकिन छत्तीसगढ़ के रतनपुर में स्थित शाटन देवी मंदिर (बच्चों का मंदिर) से एक अनोखी परंपरा जुड़ी है। यहां देवी को लौकी चढ़ाई जाती है। लोग अपने बच्चों की तंदुरुस्ती के लिए यहाँ प्रार्थना करते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो भी यहाँ लौकी चढ़ाता है, उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है।

7. परिजन की मृत्यु पर दान किये जाते हैं शिवलिंग 

7. परिजन की मृत्यु पर दान किये जाते हैं शिवलिंग 

भारत के सबसे पुराने मठों में से एक वाराणसी का जंगमवाड़ी मठ है। इस मठ में एक विचित्र परंपरा चली आ रही है। इसके तहत परिजनों की मौत के बाद आत्मा की शांति के लिए लोग पिंडदान नहीं करते, बल्कि शिवलिंग दान करते हैं। अकाल मृत्यु होने पर आत्मा की शांति के लिए यहाँ शिवलिंग स्थापित किए जाते हैं। इस परंपरा के कारण एक छत के नीचे दस लाख से ज्यादा शिवलिंग स्थापित हो गए हैं।

8. यहाँ पहाड़ करता है लिंग जाँच 

8. यहाँ पहाड़ करता है लिंग जाँच 

झारखंड के बेड़ो प्रखंड के खुखरा गांव में अनोखी परंपरा पिछले 400 सालों से चली आ रही है। इस गांव में एक पहाड़ है जिस पर चांद की आकृति बनी हुई है। माना जाता है कि चांद की आकृति वाला ये पहाड़ गर्भ में पल रहे शिशु का लिंग बता देता है। गर्भवती महिलाएं निश्चित दूरी से चांद की आकृति पर पत्थर फेंकती है। अगर पत्थर चांद के भीतर लगे तो ये संकेत है कि गर्भ में लड़का है। अगर बाहर लगे तो गर्भ में लड़की पल रही है। इस परंपरा पर गांव वालों का अटूट विश्वास है। उनके अनुसार, यह हमेशा सही होता है।

9. यहाँ बहनें देती हैं भाई को मर जाने का श्राप 

9. यहाँ बहनें देती हैं भाई को मर जाने का श्राप 

उत्तर भारतीय समुदायों में भाई दूज पर अनोखी प्रथा मनाई जाती है। भाई दूज के दिन बहनें यम देवता की पूजा करती हैं। पूजा करते हुए वो अपने भाइयों को कोसती हैं और मर जाने का श्राप देती हैं। हालांकि, श्राप देने के बाद अपनी जीभ पर काँटा चुभा कर इसका प्रायश्चित भी करती हैं। इसके पीछे यह मान्यता है की यम द्वितीया (भाई दूज) को भाइयों को गाली व श्राप देने से उन्हें मृत्यु का भय नहीं रहता है।

10. कुत्ते से कराई जाती है बेटी की शादी 

10. कुत्ते से कराई जाती है बेटी की शादी 

झारखंड के कुछ हिस्सों में लोग लड़कियों की शादी कुत्तों से करवा देते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से ग्रहों की दशा बदल जाती है। साथ ही, भूत-प्रेत से छुटकारा मिल जाता है। हालांकि यह शादी सांकेतिक होती है,  लेकिन इसमें रीति-रिवाज़ का पूरा पालन किया जाता है। लोगों को शादी में आने का निमंत्रण दिया जाता है। बकायदा मंडप तैयार होता है और पूरे मंत्र विधान से शादी संपन्न कराई जाती है।

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