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अहिंसा के पुजारी गांधी जी के इस प्रस्ताव को ठुकराया था तानाशाह हिटलर ने

हिटलर और गांधी दोनों ही अपने-अपने क्षेत्र के भगवान हैं। जहाँ अहिंसा वाले गांधी को महात्मा कहते हैं तो वहीं हिंसा वाले हिटलर को दुनिया का सरताज़ कहते हैं। हालाँकि इन दोनों का कभी सामना तो नहीं हुआ मगर इतिहास की काली कोठरी में 'Mahatma Gandhi' द्वारा 'Hitler' को लिखा एक ख़त जरुर मिलता है।

द्वितीय विश्व युद्ध दुनिया के इतिहास में ऐसी घटना है जिसे आज भी लोग बुरे सपने के तौर पर भूल जाना चाहते हैं। इस विश्व युद्ध में भारत के हजारों सैनिक शहीद हो गये थे। इस विश्व युद्ध के शुरु होने से पहले महात्मा गांधी ने हिटलर को एक पत्र लिखा था जिसे अगर हिटलर ने पढ़ा होता तो यकीनन दुनिया की तस्वीर आज अलग होती।

अहिंसा के पुजारी गांधी जी के इस प्रस्ताव को ठुकराया था तानाशाह हिटलर ने

अहिंसा के पुजारी गांधी जी के इस प्रस्ताव को ठुकराया था तानाशाह हिटलर ने

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  in History & Culture

1939 में लिखा था ख़त 

1939 में लिखा था ख़त 

महात्मा गांधी ने वर्ष 1939 में जर्मनी के नाज़ी तानाशाह एडोल्फ हिटलर को पत्र लिखा था। हालांकि ये पत्र हिटलर ने पढ़ा ही नहीं था। 23 जुलाई, 1939 को लिखे इस पत्र में महात्मा गांधी ने हिटलर से युद्ध टालने की अपील की थी। उन्होंने लिखा था कि...

दोस्तों के कहने पर लिखा था गांधी जी ने हिटलर को ख़त 

दोस्तों के कहने पर लिखा था गांधी जी ने हिटलर को ख़त 

प्रिय दोस्त,

मेरे मित्र मुझसे गुजारिश करते रहे हैं कि मैं मानवता के वास्ते आपको ख़त लिखूं। लेकिन मैं उनके अनुरोध को टालता रहा हूं क्योंकि मुझे लगता है कि मेरी ओर से कोई पत्र भेजना गुस्ताखी होगी।

काफी संकोच के बाद लिखा था ख़त 

काफी संकोच के बाद लिखा था ख़त 

हालांकि कुछ ऐसा है जिसकी वजह से मुझे लगता है कि मुझे हिसाब-किताब नहीं करना चाहिए और आपसे यह अपील करनी चाहिए। चाहे इसका जो भी महत्व हो।

हिटलर से की थी विनती 

हिटलर से की थी विनती 

ये बिल्कुल साफ़ है कि इस वक़्त दुनिया में आप ही एक शख्स हैं जो उस युद्ध को रोक सकते हैं जो मानवता को बर्बर स्थिति में पहुंचा सकता है। चाहे वो लक्ष्य आपको कितना भी मूल्यवान प्रतीत हो, क्या आप उसके लिए ये कीमत चुकाना चाहेंगे?

अंत में मांगी हिटलर से माफी 

अंत में मांगी हिटलर से माफी 

क्या आप एक ऐसे शख्स की अपील पर ध्यान देना चाहेंगे जिसने किसी उल्लेखनीय सफलता के बावजूद जगजाहिर तौर पर युद्ध के तरीके को खारिज किया है? बहरहाल, अगर मैंने आपको ख़त लिखकर गुस्ताखी की है तो मैं आपसे क्षमा की अपेक्षा करता हूं.

आपका दोस्त

एमके गांधी

इस पत्र के ठीक एक महीने पहले

इस पत्र के ठीक एक महीने पहले

महात्मा गांधी ने अपने पत्र में हिटलर को मानवता की दुहाई देते हुए इस युद्ध को रोक देने की अपील की थी। इस पत्र को गांधीजी ने अपने मित्रों और बेहद करीबियों के कहने पर लिखा था। लेकिन अफसोस की बात यह है कि इस पत्र के ठीक एक महीने बाद जर्मनी ने पोलैंड पर धावा बोल दिया था।

द्वितीय विश्व युद्ध मानव इतिहास का सबसे खूनी संघर्ष था 

द्वितीय विश्व युद्ध मानव इतिहास का सबसे खूनी संघर्ष था 

द्वितीय विश्व युद्ध में 10 करोड़ से ज्यादा सैन्य कर्मी शामिल थे, इस वजह से ये इतिहास का सबसे व्यापक युद्ध माना जाता है।"पूर्ण युद्ध" की अवस्था में, प्रमुख सहभागियों ने नागरिक और सैन्य संसाधनों के बीच के अंतर को मिटा कर युद्ध प्रयास की सेवा में अपनी पूरी औद्योगिक, आर्थिक और वैज्ञानिक क्षमताओं को झोंक दिया। इसमें सात करोड़ से अधिक लोग मारे गए थे, जिनमें से अधिकांश साधारण नागरिक थे, इसलिए इसको मानव इतिहास का सबसे खूनी संघर्ष माना जाता है।

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