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ये वो महिलाएं हैं जिनके जज़्बे को देश सलाम करता है

महिलाएं किसी भी मामले में पुरुषों से पीछे नहीं हैं, ऐसा तो हम सब जानते हैं। लेकिन आज के दौर में कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं, जिन्होंने शारीरिक अक्षमताओं से लड़कर कामयाबी का सफर तय किया है।अपनी मेहनत, इच्छाशक्ति के बलबूते इन महिलाओं ने वो सब पाया है, जिसकी हर एक शख़्स अपनी ज़िन्दगी में इच्छा रखता है।

आइये जानते हैं ऐसी ही 5 महिलाओं के बारें में जिन्होनें ना केवल खुद की पहचान बनाई, बल्कि ये दूसरी महिलाओं के लिए भी एक मिसाल हैं।

ये वो महिलाएं हैं जिनके जज़्बे को देश सलाम करता है

ये वो महिलाएं हैं जिनके जज़्बे को देश सलाम करता है

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1. दीपा मलिक- रजत पदक विजेता, पैरालंपिक गेम्स, 2016

1.	दीपा मलिक- रजत पदक विजेता, पैरालंपिक गेम्स, 2016

दीपा, कमर के नीचे से लकवाग्रस्त हैं। चलने में असमर्थ गीता ने अपने सपनों की उड़ान भरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 3 बड़े ऑपरेशन के बाद भी गीता ने पैरालंपिक में हिस्सा लिया और आज वो देश की पहली ऐसी महिला हैं, जिन्होंने पैरालंपिक गेम्स में पदक जीता है।

  2. अरुणिमा सिन्हा- एवरेस्ट फतह करने वाली पहली विकलांग महिला पर्वतारोही

  2. अरुणिमा सिन्हा- एवरेस्ट फतह करने वाली पहली विकलांग महिला पर्वतारोही

साल 2011 में ट्रेन से लखनऊ से दिल्ली जाते वक्त कुछ बदमाशों ने अरुणिमा को लूटने की कोशिश की। कामयाब नहीं हुए तो चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया। अरुणिमा का बायां पैर कट गया। दाएं पैर में लोहे की छड़ें डाली गई। लेकिन अरुणिमा ने हार नहीं मानी। इस भयानक हादसे से महज 2 साल बाद अरुणिमा ने एवरेस्ट फतह कर दिया। ऐसे जज़्बे को सलाम।

  3. लक्ष्मी, कैंपेनर, 'स्टॉप एसिड अटैक'

  3. लक्ष्मी, कैंपेनर, 'स्टॉप एसिड अटैक'

साल 2005 में लक्ष्मी के उपर एसिड अटैक हुआ था। गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली लक्ष्मी की तो जैसे दुनिया ही उजड़ गई। लेकिन लक्ष्मी ने हार नहीं मानी। आज लक्ष्मी अपनी ही जैसी एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं के लिए कैंपेन चलाती हैं। एसिड पीड़ितों को जीवन का मकसद समझा पाना ही लक्ष्मी की ज़िन्दगी का लक्ष्य है।

  4. सुधा चंद्रन, अभिनेत्री, डांसर

  4. सुधा चंद्रन, अभिनेत्री, डांसर

सुधा चंद्रन बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री है। सुधा ने साढे 3 साल के उम्र से ही डांस सीखना शुरू कर दिया था। डांस ही उनकी ज़िन्दगी थी। लेकिन एक सड़क हादसे में सुधा को अपना एक पैर गंवाना पड़ा। ज़िन्दगी से हार नहीं मान कर सुधा ने कृत्रिम पैरों का सहारा लिया, और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। सुधा को फिल्म मयूरी के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है।

  5. के.वी राबिया, राष्ट्रीय युवा पुरस्कार प्राप्त समाजसेवी

  5. के.वी राबिया, राष्ट्रीय युवा पुरस्कार प्राप्त समाजसेवी

राबिया को पोलियो होने के बाद महज 17 साल की उम्र से ही व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ा। लेकिन व्हील चेयर पर बैठकर ही राबिया, दूसरे लोगों के लिए मिसाल बन गई। केरल की रहने वाली राबिया ने साल 1990 में अपने जिले मलप्पुरम में साक्षरता अभियान चलाया। जिसे बड़े पैमाने पर लोगों का साथ मिला। 

  राष्ट्रीय युवा पुरस्कार प्राप्त करती राबिया

  राष्ट्रीय युवा पुरस्कार प्राप्त करती राबिया

इस सफलता के बाद राबिया रुकी नहीं और अपने जिले और राज्य के लिए कई और शिक्षा-अभियान चलाए। जिसे सरकार ने बख़ूबी समझा और राबिया को राष्ट्रीय युवा पुरस्कार दिया।

  ये महिलाएं मिसाल हैं

  ये महिलाएं मिसाल हैं

इन महिलाओं की हिम्मत भरी कहानी को हर एक भारतीय का सलाम है।

  ये महिलाएं, महिला सशक्तिकरण की बुनियाद हैं

  ये महिलाएं, महिला सशक्तिकरण की बुनियाद हैं

दीपा, अरुणिमा, लक्ष्मी, सुधा और राबिया जैसी महिलाएं ही देश में महिला सशक्तिकरण की आवाज़ हैं। जिस आवाज़ को सुनकर बाकी महिलाएं अपनी कमियों को नज़रअंदाज़ कर, अपने लक्ष्य को पाने के लिए जुट जाती हैं।

आपको इन महिलाओं में से किस की कहानी सबसे ज़्यादा प्रेरणात्कमक लगी ?

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