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आखिर क्यों हिन्दू धर्म में ब्रह्माजी की आराधना नहीं की जाती?

हिन्दू धर्म में ब्रह्मा, विष्णु, महेश या कहें कि त्रिदेव ही इस पूरी सृष्टि के कर्ता-धर्ता माने जाते हैं। इन तीनों देवताओं को सबसे पूजनीय माना जाता है। इनमें से ब्रह्माजी तो इस सृष्टि के रचयिता भी माने जाते हैं। पर क्या आपने कभी गौर किया है कि सभी हिन्दू भाई बंधू शिवजी और विष्णु जी की पूजा तो बड़ी श्रद्धा से करते हैं पर कभी इस सृष्टि के रचयिता ब्रह्माजी की आराधना नही करते।

क्या आपने कभी इसकी वजह जानने की कोशिश की है? तो चलिए आज हम ही आपको बता देते हैं कि आखिर हिन्दू धर्म में ब्रह्माजी की पूजा क्यों नही की जाती है। 

आखिर क्यों हिन्दू धर्म में ब्रह्माजी की आराधना नहीं की जाती?

आखिर क्यों हिन्दू धर्म में ब्रह्माजी की आराधना नहीं की जाती?

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विष्णुजी ब्रह्माजी में हो गई बहस

विष्णुजी ब्रह्माजी में हो गई बहस

इस सम्बन्ध में दो कथाएं या कहें कि सिद्धान्त प्रचलित हैं। पहली कथा यह है कि एक बार विष्णुजी और ब्रह्माजी में इस  बात को लेकर बहस हो गई कि उन दोनों में श्रेष्ठ कौन है। किसी निष्कर्ष पर न पहुँच सकने की स्थिति में उन्होनें शिवजी से अनुरोध किया कि अब वो ही इस बात का फैसला करें। 

शिवजी ने ली उनकी परीक्षा

शिवजी ने ली उनकी परीक्षा

उनकी परीक्षा लेने के लिए भगवान शंकर ने शिवलिंग का रूप धारण कर लिया और उन दोनों से कहा कि इस शिवलिंग का अंत ढूंढें। जो ऐसा पहले कर देगा वह विजेता होगा। बहुत समय बीत गया पर वो दोनों शिवलिंग का अंत नही ढूंढ पाये। अंत में विष्णु जी समझ गए कि त्रिदेव में भगवान शंकर ही श्रेष्ठ हैं।

ब्रह्माजी ने चली चाल

ब्रह्माजी ने चली चाल

ब्रह्माजी ने अब भी हार नही मानी और एक चाल चलने की सोची। उन्होंने केतकी के फूल को शिवलिंग पर चढ़ाते हुए कहा कि वह शिवजी से कह दे कि ब्रह्माजी को शिवलिंग का अंत मिल गया है। केतकी के फूल ने भी ऐसा ही किया।

क्रोधित शिव ने दिया श्राप

क्रोधित शिव ने दिया श्राप

शिवजी अच्छी तरह जानते थे कि केतकी के फूल ने असत्य बात कही है। वे क्रोधित हो गए और उन्होनें ब्रह्माजी को श्राप दिया कि कोई भी इंसान उनकी पूजा नही करेगा। साथ ही केतकी के फूल को भी श्राप दिया कि उसका उपयोग किसी भी तरह के धार्मिक कार्य में नही किया जाएगा।

ब्रह्मा हुए सरस्वती पर मोहित

ब्रह्मा हुए सरस्वती पर मोहित

इस सम्बन्ध में दूसरी कथा यह है कि ब्रह्माजी के प्रकट होने के बाद उन्होंने सरस्वतीजी का सृजन किया। वे सरस्वतीजी की ख़ूबसूरती की ओर आकर्षित हो गए।

सरस्वतीजी हो गईं नाराज़ 

सरस्वतीजी हो गईं नाराज़ 

सरस्वतीजी ब्रह्माजी की इस तरह की किसी भी काम इच्छा से नही जुड़ना चाहती थी। इसलिए उन्होंने अपना रूप बदल लिया। ब्रह्माजी फिर भी नही माने तो क्रोधित होकर उन्होंने ब्रह्माजी को श्राप दे दिया कि कोई भी इंसान उनकी आराधना नही करेगा।

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