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रिवॉल्वर दादी: दुनिया की सबसे उम्रदराज़ शार्पशूटर, दिग्गज भी नहीं जीत पाते हैं इनसे मुकाबला 

तू ना थमेगा कभी, तू न मुड़ेगा कभी, तू ना रुकेगा कभी। कर शपथ! - हरिवंश राय बच्चन 

जब मैं यह लेख लिखने के लिए दादी के बारे में पढ़ रही थी तो यक़ीन मानिये ऊर्जा की एक लहर मैंने अपने अंदर भी महसूस की। और मुझे हरिवंश जी की यह लाइंस एकदम सही लगी। जब उम्र इस जूनून को नहीं रोक पाया तो कोई और इसे क्या रोकेगा। 

अगर इस लेख के टाइटल में "दादी" शब्द देख कर आप यह सोच रहे हैं कि मैं किसी वृद्ध औरत के बारे में बात करुँगी तो माफ़ कीजियेगा! मैं ऐसा कुछ नहीं करने वाली। 85 साल की हो चुकी रिवाल्वर दादी के लिए उम्र तो सिर्फ एक आंकड़ा है, इनके हुनर की गूँज तो दूर-दूर तक सुनाई देती हैं। मैं आपको एक ऐसी दादी के बारे में बताने वाली हूँ जो रिवॉल्वर के साथ खेलती हैं। 

यहाँ तक ही नहीं, इस दादी के किस्से तो दूर-दूर तक फैले हुए हैं, चाहे आप टीवी की बात करें या न्यूज़ की, पूरा देश वाक़िफ़ है इनके इस हुनर से। आइए जानते हैं कुछ विशेष बातें रिवॉल्वर दादी के बारे में।

रिवॉल्वर दादी: दुनिया की सबसे उम्रदराज़ शार्पशूटर, दिग्गज भी नहीं जीत पाते हैं इनसे मुकाबला 

रिवॉल्वर दादी: दुनिया की सबसे उम्रदराज़ शार्पशूटर, दिग्गज भी नहीं जीत पाते हैं इनसे मुकाबला 

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तोमर दादियों का गाँव

तोमर दादियों का गाँव

उत्तर प्रदेश की हैं तोमर दादियाँ, चलिए उत्तर प्रदेश तक तो आप पहुँच ही जाएंगे लेकिन उसके आगे जोहरी पहुँचने के लिए आपको थोड़ी दिक्कत हो सकती है। आते-जाते ट्रक, कच्ची-पक्की, धूल-मिट्टी से सनी हुई सड़कें और चारों तरफ गन्ने के खेत, और वहाँ किसी से भी पूछेंगे तोमर दादियों का गाव कहाँ है? तो आपको आसानी से कोई भी बता देगा कि जोहरी गाँव, बागपत और बरोट के बीच पड़ता है। उसके बाद वहाँ पहुँच पाना ज़्यादा मुश्किल नहीं होगा।

क्यों जाना जाता है इन्हें रिवाल्वर दादी के नाम से 

क्यों जाना जाता है इन्हें रिवाल्वर दादी के नाम से 

इसमें कोई दो राय नहीं कि चन्द्रो दादी, हमारी पारंपरिक दादियों की तरह ही दिखती हैं। बालों पर सफ़ेद चाँदनी फैली हुई है मतलब बाल सफ़ेद हो चुके हैं और चेहरे पर प्यारी सी मुस्कराहट बिखरी हुई है। लेकिन इनकी उम्र से आप धोखा मत खाइये, आपको बता दें कि यह विश्व की सबसे बूढ़ी महिला Professional Sharpshooter (निशानेबाज़) हैं।

उम्र तो सर्फ एक आंकड़ा है 

उम्र तो सर्फ एक आंकड़ा है 

चंद्रो दादी की उम्र 85 साल है और उम्र तो सिर्फ एक नंबर है। दादी के 6 बच्चे हैं और दर्जनभर से ज़्यादा पोता-पोती। पर इस उम्र में भी दादी अच्छे-अच्छों को पछाड़ देती हैं।

कैसे हुई हुनर की पहचान 

कैसे हुई हुनर की पहचान 

चंद्रो दादी की पोती को निशानेबाज़ी का शौक़ था। लेकिन उनकी पोती थोड़े शर्मीले स्वाभाव की हैं, इसलिए पिस्तौल उठाने में हिचकिचा रही थी। अपनी पोती को प्रोत्साहित करने के लिए, दादी ने खुद निशानेबाज़ी करने की सोची और फिर क्या था, आज तो उनकी निशानेबाज़ी के चर्चे पूरा देश जानता है।

25 से ज़्यादा राष्ट्रीय पुरस्कार

25 से ज़्यादा राष्ट्रीय पुरस्कार

रिवॉल्वर दादी ने 65 साल की उम्र में शूटिंग शुरू की थी और अब तक 25 से ज़्यादा राष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम कर चुकी हैं। आज यह आलम है कि बड़े-बड़े निशानेबाज़ को भी दादी, धूल चटा देती हैं। दादी ने बहुत ही कम समय में बहुत प्रसिद्धि हासिल कर ली है।

दूसरों को भी सिखाती हैं निशानेबाजी 

दूसरों को भी सिखाती हैं निशानेबाजी 

चंद्रो दादी दूसरों के लिए भी एक प्रेरणा स्त्रोत हैं। इन्होंने अपने इस हुनर को दूसरों तक भी पहुँचाया। दादी के गाँव की कई लड़कियों ने, विश्व स्तर पर नाम कमाया है। दादी अब भी ट्रेनिंग देती हैं और ख़ासकर औरतों के लिए दादी एक जीती-जागती मिसाल हैं।

दादी हैं एक मिसाल 

दादी हैं एक मिसाल 

दादी के बारे में थोड़ी बहुत बातें साझा करके मुझे तो यही लगा कि अपना जुनून क़ायम रखने की कोई सीमा नहीं होती। यदि इस उम्र में भी दादी इतनी सक्रिय हैं तो सोचिये, यह उमंग अगर युवा पीढ़ी में दौड़ जाए तो कितना बदलाव आ सकता है। रिवाल्वर दादी को हमारा सलाम। इनके हुनर की हम दाद देते हैं।

यहाँ देख सकते है, रिवाल्वर दादी का वीडियो 

यहाँ देख सकते हैं, रिवाल्वर दादी का वीडियो

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