Share this post

दुनिया की 10 अज़ीब रस्में, कृप्या कमज़ोर दिल वाले दूर ही रहें   

दुनिया के हर हिस्से में एक प्राचीन किस्सा बसा होता है। और वह किस्सा लोगों की आस्था से कब लोगों का धर्म बन जाता है यह किसी को पता नहीं चलता।

और अपने देश में तो चाहे शोक से शुरू हुई चीज़ भी चंद सालों में रस्म बन जाती है और फिर उस रस्म को बचाना ही हमारा कर्तव्य।

 जब हमारे देश में ही हर 2 किलोमीटर पर रस्में बदल जाती है तो सोचो दुनिया भर में कितनी रस्में होंगी। उन्हीं रस्मो में से पेश है आपके सामने 10 एसी अज़ीब रस्मे जिन्हें देख कर आप हैरान रह जायंगे। 

दुनिया की 10 अज़ीब रस्में, कृप्या कमज़ोर दिल वाले दूर ही रहें   

दुनिया की 10 अज़ीब रस्में, कृप्या कमज़ोर दिल वाले दूर ही रहें   

754 396
  in OMG!

1. अपने ही मृत रिश्तेदारों की अस्थियां खाते हैं।

1. अपने ही मृत रिश्तेदारों की अस्थियां खाते हैं।

आपको यह जानकार बहुत आश्चर्य होगा, लेकिन यह सच है कि ब्राजील और वेनेजुएला के कुछ आदिवासी समुदाय अपने ही मृत रिश्तेदारों की अस्थियां खाते हैं। शव को जलाने के बाद बची हड्डियां और राख का सेवन किया जाता है। इसके लिए वह केले के सूप का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसा करने से यह लोग अपनों के प्रति जुड़ाव और प्यार महसूस करते हैं।

2. मृत व्यक्ति के शारीर के टुकड़े खाने के लिए मशहुर है वाराणसी के अघोरी 

2. मृत व्यक्ति के शारीर के टुकड़े खाने के लिए मशहुर है वाराणसी के अघोरी 

वाराणसी के अघोरी मृत व्यक्ति के शरीर के टुकड़े और मांस के लूथड़े खाने के लिए कुख्यात हैं। इनका मानना है कि ऐसा करना से इनके मन से मौत का डर हमेशा के लिए चला जाएगा। इसके अलावा इन्हें आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति हो जाएगी।

3. बॉडी मॉडिफिकेशन

3. बॉडी मॉडिफिकेशन

पपुआ न्यूगिनी कनिंनगारा के लोग बॉडी मॉडिफिकेशन जैसी डरावनी रस्म निभाते हैं। इसमें वह शरीर को खुरचकर डिजाइन बनाते हैं, जिससे यह निशान जीवन भर रह जाते हैं। वहीं, हॉज टम्बरान (आत्माओं का घर) नामक रस्म में किशारों को आत्माओं के घर अकेले दो महीने तक छोड़ दिया जाता है। इसके बाद उन्हें मर्द बनाने की परंपरा निभाई जाती है। उनके शरीर पर बांस के लकड़ी से छोटे खूनी निशान बनाए जाते हैं। यह निशान इस समुदाय में मर्दानगी की निशानी है।

4. शिया मुस्लिम की अनोखी परम्परा 

4. शिया मुस्लिम की अनोखी परम्परा 

दुनियाभर में शिया मुस्लिम पैगंबर साहब के पोते इमाम हुसैन की मौत में शोक व्यक्त करते हैं। हुसैन की मौत शिया मुस्लिम द्वारा 7वीं सदी में करबला के युद्ध में हुई थी। सभी शिया हुसैन की याद में शोक करते हुए कहते हैं, हम उस युद्ध में क्यों नहीं थे, अगर होते तो हुसैन को बचा लेते। सभी शिया खुद को पाप का भागीदार मानते हैं। वह अपने ऊपर अत्याचार करते हैं और खुद को लहूलुहान करते हैं।

 5. बंजी जंपिंग

 5. बंजी जंपिंग

पेसेफिक द्वीपसमूह पर स्थित बनलेप गाँव में बड़ी अज़ीब रस्म निभाने की परम्परा है कोल नामक सह परंपरा लैंड डायविंग या बंजी जंपिंग कहलाती है। ग्रामीण लोग ड्रम बजाते हैं, नाचते हैं और गाते हैं। वह लकड़ी के ऊंचे टॉवर से पैरों में रस्सी में बांधकर छलांग लगाते हैं। इनकी मान्यता है कि जितनी ऊंचाई से यह कूदेंगे, भगवान उतना ही आशीर्वाद देंगे। 

6. वोडून  

6. वोडून  

वोडून पश्चिमी अफ्रीका के हिस्से का धर्म है, जिसमें इस समुदाय के लोग जंगलों में तीन दिन तक बिना खाने और पानी के रहते हैं। यहाँ यह आत्माओं से खुद को जोड़ते हैं। लोगों का मानना है कि उनका शरीर बेहोश हो जाता है।

7. स्काई बुरिअल 

7. स्काई बुरिअल 

तिब्बत के बौद्ध समुदाय के लोग पवित्र रस्म झाटोर हजारों सालों से निभाते आ रहे हैं। यह मृत शरीर को खुले आसमान में गिद्धों को दूसरे पक्षियों के लिए रख देते हैं। तिब्बत में मान्यता है कि इससे इंसान का पुर्नजन्म होगा। यहां मृत व्यक्ति के लाशा को टुकड़ों में काट कर सबसे ऊंची जगह फैला दिया जाता है।

8. आग पर चलना 

8. आग पर चलना 

मलेशिया के पेनांग में 9 देवताओं का त्यौहार मनाने की परंपरा है। यहां की धार्मिक मान्यता के मुताबिक, आग के अंगारों पर चलने का चलन है। विश्वास है कि इससे यह आग से निकल कर पवित्र हो जाएंगे और बुरी शक्तिओं के बंधन से मुक्त हो जाएंगे।

9. मुर्दों के संग नाचते हैं 

9. मुर्दों के संग नाचते हैं 


भले ही आप सोच कर थोड़ा हंसे, लेकिन यह सच है कि मेडागास्कर में आदमी के मरने के बाद त्यौहार जैसा माहौल होता है। फामाडिहाना यानी टर्निग ऑफ द बोन्स रस्म में लोग दफन शवों को फिर से निकाल उनकी यात्रा निकालते हैं। इस दौरान लोग गाते हैं, नाचते हैं। मस्जिद में कब्रों के नजदीक जोर से म्यूजिक बजाते हैं। इसी अजीबोगरीब परंपरा को दो साल से सात साल के बीच में किया जाता है।

10.  वेजेटैरियन फेस्टिवल

10.  वेजेटैरियन फेस्टिवल

थाईलैंड के फुकेट में हर साल वेजेटैरियन फेस्टिवल मनाया जाता है। इस फेस्टिवल में एक रस्म निभाई जाती है जो कि सबसे ज्यादा हिंसात्मक और दर्दनाक रस्म है। इसमें भक्त लोग चाकू, भाला, बंदूक, सुई, तलवारें और हुक जैसी चीजों से अपने शरीर को भेदते हैं। इनका विश्वास है कि भगवान उनकी रक्षा कर रहे हैं।

Loved this? Spread it out then

Report

close

Select you are Reporting

expand_more
  • GreenPear
  • GreenPear
  • GreenStrawberry
  • GreenStrawberry
  • RedApple
  • RedApple
  • +2351 Active user
Post as @guest useror
stop

NSFW Content Ahead

To access this content, confirm your age by signing up.