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भारतीय इतिहास- कुछ अनसुलझे किस्से मौत के

भारतीय इतिहास के कुछ सबसे अहम् पन्नो में आज भी ऐसे सवाल जीवित हैं जिनके जवाब विशेषज्ञों की किताब में अब तक दर्ज नहीं किये जा सके हैं। भारतीय राजनेताओं, वैज्ञानिकों से लेकर कलाकार तक इस फेहरिस्त में शामिल हैं। इनमें से कुछ मौते विदेशी सरजमीं पर तो कुछ भारतीय मिट्टी में हुई। परंतु इसके बावजूद इन मशहूर हस्तियों की मौत के रहस्य पर से पर्दा नहीं उठ पाया है। आगे हम आपके सामने कुछ ऐसी ही अनसुलझी पहेलियां लेकर आ रहे हैं।

आइये जानते हैं इन मौतों से जुड़े कुछ तथ्य।

भारतीय इतिहास- कुछ अनसुलझे किस्से मौत के

भारतीय इतिहास- कुछ अनसुलझे किस्से मौत के

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  in History

1. लाल बहादुर शास्त्री -

1. लाल बहादुर शास्त्री -

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु दुनिया के कुछ सबसे संदेहास्पद परिस्थितियों में हुई मौत में से एक है।

पाक के साथ ताशकंद समझौते के अगले ही दिन होटल के कमरे में भारतीय प्रधानमंत्री का शव पाया जाता है। उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से बताई जाती है। परंतु इस बात की संभावना जताई जाती रही है कि उनकी ज़हर देकर हत्या की गई थी।

इस अहम् मामले के छानबीन के दस्तावेज भारतीय संसद के संग्रहालय में भी मौजूद नहीं है। शास्त्री जी के शव का पंचनामा भी नहीं करवाया गया था।

2. नेताजी सुभाष चंद्र बोस-

2. नेताजी सुभाष चंद्र बोस-

18 अगस्त 1945 को ताइवान के समीप दुर्घटनाग्रस्त हुए जापानी विमान में नेताजी बोस की मृत्यु का दावा किया जाता रहा है। परंतु तब से लेकर आज तक नेताजी की मौत सारे विश्व के लिए एक पहेली बनी हुई है।

कहा जाता है कि नेताजी ने इस घटना के बाद काफी समय तक अज्ञातावास में अपना जीवन गुजारा है।

3. डॉ होमी जहांगीर भाभा -

3. डॉ होमी जहांगीर भाभा -

भारतीय नाभिकीय ऊर्जा कार्यक्रम के विख्यात वैज्ञानिक डॉ भाभा की मृत्यु भी विमान दुर्घटना में हुई थी। 1966 में डॉ भाभा ने बयान देते हुए कहा था कि 'भारत अल्प समय में ही नाभिकीय ऊर्जा संपन्न हो जायेगा'। उनके इस बयान के बाद स्विस की पहाड़ियों में उनके विमान को दुर्घटनाग्रस्त होना बताया गया था। डॉ भाभा के विमान का मलबा आज तक नहीं मिला है।

4. संजय गाँधी-

4. संजय गाँधी-

यह बात थोड़ी चौकाने वाली है कि संजय गाँधी के ऊपर कुल 3 बार जानलेवा हमले हुए थे। परंतु हर बार बचने के बाद 1980 में दिल्ली के सफदरजंग हवाई अड्डे के समीप एयरक्राफ्ट दुर्घटना में उनकी मौत हो गई।

उस समय आई कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक़ संजय गाँधी की मौत के पीछे उनकी माँ व भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की साजिश थी। परंतु यह बात कभी साबित नहीं की जा सकी।

5. डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्ज़ी -

5. डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्ज़ी -

नेहरू सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे डॉ मुखर्जी कश्मीर को अलग अधिकार देने व अनुच्छेद 370 के खिलाफ थे। "एक देश में दो निशान, दो प्रधान, नहीं चलेगा, नहीं चलेगा।" यह नारा देने वाले मुखर्जी को 1958 में उनके कश्मीर भाषण के पूर्व गिरफ्तार कर लिया गया था।

इस मामले में संदेह इस बात से भी गहराता है कि मौत के बाद उनके शव का पंचनामा भी नहीं करवाया गया था।

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