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उत्तराखंड में हुआ अद्भुत चमत्कार, पहाड़ पर पधारे खुद वीर हनुमान

सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू.को डरना। आपन तेज सम्हारो आपै I तीनो लोक हाकते कापें I जय हो वीर हनुमान !

राम-रावण युद्ध का एक ऐसा योद्धा जिसे कभी कोई क्षति नहीं पहुंचा पाया, जिसकी पूंछ से पूरा लंका दहन हो गया, जिसके बल के आगे शनि भी ना टिक पाया, संजीवनी के चक्कर में जो पूरा पहाड़ ही उठा लाये। ऐसे वीर हनुमान को हमारा सादर प्रणाम। भगवान दिल में बसते हैं लेकिन वो अपने होने का सबूत समय-समय देते रहते हैं। बस ज़रूरत है तो उन्हें पहचानने की।

आपने हनुमान जी के बारे में बचपन से लेकर अभी तक काफी कुछ सुना होगा तो आप यह भी जानते होंगे कि वो अमर हैं और उन्हें यह वरदान श्री राम ने मानव-जाति के कल्याण के लिए दिया था। कलयुग में एकमात्र हनुमान ही ऐसे भगवन हैं जो जीवित हैं, जो धरती पर मौजूद हैं। लेकिन फिर सवाल यह उठता है कि अगर वो धरती पर हैं तो कहाँ हैं? हनुमान ने जहाँ भी आजतक विचरण किया है वहाँ पर उनके चरण चिन्ह आज भी देखे जा सकते हैं। और कुछ ऐसे ही निशान उत्तराखंड के एक पहाड़ पर देखे गए हैं। साँस थाम लीजिये क्योंकि वीर हनुमान आपको दर्शन देने आ रहे हैं।

हम किसी भी तरह के अंधविश्वास का समर्थन नहीं करते लेकिन हम उन लाखों लोगों की आस्था से भी खिलवाड़ करने के पक्ष में नहीं हैं।

जिनकी जैसी भावना उनके वैसे विचार, मानो तो भगवान् हैं नहीं मानो तो एक मूरत।

उत्तराखंड में हुआ अद्भुत चमत्कार, पहाड़ पर पधारे खुद वीर हनुमान

उत्तराखंड में हुआ अद्भुत चमत्कार, पहाड़ पर पधारे खुद वीर हनुमान

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बद्रीनाथ धाम से महज 4 किमी. दूर है सतोपंथ, जहाँ यह अद्भुत आकृति देखी गई।

बद्रीनाथ धाम से महज 4 किमी. दूर है सतोपंथ, जहाँ यह अद्भुत आकृति देखी गई।

हनुमान की इस आकृति को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। 

हनुमान की इस आकृति को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। 

आप हनुमान की आकृति इस पहाड़ पर आसानी से देख सकते हैं। 

आप हनुमान की आकृति इस पहाड़ पर आसानी से देख सकते हैं। 

हनुमान जी के सिर पर मुकुट भी विराजमान है। 

हनुमान जी के सिर पर मुकुट भी विराजमान है। 

स्‍थानीय लोगों के अनुसार यह चोटी बर्फ से हर वक़्त ढकी रहती थी, इसलिए इससे पहले इस आकृति को कभी देखा नहीं गया। 

स्‍थानीय लोगों के अनुसार यह चोटी बर्फ से हर वक़्त ढकी रहती थी, इसलिए इससे पहले इस आकृति को कभी देखा नहीं गया। 

पहली बार यह आकृति बद्रीनाथ जाने वाले यात्रियों को दिखाई दी। 

पहली बार यह आकृति बद्रीनाथ जाने वाले यात्रियों को दिखाई दी। 

वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्‍थान के वैज्ञानिकों का दावा है कि ऐसी आकृति जलवायु परिवर्तन के कारण चट्टानों पर बन जाती है। 

वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्‍थान के वैज्ञानिकों का दावा है कि ऐसी आकृति जलवायु परिवर्तन के कारण चट्टानों पर बन जाती है। 

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