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बेटे ले रहे हैं ए.सी. का मज़ा, बूढ़ी माँ को छोड़ दिया सड़कों पर मरने के लिए  

कमाल के लोग है हमारे देश के यहाँ माँ लोगों के झूठें बर्तन धो कर चार बच्चों को अकेले पाल लेती है। मगर बड़े होने के बाद उन चार बच्चों से एक माँ नहीं पाली जाती। हमारे देश में बूढ़े माँ बाप की हालत देख कर जी भर आता है। हमारे देश के बेटे कितने योग्य है यह तो देश में बढ़ते अनाथ आश्रम के आंकड़े ही बता देते हैं। हम उस संस्कृति उस देश से संबंध रखते हैं जहाँ पर माता-पिता को देवतुल्य समझा जाता है। दर्द होता है यह देख कर जिस घर को उन्होंने खून पसीने से सींचा उस घर में उन्हें एक कोना पकड़ा कर बैठा दिया जाता है।    

हर बार इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली कई घटनाएँ सुनते हैं मगर इस घटना ने मुझे अन्दर तक झंझोड़ दिया।   

बेटे ले रहे हैं ए.सी. का मज़ा, बूढ़ी माँ को छोड़ दिया सड़कों पर मरने के लिए  

बेटे ले रहे हैं ए.सी. का मज़ा, बूढ़ी माँ को छोड़ दिया सड़कों पर मरने के लिए  

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रोड़ पर एक तरफ पड़ी थी वह 

रोड़ पर एक तरफ पड़ी थी वह 

खंडवा की सड़क के किनारे अधनंगे कपड़े में भूख प्यास से बेसुध एक बूढ़ी औरत लेटी हुई थी। एक सज्जन ने उसे खाना खिलाया और अपने काम से निकल गया मगर पूरा दिन वह बस उसी के बारे में सोचता रहा।  

जब वह वापस आये तब भी वह वहीं थी 

जब वह वापस आये तब भी वह वहीं थी 

जब वह वापस आये तब भी वह वहीं उसी हाल में थी उस सज्जन को दया आ गई वह फिर उस बूढ़ी औरत के पास गया उससे बातें की और खाना खिलाया। 

बेटे छोड़ गए 

बेटे छोड़ गए 

उस सज्जन ने जब वहाँ मौजूद युवाओं से पूछा की यह यहाँ कैसे आई जवाब सुन कर वह स्तब्ध रह गया। उसे वहाँ उसके बेटे ही मरने के लिए छोड़ गए  

पहुंचाया अनाथ आश्रम 

पहुंचाया अनाथ आश्रम 

स्थानीय लोगों एवं समाज सेवकों की मदद से बूढ़ी अम्मा को अनाथ आश्रम पहुंचाया।  

सोशल मीडिया पर मिला समर्थन 

सोशल मीडिया पर मिला समर्थन 

किसी ने बूढी अम्मा की तस्वीर सोशल मीडिया पर डाल दी उसके बाद तो यह ज़म कर वायरल हुई लोगों की सवेदना प्रोत्साहन सब मिल रहा था इसी से सरकार भी हरकत में आई और बूढ़ी अम्मा के लिए उचित व्यवस्था की गई। 

देश में बुजुर्गों की संख्या हुई 7 करोड़ 

देश में बुजुर्गों की संख्या हुई 7 करोड़ 

भारत में बुजुर्गो की संख्या 7 करोड़ हो गई है। एक सर्वे ने चोका देने वाले आंकड़े दिखा कर खुलासा किया की लगभग एक तिहाई बुजुर्ग माता पिता अपने बच्चों के साथ नहीं रहते।

हम विश्वगुरु है हमारी संस्कृति सभ्यता देख कर सम्पूर्ण विश्व आश्चर्य में पड़ जाता है। मगर यह आंकड़े दिखा कर हम दुनिया को क्या दिखाना चाहते हैं?    

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