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मुस्कराहट: ये वो दौलत है जो बाँटने से बढ़ती है

"आँखों में उतरकर पुराने ग़म 

पलकों में कई सपने पीरो गए 

वो बचपन की नींद तो अब ख़्वाब हो गई 

क्या उम्र थी कि रात हुई और सो गए 

वो मुस्कुराहटें जाने कहाँ खो गई 

जबसे सुना है हम बड़े हो गए"

इस मुस्कराहट वाले दिन में यूँ मुरझाई हुई सी बात करने का मेरा कोई इरादा ना था, लेकिन क्या करूँ आदत से मजबूर हूँ, कलम साथ भी दे-दे अगर, तो जज़्बात साथ नहीं देते। 

खाली- पीली senti होने की आदत हो गई है शायद, लेकिन यक़ीन मानिए कोई भी युहीं मुस्कुराहटों से अपना रिश्ता नहीं तोड़ता, ज़िन्दगी की सख़्त राहें मजबूर कर देती हैं, ज़िम्मेदारियाँ उठाने के लिए और फिर क्या, वो बनावटी मुस्कुराहटें तो रहती ही हैं साथ-साथ। चाहे आप खुद किसी को दें या कोई और आपको दे, लेकिन जनाब! मांगी हुई सिगरेट के कश लगाने से भी ज़्यादा सस्ती है झूटी मुस्कुराहटें। 

वैसे ना हर साल न्यू ईयर पर मैं "resolution" नामक एक चिड़िया से दोस्ती करती हूँ लेकिन ये दोस्ती आज तक मैं निभा नहीं पाई क्योंकि "so-called-resolution" कभी पूरा नहीं हुआ। तो इस World Smile Day पर अपने आप से एक deal करके देखती हूँ, उनको मुस्कराहट बाँटने की जिन्हें वाक़ई ज़रूरत है, अगर ये deal पूरी हो गई तो वाह भला और नहीं हुई तो स्वच्छ भारत अभियान तो मोदीजी का भी पूरा नहीं हुआ लेकिन बदलाव तो आया ना।  हा हा हा... 

मुस्कराहट: ये वो दौलत है जो बाँटने से बढ़ती है

मुस्कराहट: ये वो दौलत है जो बाँटने से बढ़ती है

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इन बेज़ुबान को भी उतनी ही ज़रूरत है मुस्कुराहटों की जितनी  की मुझे।

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कुछ देर मुस्कुराकर, बुज़ुर्गों के पहलु में बैठूंगी अब से, सुना है अच्छा लगता है ।

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अबसे मैं सिक्कों के साथ, थोड़ी हँसी मिलाकर दिया करुँगी 

अबसे मैं सिक्कों के साथ, थोड़ी हँसी मिलाकर दिया करुँगी 

किसी को बिना मुस्कराहट के देखकर, अपनी हँसी उधार दे दूंगी, लेकिन दुगने ब्याज पर 

किसी को बिना मुस्कराहट के देखकर, अपनी हँसी उधार दे दूंगी, लेकिन दुगने ब्याज पर 

सड़क के किनारे खेलते वो बच्चे, शायद मेरी हँसी से जी उठेंगे ।

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माँ को तो याद है मेरी पहली हँसी, लेकिन माँ कब खिलखिला के हँसी थी मैं भी याद रखूंगी 

माँ को तो याद है मेरी पहली हँसी, लेकिन माँ कब खिलखिला के हँसी थी मैं भी याद रखूंगी 

अच्छा सुनो तो एक बात आपके लिए...

अच्छा सुनो तो एक बात आपके लिए...

वो जो दो होंठो के बीच दबा के बैठे हो ना,उसपे तुम्हारा हक़ नहीं है सिर्फ। बहुत से लोगों का हिस्सा है उसमें। चलो सबको अपना अपना हिस्सा दे दो फिर मुझे कोई ऐतराज़ नहीं। चाहे तुम दो होंठों से कुछ भी करो, मेरी बला से। अच्छा जाते-जाते एक बात और, चूँकी यह लिखते हुए मैंने सबक हासिल किया तो आपको भी बता देती हूँ। अपनी बात की शुरुआत तो मैंने बड़े सख़्त रवैय्ये से की थी लेकिन चूँकि पूरे लेख में मुस्कुराहट साथ चली, तो अन्त में मुझे भी इसका हाथ थामना पड़ा। तो मतबल ई है कि...हस्ते हस्ते कट जाए रस्ते...ज़िन्दगी युहीं चलती रहे...ला ला ला। 

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