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जानें बलात्कार के बारे में क्या कहा फरहान ने अपनी बेटी से?

मिटा सके जो दर्द तेरा, वो शब्द कहाँ से लाऊँ

चुका सकूं एहसान तेरा, वो प्राण कहाँ से लाऊँ

खेद हुआ है आज मुझे, लेख से क्या होने वाला

लिख सकूं मैं भाग्य तेरा, वो हाथ कहाँ से लाऊँ

देख कर हाल यह तेरा, छलनी हुआ कलेजा मेरा

रोक सके जो अश्क मेरे वो नैन कहाँ से लाऊँ

ख़ामोशी इतनी है क्यों, क्या गूंगे बहरे हो गए सारे

सुना सकूं जो हालत तेरी वो जुबाँ कहाँ से लाऊँ

                                                                        - संकलित 

हिंदुस्तान टाइम्स ने एक अनोखा तरीका निकाला है। भारत के जाने-माने आठ कलाकारों को न्यौता दिया खुले मंच पर बलात्कार पर चर्चा करने का। जिसकी पहली कड़ी में फरहान अख्तर ने अपनी बेटी के नाम एक प्यारा सा ख़त लिखा है।

जानें बलात्कार के बारे में क्या कहा फरहान ने अपनी बेटी से?

जानें बलात्कार के बारे में क्या कहा फरहान ने अपनी बेटी से?

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  in Celebrities

मेरी प्यारी बेटी

मेरी प्यारी बेटी

प्यारी बेटी,

कैसे मैं आपसे यौन हिंसा और बलात्कार के बारे में बात करूँ? मेरी प्रवृत्ति भी हर पिता की प्रवृत्ति की तरह रक्षा और अपने परिवार का ख्याल रखने की है, लेकिन यह एक मुद्दा है कि हमें इसका सामना और इस पर चर्चा करना चाहिए। मैंने यह कविता 2013 में लिखी थी जब हमारी टीम के एक वकील की बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। उस वक्त आप भी बड़े हो रहे थे। मैं चाहता था उस वक्त आप निर्भीक हो कर मुस्कुराओ और आपने वह किया भी था।

हत्या और बलात्कार दो ऐसे काले विषय हैं जिन्होंने मुझे ऊपर लाने का प्रयास किया।

मैं जानता हूँ तुम उड़ना चाहती हो  

मैं जानता हूँ तुम उड़ना चाहती हो  

आपके फेसबुक पोस्ट के ज़रिये में जान गया हूँ आप अपने पंख फैला कर पूरी दुनिया में उड़ान भरना चाहती हो। मैं यह भी जानता हूँ आप अभी नाराज़ और परेशान भी हो। आपके मन में भी यह बातें हैं जैसे मैं जो कपड़े पहनना चाहती हूँ वह कपड़े क्यों नहीं पहन सकती? मैं अपनी एक अलग पहचान क्यों नहीं बना सकती? मैं एक दम आज़ाद क्यों नहीं हो सकती जिसे असल मायने में आज़ाद कहा जाता है। 

अगर आप अपने बाल नीले भी करवाना चाहती हो तो करवा सकती हो

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हाँ फिर भी बॉलीवुड में एक पिता के रूप में मेरा सिर रेत में है, क्योंकि वहाँ हमारे आसपास वास्तविकता का घेरा है। हम एक असुरक्षित, काफी हद तक असमान दुनिया में रहते हैं। हमने कभी नहीं बताया क्या पहन के बाहर जाना है। अगर आप अपने बाल नीले भी करवाना चाहती हो तो भी हमें कोई आपत्ति नहीं है। आप एक स्वतंत्र, निर्भीक और स्वावलम्बी औरत बनने के लिए आगे बढ़ रही हो। आपने मुझसे अक्सर सवाल किया है कि महिलाओं को फिल्मों में क्यों एक वस्तु के रूप में चित्रित किया जाता है और मैं अक्सर आपके सवालों के जवाब देने की कोशिश करता हूँ। मुझे ख़ुशी है हम महिलाओं और लैंगिक जैसे मुद्दों पर भी चर्चा करते हैं। और अपने इन्हीं ज़ज्बातों को उन्होंने कविता से समझाया। 

मैंने तुम्हें देखा है छोटी गुडिया 

मैंने तुम्हें देखा है छोटी गुडिया 

मैंने तुम्हें देखा है छोटी गुड़िया,

तुम्हारी आँखों में आँसू,

अपने शरीर पर चोट के निशान,

अपनी जांघों पर खून,

मैंने तुम्हें सुना है छोटी गुड़िया

मैंने तुम्हें सुना है छोटी गुड़िया

मैंने तुम्हें सुना है छोटी गुडिया 

तुम्हें फूट-फूट के रोते हुए,

तुम्हें खामोश विरोध करते हुए,

तुम्हारी आह को गूंजते हुए,

मैंने तुम्हें महसूस किया है छोटी गुडिया 

मैंने तुम्हें महसूस किया है छोटी गुडिया 

मैंने तुम्हें महसूस किया है छोटी गुड़िया 

बड़े होने पर तुम्हारा दर्द

खंडहर में आदमी का अपने पर भरोसा

तुम्हारे बचपन को मरता हुआ

मैं तुम्हें समझता हूँ छोटी गुड़िया 

मैं तुम्हें समझता हूँ छोटी गुड़िया 

मैं तुम्हें समझता हूँ छोटी गुड़िया

तुम्हारे गुस्से तुम्हारे आश्चर्य को

जानवर के बारे में अपने भ्रम की स्थिति को

जो इंसानों की शक्ल में हमारे साथ रहते हैं

मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ छोटी गुड़िया 

मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ छोटी गुड़िया 

मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ छोटी गुड़िया 

मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ।

दरअसल बाप का किरदार इस दुनिया का सबसे मुश्किल किरदार होता है। एक ऐसा किरदार जो खुल कर न अपनी ख़ुशी दिखा सकता है, न अपने आँसू। फिर भी वह इस रंग-मंच की दुनिया का सबसे अहम किरदार होता है। ऐसे में फरहान अख्तर का यह ख़त एक नई क्रांति की शुरुआत है तो क्यों न इस क्रांति का हिस्सा बनें। 

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