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जीवन की 10 महत्वपूर्ण बातें जो हमें बच्चों से सीखनी चाहिए

बेशक एक गुरु या शिक्षक के बिना हर किसी का जीवन अधूरा होता है। शिक्षक वह हस्ती होती है जो कच्ची मिट्टी को एक सुन्दर रूप देती है और उस मिट्टी के जीवन को मूल्य प्रदान करती है। हर बड़ा व्यक्ति किसी न किसी रूप में अपने से छोटों का शिक्षक होता है। पर गौर करने वाली बात यह है कि इस बड़े होने की प्रक्रिया में हम अक्सर छोटी-छोटी बातों को भूल जाते हैं जो एक छोटा सा बच्चा भी हमे सीखा सकता है। तो कहने का सार यह है कि बच्चे भी बड़ों को ऐसी कई बातें सिखाते हैं जिस पर वो गौर भी नहीं करते। तो आईए सीखते हैं ऐसी ही कुछ बच्चों वाली बातें।



जीवन की 10 महत्वपूर्ण बातें जो हमें बच्चों से सीखनी चाहिए

जीवन की 10 महत्वपूर्ण बातें जो हमें बच्चों से सीखनी चाहिए

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1. बिंदास मुस्कुराना।

1. बिंदास मुस्कुराना।

आपने किसी बच्चे को मुस्कुराते हुए तो देखा ही होगा। कितनी मासूम, प्यारी, बेशर्म सी हँसी होती है उनकी। साथ ही उन्हें मुस्कुराने के लिए कोई बड़ी वजह भी नहीं लगती। सोचिये हम कितनी दफ़ा कर पाते हैं ऐसा?

2. हँसी बाँटना।

2. हँसी बाँटना।

बच्चे केवल खुद ही नहीं मुस्कुराते, बल्कि वह दूसरों को हँसाने का मौका भी नहीं छोड़ते। आपने देखा होगा कि बच्चे अक्सर उसी काम को बार-बार दोहराते हैं जिसको देखकर दूसरे हँसने लगें। हम शायद ही कभी इतनी आसानी से किसी को हँसा पाते होंगे।

3. बीती बातों को भूल जाना।

3. बीती बातों को भूल जाना।

चाहे वो आपसे रूठे हों या आपने उन्हें डांट लगाई हो कुछ देर मुँह फुलाने के बाद वो सबकुछ भुलाकर आपके पास लौट ही आते हैं।लेकिन हम तो बड़े होते-होते छोटी-छोटी बातों को भी दिल पर लगाने लगते हैं।

4. खुलकर रोना।

4. खुलकर रोना।

वैसे बच्चे अक्सर कुछ ज्यादा ही रोते हैं पर साथ ही उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई उनका मजाक तो नहीं बनाएगा। खैर हम बच्चों की तरह तो नहीं रो सकते पर हमेशा ही अपने आँसू छुपाना गलत होता है।

5. दिल की बातें कह देना।

5. दिल की बातें कह देना।

बच्चे अपनी हर छोटी सी चोट को लेकर भी माँ के पास पहुँच जाते हैं। साथ ही वो हर बात भी अपनों से कह देते हैं। पर जैसे ही हम बड़े होते हैं बड़ी-बड़ी बातें भी दिल में रखकर घुटने लगते हैं। अपनों से बच्चों की तरह दिल की बाते कह देना गलत नहीं होता।

6. प्यार करना।

6. प्यार करना।

हम बड़े तो प्यार को कई परिभाषाएँ दे देते हैं। बच्चों को तो इसका मतलब भी नहीं पता होता फिर भी वो बिना स्वार्थ के जो पसंद हो उससे प्यार करते हैं। वो तो अपने खिलौनों (जो उन्हें बदले में कुछ नही दे सकते) से भी इतना प्यार करते हैं जितना अपने माँ-पापा से।

7. कोशिश न छोड़ना।

7. कोशिश न छोड़ना।

कोई भी बच्चा एक बार में चलना नहीं सीख सकता। वह तब तक कोशिश नहीं छोड़ता जब तक सीख न जाए। साथ वह यह कोशिश पूरे दिल से खुश होकर करता है। वही हम तो एक कोशिश करने पर नाकामयाबी मिलने पर ही निराश होने लगते हैं।

8. बेफिक्र होना।

8. बेफिक्र होना।

बच्चे जो दिल में आए वो ही करते हैं। उन्हें अपने आस पास कौन है इससे फर्क नहीं पड़ता। पर हम शायद बहुत सी चीज़ें लोग क्या सोचेंगे यह सोचकर ही नही कर पाते।

9. जिद्दी होना।

9. जिद्दी होना।

बच्चे यूँ तो बहुत ही जिद्दी होते हैं। उनकी हर जिद पूरी भी नहीं की जा सकती। वो कुछ गलत चीज़ों की जिद इसीलिए करते हैं क्योंकि वो नासमझ होते हैं। पर हम तो समझदार होते हैं फिर भी जायज़ चीज़ों के लिए भी जिद नहीं करते।

10. नादानी।

10. नादानी।

बच्चे बहुत मासूम होते हैं। उन्हें दुनियादारी जैसी बड़ी बातें नहीं समझ आती। इसीलिए वह ज्यादा परेशान भी नहीं होते हैं। आपको नहीं लगता कभी-कभी हमे भी कुछ बातों के लिए नादान बन जाना चाहिए। 

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