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लगी शर्त! आप हसें बिना ख़ुद को रोक नहीं पाएँगे

तो बात उस समय की हैं कि जब हम स्कूल में हुआ करते थे और मास्टर जी का जब पढ़ाने का मन नहीं होता था तो "Free Period" के नाम पर ये शरारतें करते रहते थे, क्यूँकि कागज़ का प्लेन बनाके उड़ाने में अगर ग़लती से वो प्लेन मास्टर जी पर जा गिरता तो हमारा "free period" मुर्गा बनने में तब्दील हो जाता इसलिए दोस्तों के साथ बैठे बैठे मज़ा लेने के लिए ये नुस्ख़ा आज़मा लिया और तब से अब तक,फुरसत के वक़्त में पुरानी यादों को ताज़ा करने के लिए ये "tongue twister" बोलने की कोशिश कर लेते हैं और बोल पाते हैं या नहीं ये आप एक बार ख़ुद पढ़िए, अपने आप समझ जाएंगे।

लगी शर्त! आप हसें बिना ख़ुद को रोक नहीं पाएँगे

लगी शर्त! आप हसें बिना ख़ुद को रोक नहीं पाएँगे

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  in Hilarious

काली रेल, पीली रेल।  

काली रेल, पीली रेल।  

चलिए ज़्यादा नहीं 10 बार बोल के देखिये, अरे ये क्या आप तो 7 पर ही अटक गए।

पीतल के पतीले मे पपीता पीला पीला। 

पीतल के पतीले मे पपीता पीला पीला। 

जब तक आप ये बोलने की कोशिश कर रहे हैं तो मैं एक जोक लिख देती हूँ, एक साहब को दुनियाँ का सबसे खतरनाक जादू देखना था तो अपने दोस्त को कहते हैं "भाई दुनियाँ का सबसे ख़तरनाक जादू कहाँ होता हैं?" तो दोस्त बोलता है " चल भाई ब्यूटीपारलर के सामने खड़े हो जाते हैं।"

समझ समझ के समझ सको तो समझो दिल बार जानी। 

समझ समझ के समझ सको तो समझो दिल बार जानी। 

मैं शाहरुख खान के गाने की बात नहीं कर रही, ज़रा ये तो बोल के दिखाइए "समझ समझ के समझ को समझो,समझ समझना भी एक समझ है, समझ समझ कॆ जो ना समझे, मेरी समझ मे वो ना समझ है।"

कच्चा पापड़ पक्का पापड़। 

कच्चा पापड़ पक्का पापड़। 

इस कच्चा पापड़, पक्का पापड़ के चक्कर में देखिये सलमान खान खुद थक गए लेकिन "NHP" भैया "ना हो पाएगा"। 

खड्गसिंह के खड़कने से खड़कती है खिड़कीयाँ खिड़कीयों के खड़कऩे से खड़कता है खड्गसिंह। 

खड्गसिंह के खड़कने से खड़कती है खिड़कीयाँ खिड़कीयों के खड़कऩे से खड़कता है खड्गसिंह। 

तो जनाब हुआ यूँ के एक दोस्त दूसरे दोस्त को कहता है "भाई शादी में जाना है कोनसा कोट पेहनु" तो दोस्त जवाब देता है "भाई, पेटी-कोट पेहेन ले तू ही दिखेगा" हा हा हा...जैसे संजय दत्त को ही देख लिजिए फ़िल्मी दुनियाँ के "खड्गसिंह" कैसे नज़र आ रहे हैं, ख़ैर बाक़ी बातें फ़िज़ूल हैं आप तो ये "खड्गसिंह" को बोलके दिखाइए।  

ऊँट ऊँचा, ऊँट कि पीठ ऊँची, ऊँचे ऊँठ कि पूँछ ऊँची। 

ऊँट ऊँचा, ऊँट कि पीठ ऊँची, ऊँचे ऊँठ कि पूँछ ऊँची। 

ये तो आप 5 बार भी नहीं बोल पाएँगे, मुझे पक्का विश्वास हैं, ख़ुद आज़मा लिजिए यक़ीन ना हो तो आप 5 बार से ज़्यादा बोल ही नहीं सकते। 

चंदू के चाचा ने, चंदू की चाची को, चाँदनी रात में, चाँदनी चोंक में,चाँदी के चम्मच से, चटनी चटाई। 

चंदू के चाचा ने, चंदू की चाची को, चाँदनी रात में, चाँदनी चोंक में,चाँदी के चम्मच से, चटनी चटाई। 

और आख़री में ये सबसे आसान इसलिए चुना ताकि आप ना उम्मीद नहीं हो, क्यूँकि प्रारम्भ से अब तक आप ने कई सारी नाक़ाम कोशिश करके थक चुके होंगे, मुझे आपका पूरा ख़्याल है अब मैं ऎसा बिल्कुल नहीं चाहती के ये सारे एक बार बोलके देखिएगा, वो क्या हैं ना के आप नहीं बोल पाएँगे तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा, हा हा हा...

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