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डॉ कलाम: एक महान वैज्ञानिक, एक सफल राष्ट्रपति और एक नेक इंसान 

मैं एक हैंडसम इंसान नहीं हूँ लेकिन मैं अपना हैंड उस किसी भी व्यक्ति को दे सकता हूँ जिसको मदद की ज़रूरत है। सुंदरता दिल में होती है चेहरे में नहीं- डॉ.कलाम 

अबुल पकिर ज़ैनुलआबेदीन अब्दुल कलाम जिन्हें हम डॉ कलाम के नाम से जानते हैं। यह पहले राष्ट्रपति थे जिनका राजनीती से दूर-दूर तक कोई सम्बन्ध नहीं था, भारत के 11 वे  राष्ट्रपति डॉ कलाम का विज्ञान के क्षेत्र में बहुत बड़ा योगदान है। एक महान वैज्ञानिक, एक सफल राष्ट्रपति और एक नेक इंसान के तौर पर भी याद किया जाता है। 

वैसे तो डॉ. कलाम के जीवन के कई ऐसे किस्से हैं जो बहुत कुछ सीख देते हैं। दुनिया को विदा कहते हुए भी इन्होनें, मानवता का पाठ पढ़ाया। आइए पढ़ते हैं इनके जीवन का एक ऐसा ही वाकया जो हम सबके लिए एक सबक है। 

डॉ कलाम: एक महान वैज्ञानिक, एक सफल राष्ट्रपति और एक नेक इंसान 

डॉ कलाम: एक महान वैज्ञानिक, एक सफल राष्ट्रपति और एक नेक इंसान 

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एक महान इंसान 

एक महान इंसान 

डॉ. कलाम एक नाम ही नहीं अपितु एक पहचान हैं। हमारे देश की पहचान, जिन्होनें ना सिर्फ देश को एक नई उड़ान दी बल्कि देश को बुलन्दियों पर भी लेकर गए। 

'मिसाइल मैन' की ज़िन्दगी देती है मानवता की सीख 

'मिसाइल मैन' की ज़िन्दगी देती है मानवता की सीख 

भारत के 'मिसाइल मैन' के नाम से पहचाने जाने वाले डॉ कलाम की ज़िंदगी से सीखने के लिए हमारे पास काफी कुछ है। सादगी की मूरत और नेकी की परछाई डॉ कलाम की ज़िन्दगी में ऐसे कई किस्से मौजूद है जिनसे हमें उनके इस रूप की जानकारी मिलती है। आज हम यहाँ उन्हीं में से एक किस्से को आपके सामने लेकर आए हैं। 

कौन जानता था कि यह आखिरी सफर होगा 

कौन जानता था कि यह आखिरी सफर होगा 

बात उस समय की है जब डॉ. कलाम अपना आखिरी स्पीच देने जा रहे थे। किसी को पता नहीं था कि यह उनके जीवन का अंतिम सफर होगा।

दूसरों के दुःख को महसूस करना सिखाया 

दूसरों के दुःख को महसूस करना सिखाया 

डॉ कलाम ने देखा कि उनका सिक्योरिटी गार्ड जिप्सी में खड़ा हुआ है। उनके साथ बैठे सृजन पाल से डॉ कलाम ने कहा कि उस जवान को बैठा दिया जाए, इस तरह खड़े हुए वो थक जाएगा। 

डॉ कलाम ने दिया मानवता का उदाहरण

डॉ कलाम ने दिया मानवता का उदाहरण

डॉ कलाम को उस जवान का खड़ा रहना बिल्कुल अच्छा नहीं लगा, उन्होंने 1.5 घंटे में कई बार उसको बैठने के लिए कहा लेकिन सिक्योरिटी की वजह से वह जवान नहीं बैठा। 

सिक्योरिटी गार्ड के खड़े होने पर किया ऐतराज़

सिक्योरिटी गार्ड के खड़े होने पर किया ऐतराज़

चूँकि वह जवान पूरा समय खड़ा ही रहा। डॉ कलाम ने साथ वालों से अनुरोध किया कि उस जवान को उनके कक्ष में भेजा जाए, वह खुद उसका शुक्रिया अदा करना चाहते थे।

डॉ कलाम ने किया शुक्रिया अदा 

डॉ कलाम ने किया शुक्रिया अदा 

जैसे ही जवान डॉ कलाम के कक्ष में दाखिल हुआ, डॉ कलाम उसका शुक्रिया अदा करने के लिए खड़े हो गए और जवान को इतना लंबा समय खड़े रखने के लिए क्षमा मांगी। इस तस्वीर में डॉ कलाम जवान का शुक्रिया अदा करते हुए।

सदैव जीवित रहेंगे हमारे बीच 

सदैव जीवित रहेंगे हमारे बीच 

डॉ कलाम केवल एक राष्ट्रपति ही नहीं थे। एक महान इंसान और एक महान वक्ता भी थे। आज उनके जन्मदिन पर जब उनके बारे में कुछ लिखना चाहा तो समझ में नहीं आया कि उस महान व्यक्ति के जीवन के किस पहलू की बात करूं। विज्ञान के क्षेत्र में या राजनीती में या एक इंसान के तौर पर, इसमें कोई शक नहीं कि डॉ कलाम सदैव हमारे बीच जीवित रहेंगे। 

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