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वो जाते-जाते भी रुला ही गया...

मेरे सोने की भी कोई कीमत चुका रहा है, सरहद पर जवान मेरी नींद के लिए भी ख़ून बहा रहा है।
~ एक हिंदुस्तानी लेखक

गुमनाम है वो शख्स जो देश के लिए मर मिट गए, देश विरोधी नारे लगाने वाले चेहरे आजकल नेता बन गए।

हमारे आँसू भी झूठे हैं। झूठी है हमारी कोरी शान। उनका रक्त भी असली है और असली है उनकी जान। मैं आज काफी भावुक हूँ। लिखते वक़्त भी यही सोच रहा था कि मैं क्या लिखूँ? और क्यों लिखूँ? रोज़ मेरे देश के वीर जवान वीरगति को प्राप्त हो रहे हैं। रोज़ मेरी अंतर्रात्मा मुझसे चीख-चीख कर कह रही है "क्यों?" रोज़ एक माँ अपने बेटे को खो रही है।

लाखों माँ हर रोज़ यह सवाल ज़माने से पूछती है कि मेरा बेटा कहाँ है? मेरा बेटा कैसा है? लेकिन कभी कोई उनके इस सवाल का जवाब नहीं दे पता। एक बार अपने दिल पर हाथ रखकर सोचिये, क्या आप इन सवालों के जवाब दे सकते है? क्या आप उन माताओं का दुःख समझ सकते हैं? क्या आप?

मेरी पीड़ा भी कुछ ऐसी ही है। लेकिन आज मैं इन सवालों के जवाब देने की कोशिश कर रहा हूँ। मेरा मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का नहीं है। आज मैं "मैं" नहीं हूँ। आज मैं उन सब माताओं का बेटा बनने का प्रयास कर रहा हूँ जिनके वीर सपूत इस देश के लिए मर-मिट गए। मेरी तुलना कतई उन वीर जवानों से मत करना मैं उनके चरणों की धूल भी नहीं हूँ। लेकिन आज मेरी अंतर्रात्मा कुछ बोलना चाह रही है और मैं उसे आज बोलने की पूरी अनुमति दे रहा हूँ। शायद मेरे जवाब उन माताओं को दिलासा दे सकें। शायद मेरे जवाब उनका दुःख थोड़ा कम कर सकें।

कितने अनमोल होते हैं ये अपनों के रिश्ते, कोई मर भी जाये तो भी इंतज़ार रहता है। मैंने जीवन मैं कभी कुछ अनमोल चीज़ तो नहीं खोई लेकिन इंसान हूँ, इसलिए इंसान का दर्द ज़रूर समझता हूँ। जब मैं छोटा बच्चा था। मुझे मेरे खिलौनों से बहुत लगाव था और एक बार मेरे भाई से मेरा एक खिलौना टूट गया। मैं बहुत दिनों तक रोता रहा, मुझे मेरे पिताजी ने उससे अच्छा खिलौना लाकर दिया। लेकिन मैं फिर भी चुप नहीं हुआ।

कुछ चीज़ों की जगह ज़िन्दगी में कभी कोई नहीं ले सकता। कुछ दुःख मरते दम तक साथ रहते हैं। एक ऐसा ही दुःख है अपने जवान बेटे को खोना, जो एक माँ से बढ़कर कोई नहीं समझ सकता। मैं किसी की जगह नहीं ले रहा नाही मैं उस लायक हूँ बस मैं अपनी बात रख रहा हूँ। उदास हूँ अपने दिल आवाज़ सुना रहा हूँ। 

यहाँ सब कुछ है माँ, बस तेरा साथ नहीं

ज़िंदा यहाँ भी हूँ माँ, बस अब वो बात नहीं

रोज़ लिखता हूँ खत तुझे कि शायद यह बता सकूँ

हँसता तो हूँ माँ लेकिन अब वो बात नहीं

क्या बताऊँ माँ कहाँ हूँ मैं? क्या बताऊँ माँ कहाँ हूँ मैं?

रिमझिम बारिश में रोज़ भीगता हूँ माँ, लेकिन सिर पोंछने वाला अब कोई हाथ नहीं

मखमल के बिस्तर में सोता हूँ यहाँ लेकिन तेरे गोद में दुबक के सोने वाली वो बात नहीं

भूख तो बहुत लगती है, पर अपने हाथों से खाना खिलाने वाली वो माँ नहीं

समझदार हो गया हूँ बहुत, मेरी बचकानी हरकत पर हँसने वाली वो माँ नहीं

क्या बताऊँ माँ कहाँ हूँ मैं? क्या बताऊँ माँ कहाँ हूँ मैं?

राह मत देखना मेरी, मैं लौट कर नहीं आऊंगा

रोना मत तू माँ, मैं तुझे रोते ना देख पाउँगा 

राह बहुत मुश्किल है माँ, पर आसान काम करना मेरी रगों में नहीं

यह जन्म दे दिया है मातृभूमि को, तेरा एहसान चुकाने फिर कभी आ जाऊंगा 

दूर ज़रूर जा रहा हूँ माँ लेकिन तुझे कभी ना भूल पाऊंगा 

क्या बताऊँ माँ कहाँ हूँ मैं? क्या बताऊँ माँ कहाँ हूँ मैं?

वक़्त कम है माँ, ज्यादा कुछ नहीं कह पाउँगा  

डट कर लड़ा दुश्मन से, गर्व से बस यही कह पाउँगा 

देश के लिए जिया, देश के लिए मर-मिटा इसका जश्न मैं हर रोज़ मनाऊंगा

एक गज़ ज़मीन भी नहीं जाने दी, भारत माता के आँचल पर मैंने कोई आंच ना आने दी

बहुत दिनों से सोया नहीं हूँ माँ, अब तिरंगे पर लिपट कर ही सोऊंगा 

क्या बताऊँ माँ कहाँ हूँ मैं? क्या बताऊँ माँ कहाँ हूँ मैं?

फिर जन्म लूंगा इस पावन धरती पर, यह वादा है माँ

फिर तिरंगे पर लिपट कर आऊंगा, यह इरादा है माँ

एक हिंदुस्तानी हूँ, एक हिंदुस्तानी होने का फ़र्ज़ हर जन्म में निभाउंगा 

तिरंगे की शान के खातिर फिर से शहीद हो जाऊंगा 

मैं जहाँ भी रहूँ, तुझे कभी ना भूल पाउँगा 

मौका मिला तो लौट कर ज़रूर वापस आऊंगा

क्या बताऊँ माँ कहाँ हूँ मैं? क्या बताऊँ माँ कहाँ हूँ मैं?

वो जाते-जाते भी रुला ही गया...

वो जाते-जाते भी रुला ही गया...

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यहाँ सब कुछ है माँ, बस तेरा साथ नहीं

यहाँ सब कुछ है माँ, बस तेरा साथ नहीं

हँसता तो हूँ माँ लेकिन अब वो बात नहीं

हँसता तो हूँ माँ लेकिन अब वो बात नहीं

रिमझिम बारिश में रोज़ भीगता हूँ माँ, लेकिन सिर पोंछने वाला अब कोई हाथ नही

रिमझिम बारिश में रोज़ भीगता हूँ माँ, लेकिन सिर पोंछने वाला अब कोई हाथ नही

भूख तो बहुत लगती है, पर अपने हाथों से खाना खिलाने वाली वो माँ नहीं 

भूख तो बहुत लगती है, पर अपने हाथों से खाना खिलाने वाली वो माँ नहीं 

यह जन्म दे दिया है मातृभूमि को, तेरा एहसान चुकाने फिर कभी आ जाऊंगा

यह जन्म दे दिया है मातृभूमि को, तेरा एहसान चुकाने फिर कभी आ जाऊंगा

फिर तिरंगे पर लिपट कर आऊंगा यह इरादा है माँ

फिर तिरंगे पर लिपट कर आऊंगा यह इरादा है माँ

मौका मिला तो लौट कर ज़रूर वापस आऊंगा माँ

मौका मिला तो लौट कर ज़रूर वापस आऊंगा माँ

उरी में शहीद हुए जवानों को हम नमन करते हैं। हमारी संवेदनाएं शोकसंतप्त परिवारों के साथ हैं। जय हिन्द।

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