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जिस रावण के सिर को 'श्री राम' नहीं काट पाए उस सिर को चोरी कर के ले गए लोग

लगता है देश में सच-मुच अच्छे दिन आ गए हैं अब देखो न जिस रावण को आतंक का पर्याय समझा जाता था। जिसकी हँसी मात्र से लोग कँप-कँपा जाते थे। आज भारत में उसकी दहशत भी काम नहीं आ रही है। सरेआम उसके पुतले के साथ शोषण किया जा रहा है। और तीनों लोकों के स्वामी लंकापति रावण कुछ न कर पाए, बस पुतले बने अपनी बर्बादी को देखते रहे और अपने साथ हुई ज़्यादती के खुद गवाह बन बैठे। आइये जानते हैं क्या हुआ फिरोज़ाबाद में। 

जिस रावण के सिर को 'श्री राम' नहीं काट पाए उस सिर को चोरी कर के ले गए लोग

जिस रावण के सिर को 'श्री राम' नहीं काट पाए उस सिर को चोरी कर के ले गए लोग

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रावण करता रहा इंतजार मगर नहीं आये श्री राम 

रावण करता रहा इंतजार मगर नहीं आये श्री राम 

दशहरे के दिन फरीदाबाद के न्यू टाउन में रावण के पुतले के साथ कुछ ऐसा हुआ जिसके बारे में सुनकर हर कोई हैरान रह गया। रावण का पुतला जलने का इंतजार करता रहा लेकिन जलाने के लिए कोई राम नहीं पहुंचा।

रावण करता रहा इंतजार मगर नहीं आये श्री राम 

रावण करता रहा इंतजार मगर नहीं आये श्री राम 

स्थानीय राजनीति के चलते पुतले का सिर गायब कर दिया गया था जिसके चलते प्रशासन को यह ऐलान करना पड़ा कि सिर कटे रावण को नहीं जलाया जाएगा। हालांकि एक अन्‍य कमेटी द्वारा बनाए गए रावण का दहन हुआ।

कुंभकर्ण जला मगर रावण बच गया 

कुंभकर्ण जला मगर रावण बच गया 

हुआ यह कि मैदान में दो पुतले तैयार कर रखे गए थे। एक रावण व दूसरा कुम्भकर्ण का पुतला था। कुम्भकर्ण के पुतले को जलाया गया लेकिन रावण नहीं जल सका। आपसी राजनीति के चलते किसी ने रावण के सिर को गायब कर दिया।

पुरानी जगह पर पुतला खड़ा करने के लिए हुआ झगड़ा 

पुरानी जगह पर पुतला खड़ा करने के लिए हुआ झगड़ा 

फऱीदाबाद न्यू टाऊन के एनआईटी 1 हनुमान मंदिर और वैष्‍णव देवी मंदिर से जुड़े लोग पुतलों को पुरानी जगह खड़े करने पर अड़ गए। विवाद के साथ ही भीड़ भी बढ़ी और परिणाम यह निकला कि मंदिर कमेटी ने पुतला खड़ा नहीं किया।

सर ले कर ही चले गए पदाधिकारी 

सर ले कर ही चले गए पदाधिकारी 

दूसरी तरफ पदाधिकारी मैदान में वापस नहीं आ सके और पुतले का सिर भी उनके साथ ही चला गया। 

दूसरी कमेटी के रावण का हुआ दहन 

दूसरी कमेटी के रावण का हुआ दहन 

बाद में पुलिस को घोषणा करनी पड़ी कि इन पुतलों का दहन नहीं किया जाएगा। हालांकि एक दूसरी कमेटी द्वारा बनाए गए पुतलों का दहन किया गया।

लावारिसों की तरह मैदान में पड़ा रहा रावण 

लावारिसों की तरह मैदान में पड़ा रहा रावण 

तो फऱीदाबाद में इस तरह से इस बार दशहरे में रावण तो जला लेकिन उसका एक पुतला मैदान में बिना सिर यूँ ही पड़ा रहा। हालांकि बाद में एनआईटी 1 में रावण के इस पुतले की शवयात्रा निकाली गई।

जिस रावण को आतंक का पर्याय माना जाता है उसके साथ भी ऐसी ज्यादती होने लग गई यह सूचक है इस बात का कि "मेरा देश बदल रहा है आगे बढ़ रहा है।"

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