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पत्नी की लाश को कंधे पर उठाने वाले मांझी बने लखपति

24 अगस्त को इंसानियत के लिए काला दिन था, जिस दिन ओडिशा के दाना मांझी की पत्नी अमांग की टी.बी. की बीमारी के चलते भवानीपटना के एक अस्पताल में मौत हो गई थी, अस्पताल ने उन्हें एम्बुलेंस मुहैया करने से इंकार कर दिया था। 

पत्नी की लाश को कंधे पर उठाने वाले मांझी बने लखपति

पत्नी की लाश को कंधे पर उठाने वाले मांझी बने लखपति

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कंधे पर पत्नी की लाश उठाने को मजबूर हुए थे।

कंधे पर पत्नी की लाश उठाने को मजबूर हुए थे।

कोई साधन ना मिलने के कारण मांझी को पत्नी की लाश को अपने कंधे पर उठाकर 12 किलोमीटर तक पैदल चलते हुए अपने गाँव तक ले जाना पड़ा था, साथ में उनकी बड़ी बेटी भी थी जो फोटो में रोते हुए दिखाई दे रही है।

लोग तमाशा देखते रहे।

लोग तमाशा देखते रहे।

जब वो लाश को ले जा रहा था तोह लोग बूत बने तमाशा देख रहे थे कोई भी उसकी सहायता करने आगे नहीं आया।

इंटरनेशनल मीडिया में छाई थी खबर।

इंटरनेशनल मीडिया में छाई थी खबर।

इस घटना की जानकारी सिर्फ भारत ही नहीं पूरी दुनिया की मीडिया में ये खबर छा गई थी, ये देखकर लोगो का दिल पसीज गया था, बहरीन के प्रधानमंत्री के साथ कई लोगो ने उनकी आर्थिक मदद के लिए पेशकश की थी।

सबसे बड़ी सहायता राशि आई बहरीन के प्रधानमंत्री की और से।

सबसे बड़ी सहायता राशि आई बहरीन के प्रधानमंत्री की और से।

वैसे तो कई लोगो ने, संस्थाओ ने और सरकार ने मांझी की आर्थिक मदद की है, लेकिन सबसे बड़ी सहायता राशि बहरीन के प्रधानमंत्री खलीफा बिन सलमान अल खलीफा ने दी। इन्होने मांझी को 8.77 लाख का चेक दिया है।

सहायता का चेक लेने प्लेन से गए थे दिल्ली।

सहायता का चेक लेने प्लेन से गए थे दिल्ली।

कभी घंटो तक पत्नी की लाश का बोझ ढोते हुए गाँव जाने वाले मांझी ने सपने में भी नहीं सोचा था की कभी वो हवाई जहाज का सफ़र करेंगे परन्तु वो बहरीन दूतावास से चेक लेने के लिए दिल्ली प्लेन से पहुंचे थे।

बेटियों की भी किस्मत बदली।

बेटियों की भी किस्मत बदली।

दाना मांझी की तीन बेटियां है, तीनो बेटियों की पढाई भुवनेश्वर के रेजिडेंशियल कलिंग इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंस में होगी। सुलभ इंटरनेशनल दाना मांझी की बड़ी बेटी को 10000 रुपये महिना देगी जब तक की उसकी शादी ना हो जाए या रोजगार नहीं मिलता साथ ही सुलभ ने दाना मांझी के लिए 5 लाख का फिक्स डिपाजिट भी कराया है।

सरकार ने भी की मदद।

सरकार ने भी की मदद।

मांझी को जिला प्रशासन ने भी 30000 रूपए और एक बोरी चावल दिए है। राज्य सरकार ने इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत 75000 के साथ ही 4 डिसमिल जमीन भी दी गई है।

ये थी मांझी की पत्नी अमांग।

ये थी मांझी की पत्नी अमांग।

इस तस्वीर में जो महिला दिखाई दे रही है ये थी मांझी की पत्नी अमांग।
अब ये तो नहीं रही इस दुनिया में लेकिन शायद इनके कारण गाँव को कोई सौगात मिल जाए क्योंकि इनके गाँव 'मेलघरा रामपुर' में आज भी मुलभुत सुविधाओ की कमी है। यहाँ के किसान आज भी गरीबी में जी रहे है, हो सकता है इस घटना की बाद प्रशासन इस गाँव की दशा बदल दे।

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