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चाणक्य के चार संदेश जिनमें छिपा है सफल जीवन का भेद

कोई व्यक्ति अपने कार्यों से महान होता है, अपने जन्म से नहीं

-आचार्य चाणक्य

चाणक्य को कौन नहीं जनता, लगभर दो हज़ार चार सौ साल बीत जाने के बाद भी उनकी चाणक्य नीति एक नागरिक के लिए आदर्श है। कोई भी बुद्धिमान व्यक्ति, ज्ञान को केवल अपने तक सीमित नहीं रखता, ज्ञान वह सागर है जिसको दूसरों तक पहुँचाने से सागर उतना ज़्यादा विस्तृत आकार लेता है। वही चीज़ चाणक्य ने भी अपनाई, इन्होंने अपने ज्ञान को किताबों में संग्रह किया ताकि पीढ़ियों तक लोग इसका लाभ उठा सकें। आइये जानते हैं क्या थी चाणक्य की वह चार बातें जो सफल जीवन की कुंजी हैं।

चाणक्य के चार संदेश जिनमें छिपा है सफल जीवन का भेद

चाणक्य के चार संदेश जिनमें छिपा है सफल जीवन का भेद

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  in Lifestyle

1. अपनी समस्याएं अपने तक रखें

1. अपनी समस्याएं अपने तक रखें

हमारे जीवन में हम यही सुनते है की दुःख बाँटने से कम होते हैं लेकिन चाणक्य कहते हैं कि किसी भी व्यक्ति को अपनी निजी समस्याएं दूसरों से साझा नहीं करनी चाहिए।

क्यों, कहाँ, कैसा?

क्यों, कहाँ, कैसा?

चाणक्य के अनुसार यदि आपकी समस्या दूसरों को पता चलेगी तो हो सकता है कि समय आने पर वह आपका मज़ाक बनाने लग जाएं। यह भी मुमकिन है कि आपकी समस्याएं जानकर, दूसरे आपकी परिस्थितियों का फायदा उठाने लगें। इसलिए चाणक्य कहते हैं कि अपनी समस्याएं केवल अपने तक ही रखनी चाहिए। 

2. आर्थिक हानि का किसी को पता चलने ना दें 

2. आर्थिक हानि का किसी को पता चलने ना दें 

चाणक्य के अनुसार यदि आपके जीवन में आर्थिक हानि अर्थात पैसों की तंगी चल रही हो, तब भी आपको अपना आचरण ऐसे ही रखना चाहिए जैसे आप सामान्य दिनों में रहते हैं।

क्या है इस कथन का उद्देश्य 

क्या है इस कथन का उद्देश्य 

चाणक्य कहते हैं कि यदि आप अपनी आर्थिक समस्या किसी को बताएंगे तो लोग समझने लगेंगे कि आपको पैसों की ज़रूरत है और जहाँ पैसों की बात आती है वहाँ कई रिश्ते बदल जाते हैं। लोगों को आपकी मदद ना करनी पड़ जाए इसलिए वे आपसे दूर भागने लगते हैं।

3. परेशानियों को दूर करना चाहिए

3. परेशानियों को दूर करना चाहिए

चाणक्य के अनुसार जब भी संकट आए तो इसका विवरण किसी और से ना करें बल्कि पूरे बल से यह दूर करने में लग जाए। 

क्यों कहा ऐसा 

क्यों कहा ऐसा 

चाणक्य के अनुसार जब आप अपनी ज़िन्दगी के कमज़ोर वक़्त के बारे में दूसरों को बताते हैं तो लोग या तो समय आने पर आपकी निंदा करने लग जाते हैं या आपको अपमानित करने लगते हैं इसलिए अपने संकट को खुद दूर करने में जुट जाना चाहिए ना कि दूसरों के सामने बताया जाए। 

4. अपनी पत्नी की बातें स्वयं तक रखें

4. अपनी पत्नी की बातें स्वयं तक रखें

चाणक्य के अनुसार किसी भी व्यक्ति को अपनी पत्नी की बातें, दूसरों के सामने नहीं करना चाहिए।चाणक्य की यह बात अपना लेने से जाने कितने वैवाहिक रिश्ते सुधर सकते हैं। 

क्या है इसके पीछे उद्देश्य

क्या है इसके पीछे उद्देश्य

चाणक्य के अनुसार यह व्यक्ति जो दूसरों के सामने अपनी पत्नी की निंदा करता हो या अपनी पत्नी के बारे में नकारात्मक बात करता हो। वह ऐसा कुछ कह सकता है जो उसको नहीं कहना चाइए और यह बात उनके शादीशुदा जीवन में बाधा डाल सकती है।

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