Share this post

क्यों इस दिन लाल हो जाती है कर्बला की ज़मीन भी, जानें मुहर्रम से जुड़ी कुछ बातें 

"फिरता है दर बदर न रहता है चैन से 

शर्मिंदा है पानी आज भी हुसैन से"

मुहर्रम सिर्फ एक त्यौहार नहीं, यह इतिहास के पन्नों पर दर्ज वो कहानी है जिसे कोई भुला नहीं सकता। इस पर्व के बारे में कितना भी क्यों ना लिख लिया जाए लेकिन यह महज़ सूरज को दिये दिखाने समान होगा। मुहर्रम को चन्द लफ़्ज़ों में समेट पाना बहुत ही मुश्किल है क्योंकि यह पर्व इस्लाम के इतिहास में सबसे बड़ा पर्व है।

कहते हैं इस एक दिन पर कर्बला की मिट्टी भी लाल हो जाती है। और यह महीना इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से नए साल की शुरुआत भी करता है। इस लेख पढ़िए में मुहर्रम से जुड़ी कुछ बातें, जो जानना ज़रूरी है।


क्यों इस दिन लाल हो जाती है कर्बला की ज़मीन भी, जानें मुहर्रम से जुड़ी कुछ बातें 

क्यों इस दिन लाल हो जाती है कर्बला की ज़मीन भी, जानें मुहर्रम से जुड़ी कुछ बातें 

754 396
  in Lifestyle

क्यों मनाया जाता है मुहर्रम 

Loading...

हज़रत मोहम्मद जिन्होंने इस्लाम की पहल की। इस्लाम की बुनियाद ही हज़रत मोहम्मद से क़ायम हुई। आपकी एक बेटी थी हज़रत फातिमा और आपके दो नवासे हुआ करते थे, हज़रत हसन और हज़रत हुसैन। मुहर्रम की 10 तारीख को, हक़ और बातिल की लड़ाई में लड़ते हुए हज़रत हुसैन की शहादत हुई थी। इसी शहादत को मुहर्रम नाम दिया गया है।

क्या हुआ था 10 तारीख़ को 

Loading...

मुहर्रम की 10 तारीख को "अशुरा" भी कहा जाता है। यह बात वाक़ई सबक हासिल करने लायक़ है कि हज़रत इमाम हुसैन की फ़ौज में सिर्फ 72 लोग थे, जिनमे औरतें, बच्चे और बुज़ुर्ग भी शामिल थे और यज़ीद की फ़ौज में लाखों की तादाद में सिपाही शामिल थे। लेकिन सिर्फ 72 लोगों ने इस जंग में जीत हासिल की। यज़ीद इंसानियत और इस्लाम दोनों का दुश्मन था। .

ख़ाक-ए-करबला 

ख़ाक-ए-करबला 

यह कर्बला की सर ज़मीन हैं जो की इराक में है। कहा जाता है कि मुहर्रम की 10 तारीख़ को यहाँ की मिट्टी लाल हो जाती है। इस जगह पर धोख़े से हज़रत हुसैन का सर कलम किया गया था।

क्यों पिलाया जाता है शबील 

क्यों पिलाया जाता है शबील 

यज़ीद और हज़रत हुसैन की जंग छिड़ी, यज़ीद ने अपनी ताक़त और फ़ौज का इस्तेमाल करते हुए हज़रत हुसैन और उनके साथियों को पानी से महरूम कर दिया। पानी पर इस तरह पहरा लगा दिया गया था कि हज़रत हुसैन के साथी प्यास की वजह से दम तोड़ने लगे। प्यासा मार देने की वजह से कर्बला की जंग को हमेशा याद किया जाता है।

ताज़िये भी बनाये जाते हैं 

ताज़िये भी बनाये जाते हैं 

कई मुस्लिम समाज के लोग ताज़िये बनाते हैं। हालाँकि कई लोग ताज़िये बनाने को सही नहीं मानते लेकिन इसमें कुछ भी बोल पाना सही नहीं होगा, क्योंकि सबका अपना-अपना अक़ीदा होता है। 

होता है मातम 

होता है मातम 

मुहर्रम की 10 तारीख को मातम मनाया जाता है। हज़रत हुसैन की कुर्बानी का मातम, जब यज़ीद ने हज़रत का सर कलम किया उस वक़्त हज़रत नमाज़ अदा कर रहे थे। जैसे ही हज़रत सजदे में झुके, धोखे से उनका सर कलम कर दिया गया।

हज़रत का फरमान

हज़रत का फरमान

ज़िन्दगी में दो तरह के दिन आते हैं, एक जिसमे आप जीतते हैं, और दूसरा वो दिन जो आपके खिलाफ होता है। जब तुम्हारी जीत हो तो घमंड मत करो और जब चीज़ें तुम्हारे खिलाफ जाएँ तो सब्र करो। दोनों ही दिन तुम्हारे लिए परीक्षा हैं।

क्या सिखाता है मुहर्रम 

क्या सिखाता है मुहर्रम 

जैसे की मैंने बताया की हज़रत की फ़ौज में सिर्फ 72 लोग थे और दूसरी और यज़ीद की फ़ौज में लाखों की तादाद में लोग शामिल थे। फिर भी जीत हज़रत की हुई, बेइंतेहा ज़ुल्म सहकर, प्यासे रहकर और अपनी जान गवांकर उन्होंने सच्चाई की यह जंग जीती।सबक यह है कि सच्चाई को कोई ताक़त पराजित नहीं कर सकती। अंत में हज़रत के यह अल्फ़ाज़ जिन्हें हमेशा याद रखने चाहिए। 

"कभी भी किसी के दुःख को देखकर खुश मत हो क्योंकि तुम्हे पता नहीं है भविष्य में तुम्हारे साथ क्या होने वाला है।"

Loved this? Spread it out then

Report

close

Select you are Reporting

expand_more
  • GreenPear
  • GreenPear
  • GreenStrawberry
  • GreenStrawberry
  • RedApple
  • RedApple
  • +2351 Active user
Post as @guest useror
stop

NSFW Content Ahead

To access this content, confirm your age by signing up.