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सिगरेट बंद! केंद्र सरकार का कड़ा फैसला

सिगरेट एक ऐसा अविष्कार जिसका धुआं या तो चखा जाता है या फिर उसे सांसो में मिला लिया जाता है। अगर इतिहास की बात करूँ तो इसका चलन 5000-3000 ई.पू.के प्रारम्भिक दौर में शुरू हुआ था। पुरानी दुनिया में तम्बाकू 1500 के दशक के आखरी दौर में प्रचलित हुआ जहां इसका व्यापर किया जाता था और काफी मुनाफा कमाया जाता था। हालांकि यह पदार्थ अक्सर आलोचना का शिकार बनता रहा है, लेकिन इसके बावज़ूद यह लोकप्रिय भी काफी हुआ। जर्मन वैज्ञानिकों ने औपचारिक रूप से 1920 के दशक के अन्त में धूम्रपान और फेफड़े के कैंसर के बीच के संबंधों की पहचान की। इसके बाद तो तम्बाकू की हालत किसी तवायफ की तरह करदी गई जिसकी बुराई भी की जाती और चुपके-चुपके इसे अपनाया भी जाता।

मगर आज फिर केंद्र सरकार के एक फैसले ने इस मामले को हवा दे दी है। क्या इस बार सच में बंद हो जाएगी सिगरेट।

सिगरेट बंद! केंद्र सरकार का कड़ा फैसला

सिगरेट बंद! केंद्र सरकार का कड़ा फैसला

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हर साल 60 लाख लोग मर रहे हैं सिगरेट से 

हर साल 60 लाख लोग मर रहे हैं सिगरेट से 

धूम्रपान की वजह से हर साल लगभग 60 लाख लोग मारे जा रहे हैं। इनमें से अधिकतर मौतें कम तथा मध्यम आय वाले देशों में हो रही हैं। WHO ने पनामा में एक सम्मेलन में अपनी रिपोर्ट में बताया है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो वर्ष 2030 में प्रति वर्ष धूम्रपान की वजह से मारे जाने लोगों की संख्या बढ़कर 80 लाख हो जाएगी।

इस चिंता के मद्देनजर सरकार ने लिया अहम् फैसला 

इस चिंता के मद्देनजर सरकार ने लिया अहम् फैसला 

इस समस्या से परेशान सरकार ने सिगरेट उत्पादक कंपनियों को सिगरेट के पैकेट पर 85% स्वास्थ्य सम्बंधित जानकारी उपलब्ध कराने को कहा था।    

सिगरेट कंपनियों ने इससे इंकार कर दिया 

सिगरेट कंपनियों ने इससे इंकार कर दिया 

केंद्र का यह फैसला लगता है सिगरेट उत्पादक कंपनियों को रास नहीं आया। भारतीय तंबाकू संस्थान ने अपने बयान में कहा कि "तम्बाकू उत्पाद पैक पर ग्राफिक स्वास्थ्य चेतावनी के संशोधन से संबंधित नीति पर अस्पष्टता के कारण कंपनियां 1 अप्रैल से सिगरेट उत्पादन में असमर्थ है।"

लिया कंपनी बंद करने का निर्णय 

लिया कंपनी बंद करने का निर्णय 

स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी के खिलाफ देश की तंबाकू कंपनियों ने अपने कारखानों को बंद करने का फैसला किया है। केंद्र के इस फैसले के खिलाफ तंबाकू कंपनियों ने सिगरेट का उत्पादन अब रोक दिया है।

रोजाना 350 करोड़ का नुकसान हो रहा है सिगरेट कंपनियों को  

रोजाना 350 करोड़ का नुकसान हो रहा है सिगरेट कंपनियों को  

सिगरेट उत्पादकों का कहना है कि केंद्र सरकार से हमे रोजाना 350 करोड़ का नुकसान हो रहा है। मगर इस 350 करोड़ रूपए के बदले लाखों करोड़ो लोगों को जिन्दगी बच सकती है तो यह सौदा घाटे का नहीं है।

इस पोस्ट में अपने उन सभी दोस्तों को टैग करें जिन्हें सिगरेट पीने की लत लग चुकी है। ताकि वह समय पर सिगरेट के बिना रहना शुरू कर दें। अब यार दोस्त ही दोस्त की मदद नहीं करेगा तो कौन करेगा।       

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