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क्रांतिकारी भगत सिंह के जन्मदिन पर जानें उनके जीवन से जुड़ी 8 रोचक जानकारियां 

भारत देश को शूरवीरों की भूमि कहा जाता है। उन शूरवीरों में से एक नाम है भगत सिंह। भगत सिंह का भारत देश की आजादी में अहम योगदान रहा है। अगर उन्होनें अंग्रेजों के खिलाफ आवाज न उठाई होती तो आज भी हम किसी अंग्रेज के गुलाम होते। पर हम इनके अहम योगदान को भूलते जा रहे हैं, जो हम सब के लिए काफी शर्मनाक बात है। जिन लोगों ने हमारी आज़ादी के लिए अपनी जान न्यौछावर कर दी हम उन्हीं को भूलते जा रहे हैं। 

आज आपको भगत सिंह के बारे में कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं जो शायद ही आपको मालूम हो। मैं इस बात को दावे के साथ बोल सकता हूँ कि आज की युवा पीढ़ी को तो 100 प्रतिशत इन बातों के बारे में नही पता होगा। 

क्रांतिकारी भगत सिंह के जन्मदिन पर जानें उनके जीवन से जुड़ी 8 रोचक जानकारियां 

क्रांतिकारी भगत सिंह के जन्मदिन पर जानें उनके जीवन से जुड़ी 8 रोचक जानकारियां 

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  in History & Culture

कब और कहाँ हुआ था जन्म?

कब और कहाँ हुआ था जन्म?

भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को लायलपुर जिले के बंगा गाँव में हुआ था, यह गाँव अब पाकिस्तान में है। उस समय उनके चाचा अजीत सिंह और शवान सिंह भारत की आजादी में सहयोग दे रहे थे। भगत सिंह पर अपने चाचा का काफी प्रभाव पड़ा जिस कारण वो शुरू से ही अंग्रेजों से नफरत करने लगे थे। 

छोटी उम्र में बड़े काम 

छोटी उम्र में बड़े काम 

भगत सिंह करतार सिंह सराभा और लाला लाजपत राय से काफी प्रभावित थे। 13 अप्रैल 1919 के दिन जलियांवाला बाग़ हत्याकांड ने उनके मन पर गहरा असर डाला। उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर 1920 में महात्मा गाँधी द्वारा चलाए जा रहे अहिंसा आंदोलन में भाग लिया। 

14 वर्ष की छोटी उम्र में उन्होनें स्कूल के कपड़े और किताबें जला दीं थी। जिसके बाद उनके पोस्टर गाँव में छपने लगे।

स्वतंत्रता संग्राम में भागेदारी की शुरुआत 

स्वतंत्रता संग्राम में भागेदारी की शुरुआत 

भगत सिंह पहले महात्मा गांधी द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन में शामिल थे। 1921 में जब चौरा-चौरा हत्याकांड के बाद गाँधी जी ने किसानों का साथ नहीं दिया तो भगत सिंह चन्द्रशेखर के द्वारा गठित गदर दल के हिस्सा बन गए और चन्द्रशेखर के साथ मिलकर आंदोलन शुरू कर दिया। 9 अगस्त 1925 के दिन शाजहांपुर से लखनऊ के लिए चली डाउन पैसेंजर से काकोरी नाम के स्टेशन के पास सरकारी ख़ज़ाने को लूट लिया। इसलिए ये घटना काकोरी के नाम से प्रसिद्ध है। 

क्या-क्या पसन्द था भगत सिंह को?

क्या-क्या पसन्द था भगत सिंह को?

भगत सिंह को फ़िल्में देखना और रसगुल्ले खाना काफी पसन्द था। उन्हें जब भी मौका मिलता था वे यशपाल और राजगुरु के साथ फिल्म देखने चले जाते थे। इस बात पर चन्द्रशेखर काफी गुस्सा होते थे। 

अंग्रेज अफसर को मारा 

अंग्रेज अफसर को मारा 

भगत सिंह और राजगुरु नें मिलकर 17 दिसम्बर 1928 को लाहौर में पुलिस अधीक्षक रहे अंग्रेज अफसर जेपी सांडर्स को मारा था इसमें चन्द्रशेखर ने उनका पूरा साथ दिया। क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर अलीपुर रोड, दिल्ली स्थित ब्रिटिश भारत की तत्कालीन सेंट्रल असेंबली के सभागार में 8 अप्रैल 1929 को अंग्रेज सरकार को जगाने के लिए बम और पर्चे फेंके थे। 

क्रांतिकारी होने के साथ और क्या-क्या गुण थे?

क्रांतिकारी होने के साथ और क्या-क्या गुण थे?

भगत सिंह एक क्रांतिकारी तो थे ही परंतु उसके साथ-साथ लेखक, पत्रकार, दार्शनिक और महान मनुष्य थे। उन्होनें 23 वर्ष की छोटी सी उम्र में फ्रांस, रूस और आयरलैंड की क्रांति का पूरा अध्ययन किया था। हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी, बंगाली भाषा के चिंतक और भगत सिंह भारत में समाजवाद के पहले व्याख्याता थे।

जेल वाला समय

जेल वाला समय

भगत सिंह 2 साल तक जेल में रहे जिसके चलते उन्होनें क्रांतिकारी लेख लिखकर अपने विचार व्यक्त किये। जेल में भी उन्होंने अध्ययन नही छोड़ा। उनके द्वारा लिखे गए अपने परिवार को पत्र आज भी उनकी सोच को जाहिर करते हैं। अपने पत्र में उन्होंने कई पूंजीपतियों को अपना दुश्मन बताया है। उन्होनें पत्र में लिखा कि जो भी भारतीय किसी एक मजदूर का भी अगर शोषण करता है तो वो उनका दुश्मन है। जेल में भगत सिंह और उनके साथियों ने मिलकर 64 दिनों तक भूख हड़ताल की। जिसमे उनके एक साथी यतीन्द्रनाथ के प्राण भी चले गए थे। 

फांसी वाला दिन 

फांसी वाला दिन 

23 मार्च 1931 को भगत सिंह और उनके 2 साथियों राजगुरु और सुखदेव को फांसी दे दी गयी। फांसी पर चढ़ने से पहले वे "बिस्मिल" की जीवनी पढ़ रहे थे जो सिंध के प्रकाशक भजनलाल बुकसेलर नें आर्ट प्रेस से छापी थी।

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